पुरानी बाइक या स्कूटर बेचते समय ज्यादातर लोग यह मान लेते हैं कि पैसे लेकर चाबी सौंप देने के बाद उनकी जिम्मेदारी खत्म हो जाती है. लेकिन ऐसा करना भविष्य में बड़ी कानूनी परेशानी की वजह बन सकता है. मध्य प्रदेश का एक मामला इसी बात की बड़ी मिसाल बनकर सामने आया है, जहां महज ₹2,000 में बेची गई पुरानी बाइक ने उसके पूर्व मालिक को लाखों रुपये के नुकसान और कानूनी झंझट में डाल दिया.
कैसे शुरू हुई पूरी कहानी?
मध्य प्रदेश के राकेश पाटीदार ने सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म एक्स पर एक घटना साझा की. उनके अनुसार, उनके मामा के पास करीब 20 साल पुरानी एक बाइक थी, जिसका रजिस्ट्रेशन भी समाप्त हो चुका था. लंबे समय से बेकार खड़ी इस बाइक को उन्होंने एक कबाड़ी को ₹2,000 में बेच दिया.
लेन-देन के दौरान केवल एक साधारण सेल लेटर बनाया गया, लेकिन वाहन का स्वामित्व बदलवाने या आरटीओ में रजिस्ट्रेशन ट्रांसफर कराने जैसी जरूरी कानूनी प्रक्रिया पूरी नहीं की गई. यही लापरवाही बाद में बड़ी मुसीबत बन गई.
हादसे के बाद पुराने मालिक पर आई मुसीबत
बताया जाता है कि कबाड़ी ने बाइक को ठीक कराया और उसका इस्तेमाल शुरू कर दिया. कुछ समय बाद इसी बाइक से एक सड़क हादसा हो गया. दुर्घटना के बाद चालक मौके से फरार हो गया.
जांच के दौरान पुलिस ने इंजन और चेसिस नंबर के आधार पर वाहन का रिकॉर्ड निकाला. आरटीओ के रिकॉर्ड में बाइक अब भी पुराने मालिक यानी राकेश के मामा के नाम दर्ज थी. ऐसे में जांच की कार्रवाई उनके खिलाफ भी शुरू हुई. बाद में कोर्ट ने मामले की परिस्थितियों को देखते हुए उन पर करीब ₹2 लाख का जुर्माना लगाया.
केवल बाइक बेच देना काफी नहीं, आरटीओ की प्रक्रिया भी जरूरी
ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों का कहना है कि वाहन बेचने के बाद भी उसकी कानूनी जिम्मेदारी तब तक पुराने मालिक पर बनी रहती है, जब तक आरटीओ रिकॉर्ड में स्वामित्व परिवर्तन दर्ज नहीं हो जाता.
अगर नया खरीदार उस वाहन का इस्तेमाल किसी दुर्घटना, अपराध या अन्य गैरकानूनी गतिविधि में करता है और रिकॉर्ड अपडेट नहीं हुआ है, तो शुरुआती जांच में जिम्मेदारी पुराने मालिक तक पहुंच सकती है. इसलिए केवल सेल लेटर बनाना पर्याप्त नहीं माना जाता.
पुरानी गाड़ी स्क्रैप करने का सही तरीका
यदि वाहन अब इस्तेमाल लायक नहीं है और उसे स्क्रैप करना चाहते हैं, तो सरकार द्वारा अधिकृत Registered Vehicle Scrapping Facility (RVSF) पर ही जमा करना चाहिए. वहां वाहन जमा करने के बाद Certificate of Deposit जारी किया जाता है. इसके बाद आरटीओ में आवश्यक आवेदन और मूल आरसी जमा कर रजिस्ट्रेशन रद्द कराना जरूरी होता है.
यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही वाहन मालिक कानूनी रूप से उस गाड़ी की जिम्मेदारी से मुक्त माना जाता है.
वाहन बेचने से पहले इन बातों का रखें खास ध्यान
पुरानी बाइक या कार बेचते समय केवल पैसे लेना ही पर्याप्त नहीं है. स्वामित्व परिवर्तन, आरटीओ रिकॉर्ड अपडेट और सभी जरूरी दस्तावेजों की प्रक्रिया पूरी करना बेहद जरूरी है. कुछ घंटों की यह सावधानी भविष्य में लाखों रुपये के नुकसान और कानूनी परेशानियों से बचा सकती है. खासकर ग्रामीण और छोटे शहरों में जहां लोग अक्सर बिना कागजी कार्रवाई के वाहन बेच देते हैं, वहां इस तरह की घटनाओं से सबक लेना बेहद जरूरी है.
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