[tdb_header_weather inline="yes" temp_color="#000000" loc_color="#000000" api="653566bd56b7ecfee45d74c0fc937fc1" float_right="yes" align_horiz="content-horiz-center" icon_size="24" icon_space="10" f_temp_font_family="420" f_temp_font_size="14" f_temp_font_weight="500" f_unit_font_size="14" f_loc_font_size="14" f_unit_font_family="882" location="Ranchi" icon_color="#000000"]
[tdb_header_categories align_horiz="content-horiz-left" el_align_horiz="content-horiz-left" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLXJpZ2h0IjoiNSIsImhlaWdodCI6IjQwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9fQ==" icon_size="18" limit="18" elem_text_color="#2d2800" f_elem_font_family="420" f_elem_font_size="16px" f_elem_font_weight="500" tdicon="tdc-font-fa tdc-font-fa-navicon-reorder-bars" inline="yes" shadow_shadow_size="0" shadow_shadow_offset_vertical="0" shadow_shadow_spread="0" bg_color="#f9f9f9" include="1028, 1081, 1446, 1228, 3706, 2624,1071"][tdb_mobile_horiz_menu inline="yes" menu_id="372" tdc_css="eyJwaG9uZSI6eyJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBob25lX21heF93aWR0aCI6NzY3LCJhbGwiOnsiYm9yZGVyLXN0eWxlIjoibm9uZSIsImRpc3BsYXkiOiIifX0=" f_elem_font_size="18px" f_elem_font_weight="eyJhbGwiOiI3MDAiLCJwaG9uZSI6IiJ9" f_elem_font_family="420" text_color_h="#f58220" main_sub_icon_size="13"]
Home Automobile ‘महिंद्रा ऐंड मोहम्मद’ से शुरू होकर ‘महिंद्रा ऐंड महिंद्रा’ कैसे बनी भारत की सबसे बड़ी ऑटो कंपनी? जानिए पूरी कहानी

‘महिंद्रा ऐंड मोहम्मद’ से शुरू होकर ‘महिंद्रा ऐंड महिंद्रा’ कैसे बनी भारत की सबसे बड़ी ऑटो कंपनी? जानिए पूरी कहानी

0
‘महिंद्रा ऐंड मोहम्मद’ से शुरू होकर ‘महिंद्रा ऐंड महिंद्रा’ कैसे बनी भारत की सबसे बड़ी ऑटो कंपनी? जानिए पूरी कहानी
Partition ने कैसे बदल दिया Mahindra कंपनी का नाम / एआई से बनी सिम्बॉलिक इमेज

आज महिंद्रा एंड महिंद्रा भारत की सबसे बड़ी ऑटोमोबाइल और ट्रैक्टर कंपनियों में गिनी जाती है. एसयूवी से लेकर इलेक्ट्रिक व्हीकल और फार्म मशीनरी तक, कंपनी का कारोबार दुनिया के कई देशों में फैला हुआ है. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इस मशहूर कंपनी का नाम शुरुआत में महिंद्रा एंड महिंद्रा नहीं था. देश के विभाजन ने न सिर्फ लाखों लोगों की जिंदगी बदल दी, बल्कि भारत की इस दिग्गज कंपनी की पहचान भी हमेशा के लिए बदल गई. महिंद्रा की शुरुआत की यह कहानी इतिहास, दोस्ती और मुश्किल हालात में लिए गए फैसलों का अनोखा उदाहरण है.

जब Mahindra & Mohammed के नाम से हुई थी शुरुआत

महिंद्रा कंपनी की नींव 2 अक्टूबर 1945 को पंजाब के लुधियाना में रखी गई थी. उस समय कंपनी का नाम Mahindra & Mohammed था. इसकी स्थापना कैलाश चंद्र महिंद्रा, जगदीश चंद्र महिंद्रा और उनके करीबी सहयोगी गुलाम मोहम्मद ने मिलकर की थी. शुरुआत में यह कंपनी स्टील ट्रेडिंग का कारोबार करती थी और तीनों संस्थापकों ने साझेदारी की भावना को दर्शाने के लिए कंपनी के नाम में अपनी पहचान शामिल की थी.

उस दौर में किसी ने भी नहीं सोचा था कि यह छोटी सी ट्रेडिंग कंपनी आने वाले दशकों में भारत की सबसे बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनियों में शामिल हो जाएगी.

देश का बंटवारा और बदल गया कंपनी का नाम

साल 1947 में भारत के विभाजन के बाद हालात पूरी तरह बदल गए. गुलाम मोहम्मद पाकिस्तान चले गए, जहां उन्होंने बाद में पाकिस्तान के पहले वित्त मंत्री और फिर गवर्नर जनरल जैसी अहम जिम्मेदारियां संभालीं. दूसरी ओर महिंद्रा बंधुओं ने भारत में रहकर कंपनी को आगे बढ़ाने का फैसला किया.

