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Home Automobile Ladder Frame vs Monocoque: कार की बॉडी का यह फर्क तय करता है पावर, माइलेज और कम्फर्ट

Ladder Frame vs Monocoque: कार की बॉडी का यह फर्क तय करता है पावर, माइलेज और कम्फर्ट

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Ladder Frame vs Monocoque: कार की बॉडी का यह फर्क तय करता है पावर, माइलेज और कम्फर्ट
ladder frame vs monocoque

जब भी आप नयी कार या SUV खरीदने जाते हैं, तो अक्सर फीचर्स, इंजन और माइलेज पर ध्यान देते हैं. लेकिन एक अहम चीज जो आपकी ड्राइविंग एक्सपीरियंस को पूरी तरह बदल देती है, वह है गाड़ी का फ्रेम या स्ट्रक्चर. ऑटो इंडस्ट्री में मुख्य रूप से दो तरह के फ्रेम इस्तेमाल होते हैं- लैडर फ्रेम और मोनोकॉक. इन दोनों के बीच का अंतर ही तय करता है कि आपकी गाड़ी ज्यादा मजबूत होगी या ज्यादा आरामदायक.

लैडर फ्रेम: ताकत और ऑफ-रोडिंग का राजा

लैडर फ्रेम को पारंपरिक और मजबूत स्ट्रक्चर माना जाता है. इसमें गाड़ी का बॉडी और चेसिस अलग-अलग होते हैं, यानी एक मजबूत फ्रेम पर पूरी बॉडी को रखा जाता है. इस तरह का स्ट्रक्चर आमतौर पर बड़ी SUVs और पिकअप ट्रक्स में देखने को मिलता है, जैसे Toyota Fortuner. इसका सबसे बड़ा फायदा इसकी मजबूती है. खराब सड़कों, पहाड़ी रास्तों और ऑफ-रोडिंग में यह बेहतर परफॉर्म करता है. हालांकि, यह भारी होता है, जिससे माइलेज कम और राइड क्वाॅलिटी थोड़ी सख्त महसूस होती है.

मोनोकॉक फ्रेम: आराम और माइलेज का बैलेंस

मोनोकॉक फ्रेम आज के समय में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला स्ट्रक्चर है. इसमें गाड़ी की बॉडी और चेसिस एक ही यूनिट में बने होते हैं, जिससे पूरी कार हल्की और मजबूत बनती है. इस तरह का फ्रेम आपको शहर में चलने वाली कारों और कॉम्पैक्ट SUVs में देखने को मिलेगा, जैसे Hyundai Creta. इसका फायदा यह है कि गाड़ी हल्की होती है, जिससे माइलेज बेहतर मिलता है और ड्राइविंग ज्यादा स्मूद रहती है. साथ ही, हाई-स्पीड पर स्टेबिलिटी भी अच्छी मिलती है.

दोनों में क्या है बड़ा अंतर?

अगर आसान भाषा में समझें तो लैडर फ्रेम गाड़ियां ज्यादा मजबूत और रफ यूज के लिए होती हैं, जबकि मोनोकॉक गाड़ियां रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए ज्यादा आरामदायक और किफायती होती हैं. लैडर फ्रेम जहां भारी और मजबूत होता है, वहीं मोनोकॉक हल्का और बेहतर कंट्रोल देने वाला स्ट्रक्चर होता है.

कौन-सी गाड़ी आपके लिए सही?

अगर आप अक्सर खराब सड़कों पर चलते हैं, ऑफ-रोडिंग पसंद करते हैं या ज्यादा वजन ढोने वाली गाड़ी चाहते हैं, तो लैडर फ्रेम आपके लिए बेहतर रहेगा. वहीं अगर आपका इस्तेमाल शहर में ज्यादा है, आप बेहतर माइलेज और आराम चाहते हैं, तो मोनोकॉक फ्रेम वाली कार ज्यादा सही विकल्प होगी. यही वजह है कि आज भी दमदार SUVs में लैडर फ्रेम मिलता है, जबकि ज्यादातर नयी कारें और कॉम्पैक्ट SUVs मोनोकॉक स्ट्रक्चर के साथ आती हैं.

Ladder Frame SUVs (दमदार और ऑफ-रोडिंग के लिए बेस्ट)

ये गाड़ियां खासतौर पर खराब रास्तों, ऑफ-रोडिंग और भारी इस्तेमाल के लिए बनायी जाती हैं.

टॉप Ladder Frame SUVs (India)

  • Toyota Fortuner
  • Mahindra Thar
  • Mahindra Scorpio N
  • Force Gurkha
  • MG Gloster
  • Mahindra Bolero

ये सभी गाड़ियां बॉडी-ऑन-फ्रेम डिजाइन पर बनी होती हैं, जो कठिन रास्तों और भारी लोड के लिए ज्यादा मजबूत मानी जाती हैं.

Monocoque SUVs (आराम, माइलेज और सिटी ड्राइव के लिए बेस्ट)

आजकल ज्यादातर SUVs इसी फ्रेम पर बन रही हैं क्योंकि ये हल्की, सुरक्षित और ज्यादा आरामदायक होती हैं.

टॉप Monocoque SUVs (India)

  • Hyundai Creta
  • Kia Seltos
  • Tata Harrier
  • Mahindra XUV700
  • Maruti Grand Vitara
  • Honda Elevate

भारत में 90% से ज्यादा कारें अब मोनोकॉक स्ट्रक्चर पर आधारित हैं क्योंकि ये बेहतर माइलेज और हैंडलिंग देती हैं.

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राजीव कुमार हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारिता अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. सरल भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी पहचान है. राजीव की विशेषज्ञता स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग तथा डिजिटल ट्रेंड्स जैसे विषयों में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, आधिकारिक डेटा, कंपनी अपडेट्स तथा एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाते हैं. डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. गूगल डिस्कवर और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारीपूर्ण होते हैं, बल्कि पाठकों की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, तुलना आधारित लेख और एक्सप्लेनर स्टोरीज को पाठकों द्वारा काफी पसंद किया जाता है. राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन और फीचर लेखन जैसे विभिन्न बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई. जमशेदपुर में जन्मे राजीव ने प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से बॉटनी ऑनर्स और भारतीय विद्या भवन, पुणे से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उन्हें आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में मदद करती है. राजीव की सबसे बड़ी पहचान है, क्रेडिब्लिटी, क्लैरिटी और ऑडियंस-फर्स्ट अप्रोच. वे सिर्फ टेक ऐंड ऑटो को कवर नहीं करते, बल्कि उसे ऐसे पेश करते हैं कि हर व्यक्ति उसे समझ सके, उससे जुड़ सके और उससे फायदा उठा सके. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर
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