प्रो नवल किशोर चौधरी
अर्थशास्त्री
केंद्रीय बजट 2019-20 अंतरिम बजट है. यह चुनाव पूर्व होने के कारण अंतरिम बजट है. जिसकी अपनी सीमाएं हैं. चुनावी बजट का अपना स्वभाव होता है, चरित्र होता है. अंतरिम बजट की अपनी सीमाएं होती हैं. इन सीमाओं के अंदर यह बजट लोगों को चुनाव के पहले लुभाने का एक प्रयास है, लेकिन इसका एक संदर्भ है और यह संदर्भ मुख्य रूप से राजनीतिक है. इस अंतरिम बजट में राजकोषीय घाटा के बढ़ने का भी संकेत है. इसका बुरा प्रभाव महंगाई पर पड़ सकता है. करेंट एकाउंट डेफिसिएट के बढ़ने का भी संकेत है. यह भी शुभ लक्षण नहीं है.
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