गुलाम मोहम्मद के अलग होने के बाद कंपनी के नाम को लेकर सवाल खड़ा हुआ. हालांकि तब तक कंपनी के दस्तावेजों, लेटरहेड और रिकॉर्ड में M&M की पहचान बन चुकी थी. ऐसे में नई शुरुआत करने के बजाय महिंद्रा बंधुओं ने सिर्फ कंपनी का पूरा नाम बदलने का फैसला किया. इसी तरह Mahindra & Mohammed से कंपनी Mahindra & Mahindra बन गई, जबकि M&M की पहचान पहले जैसी ही बनी रही.

स्टील कारोबार से ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री तक का सफर

नाम बदलने के बाद कंपनी ने सिर्फ कारोबार ही नहीं बढ़ाया, बल्कि नई इंडस्ट्री में भी कदम रखा. आजादी के तुरंत बाद महिंद्रा ने विलीज जीप की असेंबली शुरू की और यहीं से कंपनी का ऑटोमोबाइल सफर शुरू हुआ. 1949 में विलीज की जीपें सीकेडी किट के रूप में भारत पहुंचीं और मुंबई में उनकी असेंबली की गई.

इसके बाद कंपनी ने पीछे मुड़कर नहीं देखा. 1955 में महिंद्रा एंड महिंद्रा शेयर बाजार में सूचीबद्ध हुई और अगले कुछ वर्षों में ट्रैक्टर कारोबार में भी प्रवेश किया. कृषि क्षेत्र में बढ़ती जरूरतों को देखते हुए कंपनी ने इंटरनेशनल हार्वेस्टर के साथ साझेदारी कर भारतीय किसानों के लिए नए विकल्प पेश किए.

कैसे बनी भारत की सबसे भरोसेमंद ऑटो कंपनियों में से एक

1960 के दशक से महिंद्रा ने लगातार अपने कारोबार का विस्तार किया. कंपनी ने मित्सुबिशी और प्यूजो जैसी वैश्विक कंपनियों के साथ साझेदारी की और ऑटोमोबाइल के अलावा कई नए क्षेत्रों में भी कदम रखा. समय के साथ महिंद्रा की जीप और ट्रैक्टर ग्रामीण भारत की पहचान बन गए.

आज कंपनी एसयूवी, इलेक्ट्रिक व्हीकल, कमर्शियल व्हीकल, ट्रैक्टर, आईटी, एयरोस्पेस, फाइनेंस और हॉस्पिटैलिटी समेत कई सेक्टर में सक्रिय है. XUV 3XO, Scorpio-N, Thar, BE सीरीज और XEV जैसे आधुनिक मॉडल महिंद्रा की नई पहचान बन चुके हैं.

इतिहास में दर्ज है Mahindra की यह अनोखी कहानी

महिंद्रा एंड महिंद्रा की कहानी सिर्फ एक कंपनी के विकास की कहानी नहीं है. यह उस दौर की भी कहानी है, जब देश का विभाजन लाखों लोगों की जिंदगी बदल रहा था. मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद महिंद्रा बंधुओं ने कंपनी को नई पहचान दी और उसे देश की सबसे सफल कंपनियों में शामिल कर दिया. यही वजह है कि आज भी Mahindra & Mahindra का इतिहास भारतीय उद्योग जगत के सबसे दिलचस्प अध्यायों में गिना जाता है.

यह भी पढ़ें: Mahindra ने जून में रचा नया रिकॉर्ड, SUV से लेकर ट्रैक्टर तक हर सेगमेंट में जबरदस्त उछाल

Previous article आदिवासी युवाओं को मिलेगा स्टार्टअप फाउंडर बनने का मौका, JUT ने शुरू किया Idea Tribe-2026
Next article बंगाल में भाजपा कर रही सत्ता का दुरुपयोग, अखिलेश यादव का लोकसभा अध्यक्ष से हस्तक्षेप की मांग
Avatar Of Rajeev Kumar
राजीव कुमार हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारिता अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. सरल भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी पहचान है. राजीव की विशेषज्ञता स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग तथा डिजिटल ट्रेंड्स जैसे विषयों में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, आधिकारिक डेटा, कंपनी अपडेट्स तथा एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाते हैं. डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. गूगल डिस्कवर और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारीपूर्ण होते हैं, बल्कि पाठकों की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, तुलना आधारित लेख और एक्सप्लेनर स्टोरीज को पाठकों द्वारा काफी पसंद किया जाता है. राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन और फीचर लेखन जैसे विभिन्न बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई. जमशेदपुर में जन्मे राजीव ने प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से बॉटनी ऑनर्स और भारतीय विद्या भवन, पुणे से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उन्हें आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में मदद करती है. राजीव की सबसे बड़ी पहचान है, क्रेडिब्लिटी, क्लैरिटी और ऑडियंस-फर्स्ट अप्रोच. वे सिर्फ टेक ऐंड ऑटो को कवर नहीं करते, बल्कि उसे ऐसे पेश करते हैं कि हर व्यक्ति उसे समझ सके, उससे जुड़ सके और उससे फायदा उठा सके. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर
ऐप पर पढें
होम आप का शहर
News Snap News Reel