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Home Automobile प्लेन रिटायर क्यों होते हैं? जानिए उनकी आखिरी उड़ान के बाद क्या होता है?

प्लेन रिटायर क्यों होते हैं? जानिए उनकी आखिरी उड़ान के बाद क्या होता है?

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प्लेन रिटायर क्यों होते हैं? जानिए उनकी आखिरी उड़ान के बाद क्या होता है?
रनवे पर ढेर सारी प्लेन्स (Photo: StockCake)

Aircraft Retirement: हर वो प्लेन जो आप उड़ान भरते देखते हैं, उसकी अपनी एक कहानी होती है. सर्विस की और आखिरकार जब वह रिटायर होता है, उसकी भी. Simple Flying के मुताबिक, 2024 में एयरबस और बोइंग जैसे दिग्गजों ने हजारों नए प्लेन डिलीवर किए हैं. लेकिन इनमें से सिर्फ आधे ही एयरलाइन की फ्लाइट में जुड़ पाए. बाकी पुराने एयरक्राफ्ट्स की जगह लेने आए थे, जो अब अपने सफर के अंत तक पहुंच चुके थे. तो सवाल ये है कि प्लेन आखिर रिटायर क्यों होते हैं? और रिटायर होने के बाद उनके साथ क्या होता है?

प्लेन रिटायर क्यों होते हैं?

जब आप सोचते हैं कि विमान क्यों रिटायर होते हैं, तो पहला ख्याल यही आता है कि ‘अरे, ये तो बहुत पुराने हो गए!’ लेकिन सच सिर्फ इतना ही नहीं है. ज्यादातर पैसेंजर प्लेनकरीब 25-30 साल उड़ान भरते हैं, और कार्गो प्लेन 30-40 साल तक आसमान में रहते हैं. लेकिन एयरलाइंस सिर्फ उम्र पर ही ध्यान नहीं देती. उनका सवाल होता है कि क्या ये विमान अभी भी उड़ने लायक है? अगर जवाब ‘नहीं’ है, तो समझ जाइए, बस अब इसे रिटायर करने का टाइम आ गया है.

प्लेन रिटायर होने के कारण

उड़ान चलाना महंगा है- फ्यूल, क्रू, मेंटेनेंस और एयरपोर्ट फीस जैसी चीजें मिलकर भारी खर्च बनाती हैं. अगर खर्च आमदनी से ज्यादा हो जाए, तो प्लेन को उड़ाना बस मतलबहीन हो जाता है.

उम्र के साथ रखरखाव बढ़ता है- जैसे-जैसे प्लेनपुराना होता है, उसे बार-बार और गहराई से चेक करना पड़ता है. बार-बार टेकऑफ, लैंडिंग और केबिन प्रेशर से धातु पर स्ट्रेस पड़ता है. इन चीजों को ठीक करने का खर्च कभी-कभी प्लेन की कीमत से भी ज्यादा हो जाता है.

नए मॉडल सस्ते और किफायती- Boeing 787 Dreamliner या Airbus A350 जैसे मॉडर्न प्लेन कम फ्यूल खर्च करते हैं और ऑपरेट करना सस्ता है.

पैसेंजर्स की अपेक्षाएं बदल गई हैं- आज के ट्रैवेलर्स शांत केबिन, आरामदायक सीटें, ज्यादा लेगरूम और एडवांस्ड एंटरटेनमेंट सिस्टम चाहते हैं. पुराने प्लेन अक्सर इन मानकों को पूरा नहीं कर पाते.

फ्लीट मॉडर्नाइजेशन- एयरलाइंस लगातार अपने फ्लीट्स को अपडेट करती रहती हैं. इसलिए, भले ही प्लेन अभी भी उड़ रहा हो, नए और बेहतर मॉडल आने पर उसे बदल दिया जाता है.

जब कोई प्लेन रिटायर होता है, तो क्या होता है?

