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Home Business लाइसेंसिंग नीति के तहत तेल एवं गैस ब्लाॅक की बोली में वेदांता, ओएनजीसी Top bidders

लाइसेंसिंग नीति के तहत तेल एवं गैस ब्लाॅक की बोली में वेदांता, ओएनजीसी Top bidders

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लाइसेंसिंग नीति के तहत तेल एवं गैस ब्लाॅक की बोली में वेदांता, ओएनजीसी Top bidders

नयी दिल्ली : सार्वजनिक क्षेत्र की ओएनजीसी और खनन दिग्गज अनिल अग्रवाल की वेदांता लि 55 तेल एवं गैस ब्लाॅक के लिए मंगायी गयी बोली में शीर्ष बोलीदाता रही हैं.

हाल में तैयार खुले क्षेत्र लाइसेंसिंग नीति (ओएएलपी) के तहत तेल एवं गैस क्षेत्रों की यह पहली नीलामी है. ये वे क्षेत्र हैं जिसे निजी एवं अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कंपनियों ने किनारा किया हुआ था. वेदांता ने जहां 55 ब्लाक के लिए, वहीं ओएनजीसी ने 37 ब्लाक के लिए बोली लगायी. ये बोलियां खुद से या समूह में लगायी गयी हैं. सार्वजनिक क्षेत्र की आयल इंडिया लि (ओआईएल) ने इसी तरह से 22 ब्लाक के लिए बोली लगायी. दो ब्लाॅक के लिए वेदांता एकमात्र बोलीदाता है, जबकि शेष में ओएनजीसी या ओआईएल प्रतिस्पर्धी हैं. रिलायंस इंडस्ट्रीज तथा उसकी सहयोगी बीपी ने एक भी क्षेत्र के लिए बोली नहीं लगायी. एस्सार आॅयल और रूस की रोसनेफ्ट समर्थित नयारा एनर्जी भी बोली से दूर रही. नीलामी में कोई भी विदेशी कंपनी शामिल नहीं हुई.

भारत 1999 से खोज एवं उत्पादन के लिए बोली आधार पर तेल एवं गैस क्षेत्र की पेशकश कर रहा है, तब से यह पहला मौका है जब कोई विदेशी कंपनी इसमें शामिल नहीं हुई. पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने खुला क्षेत्र लाइसेंसिंग नीति (ओएएलपी) को पासा पलटनेवाला बताया था. हाइड्रोकार्बन महानिदेशालय (डीजीएच) ने कहा कि कुल नौ कंपनियों से 110 बोलियां प्राप्त हुई. इसमें पांच सार्वजनिक क्षेत्र की तथा चार निजी क्षेत्र की हैं. इसके अलावा वेदांता की तेल इकाई केयर्न इंडिया, सेलन एक्सप्लोरेशन, एचओईसी तथा सन पेट्रो समेत अन्य निजी कंपनियों ने इसमें भाग लिया. ओएएलपी के तहत तेल एवं गैस का पता लगाने के लिए 55 ब्लॉक की पेशकश की गयी थी जिसके लिए बोली लगाने का समय बुधवार को समाप्त हो गया.

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की खोज एवं उत्पादन मामलों की तकनीकी इकाई डीजीएच ने नयी हाइड्रोकार्बन खोज एवं लाइसेंसिंग नीति (एचईएलपी) के तहत ओएएलपी के अंतर्गत की गयी पेशकश में बोली प्राप्त की है. सरकार ने पिछले साल जुलाई में कंपनियों को अपनी रुचि के ब्लाॅक चुनने की अनुमति दी है. इसका मकसद 28 लाख वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र को खोज एवं उत्पादन कार्य के अंतर्गत लाना है जहां अभी ऐसी कोई गतिविधियां नहीं हो रही हैं. इस नीति के तहत कंपनियों को वैसे किसी भी क्षेत्र में संभावित तेल एवं गैस का पता लगाने के लिए रुचि पत्र देने की अनुमति है जहां किसी प्रकार का उत्पादन या खोज लाइसेंस नहीं दिया गया है.

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