[tdb_header_weather inline="yes" temp_color="#000000" loc_color="#000000" api="653566bd56b7ecfee45d74c0fc937fc1" float_right="yes" align_horiz="content-horiz-center" icon_size="24" icon_space="10" f_temp_font_family="420" f_temp_font_size="14" f_temp_font_weight="500" f_unit_font_size="14" f_loc_font_size="14" f_unit_font_family="882" location="Ranchi" icon_color="#000000"]
[tdb_header_categories align_horiz="content-horiz-left" el_align_horiz="content-horiz-left" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLXJpZ2h0IjoiNSIsImhlaWdodCI6IjQwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9fQ==" icon_size="18" limit="18" elem_text_color="#2d2800" f_elem_font_family="420" f_elem_font_size="16px" f_elem_font_weight="500" tdicon="tdc-font-fa tdc-font-fa-navicon-reorder-bars" inline="yes" shadow_shadow_size="0" shadow_shadow_offset_vertical="0" shadow_shadow_spread="0" bg_color="#f9f9f9" include="1028, 1081, 1446, 1228, 3706, 2624,1071"][tdb_mobile_horiz_menu inline="yes" menu_id="372" tdc_css="eyJwaG9uZSI6eyJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBob25lX21heF93aWR0aCI6NzY3LCJhbGwiOnsiYm9yZGVyLXN0eWxlIjoibm9uZSIsImRpc3BsYXkiOiIifX0=" f_elem_font_size="18px" f_elem_font_weight="eyJhbGwiOiI3MDAiLCJwaG9uZSI6IiJ9" f_elem_font_family="420" text_color_h="#f58220" main_sub_icon_size="13"]
Home Business अब मुकेश अंबानी की Reliance Jio के हाथों नहीं बिकेगी Rcom की परिसंपत्तियां

अब मुकेश अंबानी की Reliance Jio के हाथों नहीं बिकेगी Rcom की परिसंपत्तियां

0
अब मुकेश अंबानी की Reliance Jio के हाथों नहीं बिकेगी Rcom की परिसंपत्तियां

नयी दिल्ली : रिलायंस कम्युनिकेशंस (आरकॉम) और रिलायंस जियो ने दूरसंचार संपत्तियों की बिक्री के करार को समाप्त कर दिया है. करीब 15 महीने पहले अनिल अंबानी ने रिलायंस कम्युनिकेशंस की संपत्तियों की बिक्री अपने बड़े भाई मुकेश अंबानी की कंपनी को करने का करार किया था. दोनों समूहों ने सोमवार को इस करार को निरस्त करने की घोषणा करते हुए कहा कि सरकार और ऋणदाताओं से मंजूरी मिलने में देरी की वजह से उन्हें यह कदम उठाना पड़ा है.

आरकॉम ने शेयर बाजारों को दी गयी सूचना में कहा कि कई कारणों की वजह से इस सौदे को तय की गयी शर्तों के अनुरूप पूरा करना मुश्किल था. इसमें एक प्रमुख वजह यह है कि 15 महीने और 45 बैठकों के बाद भी आरकॉम के करीब 40 विदेशी और भारतीय ऋणदाताओं से प्रस्तावित सौदे के बारे में सहमति या अनापत्ति नहीं मिल पायी.

इसके अलावा, दूरसंचार विभाग से अनुमति और मंजूरियां मिलने में भी विलंब हुआ. एक अन्य प्रमुख वजह आरकॉम के बोर्ड द्वारा एक फरवरी, 2019 को लिया गया फैसला है, जिसमें कंपनी के ऋण बोझ का राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) के जरिये तेजी से निपटान किया जाना है. साथ ही, एनसीएलएटी ने 4 फरवरी, 2019 को आदेश जारी कर आरकॉम, आरटीएल और आरआईटीएल की चल या अचल संपत्तियों की बिक्री पर रोक लगा दी है. बयान में कहा गया है कि आरकॉम समूह एनसीएलटी प्रक्रिया के जरिये अपने सभी कर्ज का पारदर्शी तरीके से निपटान को प्रतिबद्ध है.

दिसंबर, 2017 में आरकॉम ने वायरलेस स्पेक्ट्रम, टावर, फाइबर और मीडिया कन्वर्जेंस नोड्स संपत्तियों की बिक्री के लिए करार किया था. इस राशि का इस्तेमाल कंपनी के भारी भरकम 46,000 करोड़ रुपये के कर्ज को कम करने के लिए किया जाना था. इससे पहले सोमवार को रिलायंस कम्युनिकेशंस ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार स्वीडन की दूरसंचार उपकरण कंपनी एरिक्सन का 458.77 करोड़ रुपये का भुगतान चुका दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्देश में कहा था कि यदि आरकॉम इस राशि को अदा नहीं करती है, तो कंपनी के चेयरमैन अनिल अंबानी को जेल जाना पड़ेगा.

Disclaimer: शेयर बाजार से संबंधित किसी भी खरीद-बिक्री के लिए प्रभात खबर कोई सुझाव नहीं देता. हम बाजार से जुड़े विश्लेषण मार्केट एक्सपर्ट्स और ब्रोकिंग कंपनियों के हवाले से प्रकाशित करते हैं. लेकिन प्रमाणित विशेषज्ञों से परामर्श के बाद ही बाजार से जुड़े निर्णय करें.

ऐप पर पढें
होम आप का शहर
News Snap News Reel