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Home Automobile कारों में बंपर गार्ड लगवाना क्यों हैं बैन? जानिए भारत में क्या है नियम और कितना लगता है जुर्माना

कारों में बंपर गार्ड लगवाना क्यों हैं बैन? जानिए भारत में क्या है नियम और कितना लगता है जुर्माना

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कारों में बंपर गार्ड लगवाना क्यों हैं बैन? जानिए भारत में क्या है नियम और कितना लगता है जुर्माना
गाड़ी पर लगा बंपर गार्ड (Photo: AI Generated)

भारत में कई कार मालिक अपनी गाड़ी को ज्यादा मजबूत और स्टाइलिश दिखाने के लिए अलग-अलग एक्सेसरीज लगवाना पसंद करते हैं. ऐसी ही एक एक्सेसरी है बंपर गार्ड. इसे आमतौर पर बुल बार या क्रैश गार्ड कहा जाता है. ये धातु की मोटी रॉड्स गाड़ी के आगे या पीछे वाले बंपर पर लगाई जाती हैं. ये अक्सर SUVs या बड़ी कारों पर नजर आती है. लेकिन बहुत से लोगों को यह नहीं पता कि भारत में पैसेंजर गाड़ियों पर बंपर गार्ड लगाना गैरकानूनी है.

दरअसल, 2017 में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए बंपर गार्ड पर रोक लगा दिया था. यह नियम सभी पैसेंजर गाड़ियों पर लागू होता है. चाहे वह कार हो, SUV हो या कोई भी पर्सनल गाड़ी, उसके साइज या कैटेगरी से फर्क नहीं पड़ता.

बंपर गार्ड आखिर बैन क्यों किए गए?

पहली नजर में तो बंपर गार्ड या बुल बार देखकर लगता है कि ये गाड़ी को एक्स्ट्रा प्रोटेक्शन देते होंगे. लेकिन सेफ्टी एक्सपर्ट्स और ट्रैफिक अधिकारियों का कहना है कि हकीकत इससे बिल्कुल उलटी है. दरअसल, आजकल की ज्यादातर एडवांस्ड कारों को क्रंपल जोन (crumple zones) नाम की तकनीक के साथ डिजाइन किया जाता है. ये कार के ऐसे हिस्से होते हैं जो टक्कर लगने पर झटके की ताकत को अपने अंदर समेट लेते हैं, ताकि गाड़ी के अंदर बैठे लोगों पर असर कम से कम पड़े.

लेकिन जब गाड़ी के आगे भारी-भरकम मेटल का बंपर गार्ड लगा दिया जाता है, तो यही क्रंपल जोन ठीक से काम नहीं कर पाते. नतीजा यह होता है कि एक्सीडेंट के समय टक्कर की पूरी ताकत सीधे गाड़ी के फ्रेम और उसमें बैठे यात्रियों तक पहुंच जाती है. इसलिए बंपर गार्ड को जोखिम भरा मानते हुए बैन कर दिया गया.

बंपर गार्ड की वजह से एयरबैग सेंसर ठीक से नहीं करते काम

एयरबैग सेंसर से जुड़ी एक और बड़ी समस्या भी सामने आती है. दरअसल, कार में लगे ये सेंसर टक्कर की ताकत को पहचानते हैं और उसी के बेस्ड पर तुरंत एयरबैग खोल देते हैं, ताकि अंदर बैठे लोगों की सेफ्टी हो सके. लेकिन जब गाड़ी के आगे बंपर गार्ड लगा होता है, तो कई बार ये सेंसर ठीक से टक्कर को महसूस नहीं कर पाते. ऐसे में एयरबैग समय पर खुल नहीं पाते, और कुछ मामलों में तो वे खुलते ही नहीं हैं.

