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बाजार में है मंदी, तो इस तरह के शेयर ही खरीदें

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बाजार में है मंदी, तो इस तरह के शेयर ही खरीदें
कृष्णा नंद नारनोलिया, सीएमडी, नारनोलिया ग्रुप ऑफ कंपनिज
बीते कुछ महीने में शायद ही आप ऐसे कोई वित्तीय सलाहकार से मिले हों, जो कि किसी शेयर को खरीदने की जोरदार सलाह दिया हो. हालांकि निफ्टी 10 प्रतिशत से ज्यादा गिर चुका है, पर मिड और स्माल कैप इंडेक्स की हालत तो और भी बदतर है. वे सारे शेयर जिनके भाव काफी गिर चुके हैं, सिर्फ इसी वजह से उनकी खरीदारी की जाये, यह वाजिब नहीं होगा. आपको को भूंसे से गेहूं अलग करने की कला आनी चाहिए. समस्या सिर्फ अभी के बाजार की गिरावट नहीं है, बल्कि आर्थिक मंदी की भी है.
– आइएमएफ और आरबीआइ ने अनुमानित आर्थिक विकास की दर को घटा कर 6.7 प्रतिशत कर दिया है. जून तिमाही के जीडीपी आंकडे आने के बाद इसमें और गिरावट आ सकती है. अमेरिका और चीन के बीच छिड़ा व्यवसायिक युद्व भी विश्व के आर्थिक विकास पर अपना अलग ग्रहण लगा रहा है, जो कि भारत के निर्यात बढोतरी के प्रयास को रोक सकता है.
– ब्रिटेन का यूरोपियन यूनियन से अलगाव, जिसे ब्रेक्जिट कहा जाता है, जो कि 31 अक्तूबर तक होना तय लगता है, वह किसी शर्तों के मनवाए बगैर हो रहा है. ब्रिटेन के साथ गहरे व्यवसायिक संबंधों को देखते हुए भारत के लिए यह अच्छी बात नही है.
– घरेलू उपभागिता मे नेगेटीव ग्रोथ, मोटर उद्योग के जुलाई माह के बिक्री मे मे 31 प्रतिशत की जोरदार गिरावट और एफएमसीजी क्षेत्र की कंपनियां जैसे कि पारले आदि भी आर्थिक मंदी से जुझ रही हैं.
यहां आपको निवेश करते समय न सिर्फ चयनात्मक बल्कि विकास केंद्रित होने के साथ-साथ स्थिरता का भी ध्यान रखना होगा.
गैर साइक्लिकल बिजनेस वाली कंपनियों में निवेश भी बेहतर विकल्प भारतीय अर्थव्यवस्था के संदर्भ में गैर साइक्लिकल बिजनेस वाली कंपनियों के अंतर्गत नन-कॉमोडिटी वाली कंपनियों के साथ साथ एफएमसीजी और ऑटो कंपनियां भी हैं. इसमें प्राइवेट बैंक को भी जोड़ सकते हैं, जो कि कंजम्पसन ग्रोथ स्टोरी का प्रतिनिधित्व करती हैं.
कॉर्पोरेट गवर्नेंस के मानक पर खरी उतरने वाली कंपनियों में ही निवेश यद्यपि हमलोग इसे कॉर्पोरेट गवर्नेंस के नाम से जानते हैं, लेकिन इसमें मैनेजमेंट की उत्कृष्टता भी शामिल है. यदि आप पिछले वैश्विक मंदी का पुर्नवलोकन करें, तो आप पायेंगे की कॉर्पोरेट गवर्नेंस की प्रमाणिकता और पारदर्शिता पर खरी उतरने वाली कंपनियां ही सफल हो पायी हैं.
मार्जिन ऑफ सेफ्टी वाली कंपनियों में निवेश
बाजार मूल्य से कंपनी के कैश फ्लो मूल्य के अंतर को मार्जिन आफ सेफ्टी कहा जाता है और यह अंतर जितना ज्यादा होगा वह बेहतर माना जायेगा. हालांकि यह एकमा़त्र पैमाना नहीं हो सकता, इसे अन्य घटकों के साथ जोड़ कर देखा जा सकता है.
अंत में यही कहना यह है कि मंदी के समय आपको अपने ट्रेडिंग एकाउंट से मुंह मोड़ने से समस्या का निदान नहीं होगा बल्कि ऐसे ही बाजार में निवेश के कई महत्वपूर्ण अवसर मिलते हैं. इस दौर में आप सामान्य तेजी वाले बाजार के नियमों को लागू नहीं कर सकते है.

Disclaimer: शेयर बाजार से संबंधित किसी भी खरीद-बिक्री के लिए प्रभात खबर कोई सुझाव नहीं देता. हम बाजार से जुड़े विश्लेषण मार्केट एक्सपर्ट्स और ब्रोकिंग कंपनियों के हवाले से प्रकाशित करते हैं. लेकिन प्रमाणित विशेषज्ञों से परामर्श के बाद ही बाजार से जुड़े निर्णय करें.

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