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Heritage को बचाने की खातिर ”पुराने साथियों” का सहारा लेगा Railway

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Heritage को बचाने की खातिर ”पुराने साथियों” का सहारा लेगा Railway

नयी दिल्ली : भारतीय रेल अपनी विरासत को बचाये रखने के लिए अपने ‘ पुराने साथियों’ यानी सेवानिवृत्त कर्मचारियों का सहारा लेगी. इसके लिए 65 वर्ष से कम आयु के सेवानिवृत्त कर्मचारियों की भर्ती की जायेगी और उन्हें मेहनताने के रूप में 1,200 रुपये प्रति दिन मिलेंगे. एक वरिष्ठ अधिकारी ने बुधवार को इसकी जानकारी दी.

रेलवे बोर्ड ने भाप इंजन, पुराने डिब्बों, भाप से चलने वाली क्रेन, पुराने समय के सिग्नल, स्टेशन उपकरण और भाप से चलने वाले उपकरण जैसे विरासती वस्तुओं को संरक्षित, पुनर्स्थापित और पुनर्जीवित करने के लिए सेवानिवृत्त रेल कर्मचारियों को शामिल करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. इसके तहत उन्हें प्रतिदिन 1,200 रुपये का भुगतान किया जायेगा.

रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि उनके पास रेलवे की विरासत के रखरखाव और मरम्मत का अनुभव है और वे नयी पीढ़ी के लिए कोच के रूप में काम कर सकते हैं. यह काम आसान नहीं है, एक घड़ी, जो 150 वर्ष पुरानी है-इतने वर्षों के बाद भी चल रही है. पुराने हाथों में वो हुनर है. कई वर्षों की उपेक्षा के बाद, भारतीय रेल ने अपना ध्यान एक बार फिर से अपनी विरासत के संरक्षण पर केंद्रित किया है.

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जोनल प्रमुखों के साथ हालिया बैठक में यह निर्णय किया गया है कि विरासती वस्तुओं के उचित संरक्षण और प्रदर्शन का सुनिश्चित करने की आवश्यकता है. जोनल रेलवे को बोर्ड की ओर से जारी पत्र के अनुसार, बोर्ड ने विभागों के प्रमुखों को अधिकतम 10 ऐसे सेवानिवृत्त कर्मचारियों की भर्ती करने का अधिकार दिया है, जिनके पास पुनरुद्धार और संरक्षण की प्रक्रिया के संबंध में परामर्श और मार्गदर्शन के लिए पर्याप्त कौशल हैं.

अधिकारियों ने कहा कि इन लोगों की तैनाती रेलवे के संग्रहालय और वर्कशाप में की जायेगी, जहां पर विरासत वाली वस्तुओं के रखरखाव की जरूरत है. उनकी भर्ती अधिकतम छह महीने के लिए संविदा के आधार पर होगी. साथ ही, उनकी चिकित्सा स्थिति और कौशल स्तर पर विचार किया जायेगा.

बोर्ड ने कहा कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों के पारिश्रमिक को उनकी पेंशन में जोड़ने पर उनके द्वारा लिये गये अंतिम वेतन से अधिक नहीं होगा. इसके अलावा, उन्हें ओवर टाइम, यात्रा या दैनिक भत्ता भी नहीं दिया जायेगा.

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