पैदल चलने वालों के लिए भी सेफ नहीं बंपर गार्ड 

अगर किसी गाड़ी में मेटल के बंपर गार्ड लगे हों, तो उससे पैदल चलने वालों के लिए भी बड़ा खतरा पैदा हो जाता है. आमतौर पर गाड़ियों में जो प्लास्टिक बंपर होते हैं, वे टक्कर लगने पर कुछ हद तक झटका सोख लेते हैं. लेकिन मेटल के बंपर गार्ड काफी सख्त और कठोर होते हैं. ऐसे में अगर किसी एक्सीडेंट की स्थिति बनती है, तो पैदल यात्रियों या साइकिल सवारों को कहीं ज्यादा गंभीर चोट लग सकती है.

नियम तोड़ने पर क्या होगी कार्रवाई और जुर्माना?

मोटर व्हीकल्स एक्ट, 1988 के तहत बंपर गार्ड लगाना नियमों का उल्लंघन माना जाता है. इस पर धारा 190 और 191 के तहत कार्रवाई हो सकती है. अगर कोई ड्राइवर या गाड़ी मालिक बंपर गार्ड के साथ पकड़ा जाता है, तो उसे 1,000 से 5,000 रुपये तक का जुर्माना भरना पड़ सकता है. इतना ही नहीं, ट्रैफिक पुलिस के पास यह अधिकार भी होता है कि अगर किसी गाड़ी में बंपर गार्ड लगा हुआ मिले, तो उसे मौके पर ही हटवा दिया जाए.

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अंकित आनंद, डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में एक उभरते हुए कंटेंट राइटर हैं. वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में जूनियर कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. उन्हें पत्रकारिता में 2 साल से अधिक का अनुभव है और इस दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर अपनी मजबूत पकड़ बनाई है. अंकित मुख्य रूप से स्मार्टफोन लॉन्च, टेलीकॉम अपडेट्स, टिप्स एंड ट्रिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी खबरें, गैजेट्स रिव्यू और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे विषयों पर काम करते हैं. इसके साथ ही वह ऑटोमोबाइल सेक्टर से जुड़ी जरूरी और ट्रेंडिंग खबरों को भी कवर करते हैं. वह कार और बाइक से जुड़ी हर खबर को सिर्फ एक एंगल से नहीं, बल्कि टेक्निकल, यूजर एक्सपीरियंस और मार्केट ट्रेंड्स जैसे हर पहलू से समझकर पेश करते हैं. उनकी लेखन शैली सरल, स्पष्ट और यूजर्स-फर्स्ट अप्रोच पर बेस्ड है, जिसमें Gen Z की पसंद और उनकी डिजिटल समझ को भी ध्यान में रखा जाता है. बिहार में जन्मे अंकित आनंद की शुरुआती शिक्षा सीबीएसई स्कूल से हुई है. इसके बाद 2024 में गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी (GGSIPU) के कस्तूरी राम कॉलेज ऑफ हायर एजुकेशन से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन डिग्री हासिल की. अपनी पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने मीडिया और डिजिटल स्टोरीटेलिंग की बारीकियों को समझा और धीरे-धीरे टेक और ऑटो जर्नलिज्म की ओर अपना फोकस बढ़ाया. शिक्षा पूरी करने के बाद अंकित ने Zee News में करीब 1 साल तक काम किया, जहां उन्होंने टीवी न्यूज प्रोडक्शन, आउटपुट डेस्क वर्क, कंटेंट रिसर्च और न्यूज राइटिंग की बारीकियों को करीब से समझा. इस अनुभव ने उन्हें तेजी से बदलते न्यूज रूम माहौल में काम करने की क्षमता और खबरों को सरल तरीके से प्रस्तुत करने की कला सिखाई. अंकित का मानना है कि टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें सिर्फ जानकारी नहीं देतीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की लाइफस्टाइल और फैसलों को भी असर डालती हैं. इसी सोच के साथ वह SEO-ऑप्टिमाइज्ड, रिसर्च-बेस्ड और सरल भाषा में कंटेंट तैयार करते हैं, ताकि पाठकों को सही और उपयोगी जानकारी आसानी से मिल सके.
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