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Home Business दुनियाभर के शेयर बाजारों में उथल-पुथल से सेंसेक्स धड़ाम, निफ्टी भी 10,300 के नीचे

दुनियाभर के शेयर बाजारों में उथल-पुथल से सेंसेक्स धड़ाम, निफ्टी भी 10,300 के नीचे

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दुनियाभर के शेयर बाजारों में उथल-पुथल से सेंसेक्स धड़ाम, निफ्टी भी 10,300 के नीचे

मुंबई : दुनियाभर के शेयर बाजारों में उठा-पटक के चलते गुरुवार को निवेशकों का रुख प्रभावित हुआ. इससे घरेलू शेयर बाजार भी अछूते नहीं रहे. बंबई शेयर बाजार का सेंसेक्स 750 अंक से ज्यादा गिरकर बंद हुआ और निफ्टी भी 10,300 अंक से नीचे चला गया. विदेशी कोष की लगातार निकासी ने भी निवेशकों को चिंता में डाल दिया.

इसे भी पढ़ें : शेयर बाजार में गिरावट का दौर जारी, शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 35,000 अंक से नीचे पहुंचा

बंबई शेयर बाजार का 30 कंपनियों के शेयरों पर आधारित सेंसेक्स में कारोबार की शुरुआत में 1,000 अंक से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गयी और 34,000 अंक के स्तर से नीचे जाकर यह 33,723.53 अंक के स्तर को छू गया. बाद में थोड़ा संभलकर दोपहर बाद के कारोबार में यह 34,325.09 अंक तक आ गया.

बुधवार को 461.42 अंक चढ़ा था सेंसेक्स

कारोबार के अंत में सेंसेक्स 759.74 अंक यानी 2.19 फीसदी गिरकर 34,001.15 अंक पर बंद हुआ. 11 अप्रैल के बाद यह सेंसेक्स का सबसे निचला बंद स्तर है. एक दिन पहले बुधवार को सेंसेक्स 461.42 अंक की बढ़त के साथ बंद हुआ था.

225.45 अंक गिरा निफ्टी

इसी प्रकार, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 225.45 अंक अथवा 2.16 फीसदी की गिरावट के साथ 10,234.65 अंक पर बंद हुआ. दिन में कारोबार के दौरान यह 10,138.60 अंक से 10,335.95 अंक के बीच बना रहा. जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेस के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार ने कहा कि अमेरिकी शेयर बाजार में आयी तेज गिरावट के चलते दुनियाभर के बाजारों में बिकवाली का दौर रहा. घरेलू शेयर बाजार की गिरावट इसी का हिस्सा है.

अमेरिकी अर्थव्यवस्था में सुधार का पड़ रहा असर

वीके विजय कुमार ने कहा कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था अभी अच्छा प्रदर्शन कर रही है. इस वजह से वहां महंगाई बढ़ रही है. अमेरिका की सरकारी प्रतिभूति दुनिया भर में जोखिम रहित परिसंपत्ति मानी जाती है. अमेरिका के 10 साल के बॉन्ड पर प्रतिफल 3.15 फीसदी के आसपास रहा. इसके चलते निवेशकों ने भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं से पूंजी की निकासी करना शुरू किया है.

डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर

डॉलर के मुकाबले उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्रा भी कमजोर हुई है. इससे भी निवेशकों के बीच सावधानी भरा रुख बना हुआ है. शुरुआती कारोबार में डॉलर के मुकाबले रुपया 74.50 के रिकॉर्ड निम्न स्तर पर पहुंच गया. बाद में दिन में कारोबार के समय इसमें थोड़ा सुधार आया और यह 74 के स्तर पर पहुंच गया.

विदेशी निवेशकों ने 1000 करोड़ रुपये से अधिक की निकासी

आरंभिक आंकड़ों के अनुसार, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने बुधवार को शेयर बाजार से 1,096 करोड़ रुपये की निकासी की, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 1,893 करोड़ रुपये का निवेश किया.

वॉल स्ट्रीट में नुकसान का दुनियाभर में असर

अमेरिका के वॉल स्ट्रीट में गिरावट का असर एशियाई बाजारों पर भी दिखा. गुरुवार को चीन का शेयर बाजार अपने चार साल के निचले स्तर पर चला गया. वहीं, जापान, कोरिया और ऑस्ट्रेलिया के शेयर बाजारों में भी गिरावट दर्ज की गयी. चीन का शंघाई कंपोजिट 5.2 फीसदी गिरकर नवंबर 2014 के बाद अपने सबसे निचले स्तर पर चला गया. इसी प्रकार जापान के निक्केई -225 में भी चार प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गयी. दक्षिण पूर्वी एशिया के शेयर बाजारों में भी इतनी गिरावट देखी गयी. मुद्रा विनिमय कारोबार करने वाली प्रमुख कंपनी ओएएनडीए के स्टीफन इनेस ने कहा कि गुरुवार को शेयर बाजार में तेज गिरावट देखी गयी.

निवेशकों ने बड़े पैमाने पर की निकासी

निवेशकों ने बड़े पैमाने पर निकासी की. इससे वैश्विक बाजार पर संकट के बादल छा गये हैं. अमेरिका में ब्याज दरों की बढ़ोतरी को लेकर निवेशकों का रुख सावधानी भरा रहा. इससे कंपनियों के लिए कर्ज लेना महंगा हो गया, जो आर्थिक वृद्धि को प्रभावित कर सकता है.

डोनाल्ड ट्रंप के बयान ने शेयर बाजारों पर डाला गहरा प्रभाव

बुधवार को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में बढ़ोतरी करके गलती कर रहा है. यह उसका सनक भरा कदम लगता है. इस बयान के बाद वॉल स्ट्रीट पर भारी बिकवाली हुई और शेयर बाजार धड़ाम से गिर पड़े. इसका असर दुनियाभर के शेयर बाजारों पर देखा गया.

Disclaimer: शेयर बाजार से संबंधित किसी भी खरीद-बिक्री के लिए प्रभात खबर कोई सुझाव नहीं देता. हम बाजार से जुड़े विश्लेषण मार्केट एक्सपर्ट्स और ब्रोकिंग कंपनियों के हवाले से प्रकाशित करते हैं. लेकिन प्रमाणित विशेषज्ञों से परामर्श के बाद ही बाजार से जुड़े निर्णय करें.

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