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कुछ बाइक्स में 2 साइलेंसर क्यों होते हैं? जानिए इसके पीछे की असली वजह

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कुछ बाइक्स में 2 साइलेंसर क्यों होते हैं? जानिए इसके पीछे की असली वजह
दो साइलेंसर वाली बाइक (Pic: GoMechanic)

सड़क पर सफर करते समय या सोशल मीडिया पर आपने कई बार देखा होगा कि कुछ बाइक्स में दो साइलेंसर लगे होते हैं. अक्सर लोग समझते हैं कि ऐसा डिजाइन सिर्फ महंगी या हाई-एंड बाइक्स में ही मिलता है, लेकिन असलियत थोड़ी अलग है. दरअसल, बाइक में एक से ज्यादा साइलेंसर लगाने के पीछे कई तकनीकी और इंजीनियरिंग कारण होते हैं. समय के साथ बाइक्स का डिजाइन काफी बदल गया है, और दो साइलेंसर वाला सेटअप भी उसी बदलाव का हिस्सा है.

साइलेंसर का क्या काम होता है?

बाइक्स में लगा साइलेंसर (जिसे मफलर भी कहा जाता है) उसके एग्जॉस्ट सिस्टम का एक अहम हिस्सा होता है. इसका सबसे बड़ा काम इंजन से निकलने वाली तेज आवाज को कम करना होता है. जब इंजन में फ्यूल जलता है, तो उससे गैसें बनती हैं जो एग्जॉस्ट के जरिए बाहर निकलती हैं. अगर बाइक में साइलेंसर न हो, तो इसकी आवाज इतनी तेज और चुभने वाली होगी कि आसपास खड़े लोगों के लिए इसे सहना मुश्किल हो जाएगा.

असल में साइलेंसर के अंदर कई तरह के चैंबर, ट्यूब और छोटे-छोटे छेद वाली प्लेट्स लगी होती हैं. जब एग्जॉस्ट गैस इनसे होकर गुजरती है, तो उनकी स्पीड कम हो जाती है और आवाज की इंटेंसिटी भी काफी घट जाती है. यही वजह है कि बाइक की आवाज कंट्रोल में रहती है. इसके साथ ही साइलेंसर एग्जॉस्ट गैसों को सही तरीके से बाहर निकालने में मदद करता है. इससे इंजन की परफॉर्मेंस बेहतर रहती है और प्रदूषण को कंट्रोल करने में भी मदद मिलती है.

कुछ बाइक्स में दो साइलेंसर क्यों दिए जाते हैं? 

साइलेंसर का सीधा संबंध इंजन के डिजाइन से होता है. दरअसल, कई हाई-परफॉर्मेंस और बड़ी इंजन वाली बाइक्स में ट्विन-सिलेंडर इंजन होता है. ऐसे इंजन में दो सिलेंडर अलग-अलग एग्जॉस्ट गैस बनाते हैं. इसलिए कई बार कंपनियां इन गैसों को एक पाइप में मिलाने के बजाय दो अलग-अलग एग्जॉस्ट पाइप और दो साइलेंसर देती हैं.

इसके अलावा डिजाइन और बैलेंस भी एक बड़ा कारण हैं. जब बाइक के दोनों तरफ एक-एक साइलेंसर होता है, तो वजन का बैलेंस बेहतर रहता है और बाइक का लुक भी हटकर नजर आता है. यही वजह है कि कई स्पोर्ट्स और टूरिंग बाइक्स में कंपनियां दो साइलेंसर वाला डिजाइन देती हैं.

दो साइलेंसर होने के क्या फायदे हैं?

इस सेटअप का फायदा यह होता है कि एग्जॉस्ट गैसें ज्यादा स्मूद तरीके से बाहर निकलती हैं. इससे इंजन की ब्रीदिंग बेहतर होती है. यानी इंजन ज्यादा बढ़िया तरीके से काम करता है और परफॉर्मेंस भी बेहतर मिलती है. साथ ही एग्जॉस्ट सिस्टम में हीट जमा होने की समस्या भी कम हो जाती है. इससे इंजन का संतुलन बनाए रखने में मदद मिलती है.

यह भी पढ़ें: कुछ बाइक्स के ब्रेक के पास दिखने वाला छोटा बॉक्स क्या होता है? जानिए इसका असली काम

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अंकित आनंद, डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में एक उभरते हुए कंटेंट राइटर हैं. वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में जूनियर कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. उन्हें पत्रकारिता में 2 साल से अधिक का अनुभव है और इस दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर अपनी मजबूत पकड़ बनाई है. अंकित मुख्य रूप से स्मार्टफोन लॉन्च, टेलीकॉम अपडेट्स, टिप्स एंड ट्रिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी खबरें, गैजेट्स रिव्यू और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे विषयों पर काम करते हैं. इसके साथ ही वह ऑटोमोबाइल सेक्टर से जुड़ी जरूरी और ट्रेंडिंग खबरों को भी कवर करते हैं. वह कार और बाइक से जुड़ी हर खबर को सिर्फ एक एंगल से नहीं, बल्कि टेक्निकल, यूजर एक्सपीरियंस और मार्केट ट्रेंड्स जैसे हर पहलू से समझकर पेश करते हैं. उनकी लेखन शैली सरल, स्पष्ट और यूजर्स-फर्स्ट अप्रोच पर बेस्ड है, जिसमें Gen Z की पसंद और उनकी डिजिटल समझ को भी ध्यान में रखा जाता है. बिहार में जन्मे अंकित आनंद की शुरुआती शिक्षा सीबीएसई स्कूल से हुई है. इसके बाद 2024 में गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी (GGSIPU) के कस्तूरी राम कॉलेज ऑफ हायर एजुकेशन से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन डिग्री हासिल की. अपनी पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने मीडिया और डिजिटल स्टोरीटेलिंग की बारीकियों को समझा और धीरे-धीरे टेक और ऑटो जर्नलिज्म की ओर अपना फोकस बढ़ाया. शिक्षा पूरी करने के बाद अंकित ने Zee News में करीब 1 साल तक काम किया, जहां उन्होंने टीवी न्यूज प्रोडक्शन, आउटपुट डेस्क वर्क, कंटेंट रिसर्च और न्यूज राइटिंग की बारीकियों को करीब से समझा. इस अनुभव ने उन्हें तेजी से बदलते न्यूज रूम माहौल में काम करने की क्षमता और खबरों को सरल तरीके से प्रस्तुत करने की कला सिखाई. अंकित का मानना है कि टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें सिर्फ जानकारी नहीं देतीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की लाइफस्टाइल और फैसलों को भी असर डालती हैं. इसी सोच के साथ वह SEO-ऑप्टिमाइज्ड, रिसर्च-बेस्ड और सरल भाषा में कंटेंट तैयार करते हैं, ताकि पाठकों को सही और उपयोगी जानकारी आसानी से मिल सके.
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