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Home बिहार चुनाव बिहार में पहली बार 1957 में चुनी गई थी दलित महिला विधायक, जानिए कैसे बढ़ी महिलाओं की हिस्सेदारी

बिहार में पहली बार 1957 में चुनी गई थी दलित महिला विधायक, जानिए कैसे बढ़ी महिलाओं की हिस्सेदारी

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बिहार में पहली बार 1957 में चुनी गई थी दलित महिला विधायक, जानिए कैसे बढ़ी महिलाओं की हिस्सेदारी
सांकेतिक फोटो

Bihar Elections 2025: बिहार विधानसभा चुनाव के इतिहास में महिलाओं की इंट्री प्रेरणादायक यात्रा रही है. स्वतंत्रता के बाद शुरुआती चुनावों में महिलाओं की भागीदारी बहुत सीमित रही थी, लेकिन धीरे-धीरे उनके प्रतिनिधित्व ने नयी ऊंचाइयों का छुआ. 1957 के बिहार विधानसभा चुनाव में पहली बार महिलाओं ने बड़ी सफलता हासिल की.

बांका से विन्ध्यवासिनी देवी कांग्रेस के टिकट पर विधायक बनीं, जो उस जिले की पहली महिला विधायक थीं. इसी दौरान सहरसा से कांग्रेस के टिकट पर विशेश्वरी देवी जीतीं. महिलाएं तब साधारण सामाजिक जीवन जीते हुए भी अपने क्षेत्र के लिए जिम्मेदारी निभाने आगे आयीं.

1962 और इसके बाद के वर्षों में महज चंद महिलाएं ही विधायक बन सकीं. पुरुष वर्चस्व और सामाजिक रूढ़ियों के कारण उनका संघर्ष जारी रहा. 1972 में आश्चर्यजनक रूप से 318 सीटों पर चुनाव लड़ा गया लेकिन एक भी महिला उम्मीदवार जीत नहीं सकीं. यह बिहार विधानसभा के इतिहास का सबसे कम महिला प्रतिनिधित्व वाला चुनाव रहा.

पहली दलित महिला विधायक

दलित महिला नेतृत्व की बात करें, तो 1957 के चुनाव में मसौढ़ी से सरस्वती चौधरी, सिंधिया से श्यामा कुमारी और देवघर से शैलवाला जैसे नाम पहली दलित महिला विधायकों के रूप में दर्ज हैं. इन नेताओं ने सामाजिक बाधाओं को तोड़ा और सभी चुनौतियों के बावजूद विधानसभा तक का सफर पूरा किया. इसके बाद भी लंबे समय तक दलित महिलाओं की संख्या बेहद कम रही, लेकिन समय के साथ इनकी भूमिका में बदलाव आया.

2020 के चुनाव में दलित महिला नेताओं ने अभूतपूर्व प्रदर्शन किया. नरकटियागंज से भागीरथी देवी, त्रिवेणीगंज से वीणा भारती, कोंढ़ा से कविता देवी, बाराचट्टी से ज्योति देवी, मोहनिया से संगीता कुमारी आदि जीत कर विधानसभा पहुंची. इनमें भागीरथी देवी की कहानी खास रही. 800 रुपये मासिक वेतन पर सफाई कर्मचारी से पांच बार विधायक और पद्मश्री सम्मान तक का उनका सफर ऐतिहासिक रहा.

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धीरे-धीरे बढ़ता गया वोट शेयर

पिछले दो दशकों में महिला वोटर्स ने हर चुनाव में पुरुषों को पछाड़ दिया है. उनका वोट प्रतिशत लगातार बढ़ा है. 2010, 2015, और 2020 के चुनावों में महिलाओं का वोट शेयर पुरुषों से ज्यादा रहा. इससे स्पष्ट है कि महिलाएं अब बिहार की चुनावी राजनीति का निर्णायक चेहरा बन चुकी हैं.

बिहार विधानसभा में महिलाओं की शुरुआत सीमित थी, लेकिन आज उनका प्रतिनिधित्व, खासतौर पर दलित महिलाओं का, बदलाव और प्रेरणा की मिसाल बन चुका है. शुरुआती जीतों से लेकर आज तक का सफर, महिलाओं ने विभिन्न चुनौतियों को पार करते हुए अपनी जगह मजबूत की है. यह कहानी बिहार के लोकतांत्रिक और सामाजिक विकास में महिलाओं की बढ़ती भूमिका का उज्ज्वल प्रतीक है.

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परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.
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