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Home Business ”अगर इसी तरह कीमतों में गिरावट रही, तो रेपो रेट में और हो सकती है कटौती”

”अगर इसी तरह कीमतों में गिरावट रही, तो रेपो रेट में और हो सकती है कटौती”

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”अगर इसी तरह कीमतों में गिरावट रही, तो रेपो रेट में और हो सकती है कटौती”

मुंबई : रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने गुरुवार को रेपो रेट में कटौती का अहम कारण बताते हुए कहा कि कीमतों में नरमी की वजह से रेपो रेट में 0.25 फीसदी कटौती की गुंजाइश बनी है और अगर मुद्रास्फीति के घटे अनुमान का लक्ष्य हासिल किया जाता है, तो इसमें और कमी की जा सकती है. गवर्नर ने कहा कि रेपो रेट 0.25 फीसदी कम कर 6.25 फीसदी करना अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्रों में व्यापक तौर पर कर्ज वृद्धि का उपाय है.

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मौद्रिक नीति समीक्षा के बाद परंपरागत संवाददाता सम्मेलन में दास ने कहा कि जो अनुकूल वृहत आर्थिक स्थिति बन रही है, वह कदम उठाने की जरूरत को रेखांकित करती है. जब कीमत स्थिरता के मकसद के बाद आर्थिक वृद्धि के उद्देश्य से निर्णायक और समयबद्ध तरीके से कदम उठाना महत्वपूर्ण है. गवर्नर ने कहा कि कीमत की स्थिरता के तहत मुद्रास्फीति आंकड़े को मध्यम अवधि में 4 फीसदी के दायरे में रखने की जिम्मेदारी है और मौद्रिक नीति समिति ने आरबीआई कानून के प्रावधानों से बाहर कुछ नहीं किया है.

यह पूछे जाने पर कि अगले वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में मुद्रास्फीति के 3.9 फीसदी रहने के अनुमान को देखते हुए क्या नीतिगत दर में कटौती की और गुंजाइश है, दास ने इसका सकारात्मक जवाब दिया. उन्होंने कहा कि अगले 12 महीनों में अगर महंगाई दर 3.9 फीसदी रहती है या अधिकतम 4 फीसदी या उससे नीचे रहती है, मुझे लगता है कि कदम उठाने की गुंजाइश बचती है.

एक सवाल के जवाब में डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने कहा कि यह कहना ठीक नहीं है कि आज की नीतिगत दर में कटौती का कदम जल्दबाजी में उठाया गया है. उन्होंने कहा कि अक्टूबर के बाद से तेल कीमतों में गिरावट तथा खाद्य वस्तुओं के दाम में नरमी से महंगाई दर नीचे आयी है.

आचार्य ने कहा कि केंद्रीय बैंक छोटे कदम उठाकर आगे बढ़ता है. अक्टूबर की मौद्रिक नीति समीक्षा के बाद हमने सोचा कि तेल में अभी नरमी आयी है. ऐसे में दिसंबर में कड़े नीतिगत रुख को तुरंत वापस लेना उपयुक्त नहीं था.

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