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Home Business किसानों की आय व रोजगार बढ़ाने पर प्रधानमंत्री ने 40 अर्थशास्त्रियों के साथ की चर्चा

किसानों की आय व रोजगार बढ़ाने पर प्रधानमंत्री ने 40 अर्थशास्त्रियों के साथ की चर्चा

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किसानों की आय व रोजगार बढ़ाने पर प्रधानमंत्री ने 40 अर्थशास्त्रियों के साथ की चर्चा

नयी दिल्ली : बजट से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को देश के प्रमुख अर्थशास्त्रियों और उद्योग विशेषज्ञों के साथ आर्थिक हालात पर चर्चा की. देश के विकास को गति देने, किसानों की आय और रोजगार बढ़ाने के लिए आर्थिक नीति की रूपरेखा तैयार करने के लिए प्रधानमंत्री ने 40 से अधिक अर्थशास्त्रियों एवं विशेषज्ञों के साथ विचार-विमर्श किया और उनके सुझावों पर गौर किया. ‘आर्थिक नीतियां- आगे का रास्ता’ थीम पर इस बैठक का आयोजन नीति आयोग ने किया था.

विशेषज्ञों ने पांच समूहों में अर्थव्यवस्था, रोजगार, कृषि, जल संसाधन, निर्यात, एजुकेशन और स्वास्थ्य जैसे मुद्दों पर अपने सुझाव दिये. बैठक में उच्च आर्थिक वृद्धि हासिल करने के लिए बैंक और बीमा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश बढ़ाने, विनिवेश प्रक्रिया में तेजी लाने पर खास जोर रहा. अमेरिका और चीन के बीच जारी व्यापार युद्ध के बीच नये संरचनात्मक सुधारों पर भी चर्चा हुई.

प्रधानमंत्री ने सभी लोगों को अर्थव्यवस्था से जुड़े जटिल मुद्दों पर सुझाव देने पर धन्यवाद दिया और कहा कि उनकी सरकार सभी मुद्दों पर दिये गये सुझावों को अमल में लाने का प्रयास करेगी. मोदी की यह मुलाकात इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि उनके नेतृत्व में गठित नयी सरकार का पहला बजट पांच जुलाई को पेश किया जाना है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण लोकसभा में बजट पेश करेंगी. बैठक में वित्त मंत्रालय के सभी पांच सचिव, नीति आयोग के अधिकारी के अलावा केंद्रीय मंत्री शामिल हुए.

इन मुद्दों पर हुई चर्चा

बैठक में सरकार के प्रमुख एजेंडे देश की अर्थव्यवस्था को तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने, रोजगार के अवसरों में बढ़ोतरी, किसानों की आय दोगुनी करने और गरीबों को आर्थिक तौर पर सशक्त बनाने, जल संसाधन, निर्यात, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा हुई.

बैठक में इन्होंने लिया हिस्सा

बैठक में प्रधानमंत्री आर्थिक सलाहकार समिति के चेयरमैन बिबेक देबरॉय, टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरण, टाटा स्टील के वैश्विक सीइओ टीवी नरेंद्रन, आइटीसी लिमिटेड के संजीव पुरी, वेदांता लिमिटेड के चेयरमैन अनिल अग्रवाल, क्रिसिल के मुख्य अर्थशास्त्री धर्मकृति जोशी, एचएसबीसी के मुख्य अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी, बैंक ऑफ अमेरिका लिंच मुख्य अर्थशास्त्री इंद्रनील सेनगुप्ता, कोटक महिंद्रा एएमसी के एमडी नीलेश शाह, पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया के श्रीनाथ रेड्डी, जेपी मॉर्गन के मुख्य अर्थशास्त्री शाजिद शिनॉय, सिटी बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री समीरण चक्रवर्ती, आइसीआइसीआइ के मुख्य निवेश अधिकारी शंकरन नरेन, नोमुरा के मुख्य अर्थशास्त्री सोनल वर्मा, एसबीआइ के मुख्य आर्थिक सलाहकार सौम्य कांति घोष, पेटीएम के सीइओ विजय शेखर शर्मा, एनएसइ सीइओ विक्रम लिमये, आइआइएम अहमदाबाद के पुलक घोष, अपोलो अस्पताल वाइस पृथ्वी रेड्डी, आरबीआइ के पूर्व गवर्नर विमल जालान, पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार शंकर आचार्य, प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के पूर्व सदस्य सुरजीत भल्ला के अलावा अन्य लोग शामिल हुए.

सरकार के सामने चुनौतियां

  • जनवरी-मार्च तिमाही की जारी जीडीपी वृद्धि के आंकड़ों के मुताबिक, 2018-19 की चौथी तिमाही में विकास दर महज 5.8 प्रतिशत रही, जो पांच साल का न्यूनतम स्तर है. इसे आगे बढ़ाना है.
  • 2017-18 में बेरोजगारी 6.1% थी, जो 45 सालों में सबसे ज्यादा है. इसको लेकर आलोचना हुई थी.
  • हाल ही में नीति आयोग की बैठक में पीएम मोदी ने कहा था कि भारत को 2024 तक पांच लाख करोड़ की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य बड़ी चुनौती है, लेकिन इसे हासिल किया जा सकता है.

सुझाव और जोर

  • टाटा संस के चेयरमैन चंद्रशेखरन ने इलेक्ट्रिक वाहनों को आगे बढ़ाने के नीति आयोग के प्रयासों की सराहना की. इस पर आयोग ने दुपहिया और तिपहिया वाहन निर्माताओं से 2025 को ध्यान में रखते हुए इलेक्ट्रिक वाहनों से ठोस सुझाव मांगा.
  • वेदांता रिसोर्सिस के प्रमुख अनिल अग्रवाल ने कोयला और खनन क्षेत्र में उदारीकरण को तेज करने पर जोर दिया.

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