अक्सर हम सोचते हैं कि रिटायरमेंट मतलब पूरी तरह से खत्म हो जाना है, लेकिन हकीकत में ऐसा नहीं होता. जब कोई प्लेन अपनी आखिरी उड़ान भरता है, तो वह अक्सर एक स्टोरेज फैसिलिटी में जाता है, जिसे लोग मजाक में ‘बोनेयार्ड’ कहते हैं. यहां सबसे पहले प्लेन के कीमती हिस्से जैसे इंजन, लैंडिंग गियर और एवियोनिक्स निकाल लिए जाते हैं, ताकि उन्हें दूसरे प्लेन्स में इस्तेमाल किया जा सके.

और मजेदार बात ये है कि कई प्लेन अपनी दूसरी जिंदगी जीते हैं. पैसेंजर्स की जगह अब कार्गो ले जाते हैं, या फिर छोटे एयरलाइंस को बेच दिए जाते हैं और दुनिया भर में फिर से उड़ान भरते हैं. अगर किसी प्लेन को और इस्तेमाल नहीं किया जा सकता, तो उसे धीरे-धीरे डिस्मैंटल किया जाता है. अच्छी खबर ये है कि इसका 90% हिस्सा रिसाइकिल किया जा सकता है, खासकर एल्यूमिनियम और टाइटेनियम जैसे धातुएं.

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अंकित आनंद, डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में एक उभरते हुए कंटेंट राइटर हैं. वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में जूनियर कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. उन्हें पत्रकारिता में 2 साल से अधिक का अनुभव है और इस दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर अपनी मजबूत पकड़ बनाई है. अंकित मुख्य रूप से स्मार्टफोन लॉन्च, टेलीकॉम अपडेट्स, टिप्स एंड ट्रिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी खबरें, गैजेट्स रिव्यू और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे विषयों पर काम करते हैं. इसके साथ ही वह ऑटोमोबाइल सेक्टर से जुड़ी जरूरी और ट्रेंडिंग खबरों को भी कवर करते हैं. वह कार और बाइक से जुड़ी हर खबर को सिर्फ एक एंगल से नहीं, बल्कि टेक्निकल, यूजर एक्सपीरियंस और मार्केट ट्रेंड्स जैसे हर पहलू से समझकर पेश करते हैं. उनकी लेखन शैली सरल, स्पष्ट और यूजर्स-फर्स्ट अप्रोच पर बेस्ड है, जिसमें Gen Z की पसंद और उनकी डिजिटल समझ को भी ध्यान में रखा जाता है. बिहार में जन्मे अंकित आनंद की शुरुआती शिक्षा सीबीएसई स्कूल से हुई है. इसके बाद 2024 में गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी (GGSIPU) के कस्तूरी राम कॉलेज ऑफ हायर एजुकेशन से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन डिग्री हासिल की. अपनी पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने मीडिया और डिजिटल स्टोरीटेलिंग की बारीकियों को समझा और धीरे-धीरे टेक और ऑटो जर्नलिज्म की ओर अपना फोकस बढ़ाया. शिक्षा पूरी करने के बाद अंकित ने Zee News में करीब 1 साल तक काम किया, जहां उन्होंने टीवी न्यूज प्रोडक्शन, आउटपुट डेस्क वर्क, कंटेंट रिसर्च और न्यूज राइटिंग की बारीकियों को करीब से समझा. इस अनुभव ने उन्हें तेजी से बदलते न्यूज रूम माहौल में काम करने की क्षमता और खबरों को सरल तरीके से प्रस्तुत करने की कला सिखाई. अंकित का मानना है कि टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें सिर्फ जानकारी नहीं देतीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की लाइफस्टाइल और फैसलों को भी असर डालती हैं. इसी सोच के साथ वह SEO-ऑप्टिमाइज्ड, रिसर्च-बेस्ड और सरल भाषा में कंटेंट तैयार करते हैं, ताकि पाठकों को सही और उपयोगी जानकारी आसानी से मिल सके.
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