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गूगल क्रोम के हुए दस साल

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गूगल क्रोम के हुए दस साल

माइक्रोसॉफ्ट के इंटरनेट एक्सप्लोरर, एप्पल के सफारी और ओपेन सोर्स फायरफैक्स जैसे वेब ब्राउजरों से मुकाबला करने के लिए गूगल ने 2008 की पहली सितंबर को क्रोम ब्राउजर बाजार में उतारा था. बीते एक दशक में इंटरनेट एक्सप्लोरर तो गायब ही हो गया और उसकी बड़ी जगह क्रोम के हिस्से में आ गयी.

पहले साल बाजार में इस ब्राउजर की हिस्सेदारी 0.3 फीसदी थी, जो आज 60 फीसदी तक जा पहुंची है. इस मौके पर गूगल ने क्रोम इस्तेमाल करनेवालों को ब्राउजर में नयी सुविधाएं देने के साथ इसके डिजाइन में भी बदलाव किया है. गूगल के संस्थापकों- सर्गेइ ब्रिन और लैरी पेज ने इस ब्राउजर के विकास के लिए मोजिला फायरफॉक्स के अनेक डेवलपरों को अपने साथ जोड़ा था.

साल 2008 में तो इसे विन्डोज कंप्यूटरों के लिए जारी किया गया था, पर समय के साथ इसके अनेक वर्जन आते रहे जिन्हें लिनक्स, मैक ऑपरेटिंग सिस्टम, आइफोन ओएस और एंड्रॉयड के साथ चलाया जा सकता है. यह पहला ऐसा ब्राउजर है जिसने अपने सर्च बार और यूआरएल बार को एक जगह समाहित किया था. इसमें सर्च इतिहास की कोई जानकारी जमा किये बगैर भी इंटरनेट सर्च करने की सहूलियत है.

Disclaimer: शेयर बाजार से संबंधित किसी भी खरीद-बिक्री के लिए प्रभात खबर कोई सुझाव नहीं देता. हम बाजार से जुड़े विश्लेषण मार्केट एक्सपर्ट्स और ब्रोकिंग कंपनियों के हवाले से प्रकाशित करते हैं. लेकिन प्रमाणित विशेषज्ञों से परामर्श के बाद ही बाजार से जुड़े निर्णय करें.

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