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Home Automobile न बैरियर, न लंबी लाइन… आखिर कैसे काम करता है नया बैरियर-लेस टोल सिस्टम? जानें इसके फायदे

न बैरियर, न लंबी लाइन… आखिर कैसे काम करता है नया बैरियर-लेस टोल सिस्टम? जानें इसके फायदे

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न बैरियर, न लंबी लाइन… आखिर कैसे काम करता है नया बैरियर-लेस टोल सिस्टम? जानें इसके फायदे
बैरियर-लेस टोल सिस्टम (Photo: @nitin_gadkari/X)

Barrier-Less Toll System: नितिन गडकरी ने दिल्ली में एक बड़ा बदलाव शुरू किया है. उन्होंने अर्बन एक्सटेंशन रोड-II कॉरिडोर पर दिल्ली के पहले बिना बैरियर वाले टोल प्लाजा का उद्घाटन किया है. यह नया टोल प्लाजा मुंडका-बक्करवाला इलाके में बनाया गया है. खास बात यह है कि यहां अब गाड़ियों को टोल देने के लिए रुकना नहीं पड़ेगा. गुजरात के बाद यह देश का दूसरा ऐसा बैरियर-लेस टोल सिस्टम है. ऐसे में लोगों के मन में सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर बिना बैरियर के यह टोल प्लाजा काम कैसे करता है? आइए जानते हैं.

कैसे काम करता है बैरियर-लेस टोल सिस्टम?

नई टोलिंग सेट-अप में मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) टेक्नोलॉजी का यूज किया जा रहा है. इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि अब गाड़ियों को टोल पर रुकने की जरूरत नहीं पड़ेगी. यानी पुराने टोल प्लाजा की तरह लंबी लाइन, बैरियर और इंतजार वाली झंझट खत्म हो सकती है. इस सिस्टम में सड़क के ऊपर बड़े-बड़े गैंट्री स्ट्रक्चर लगाए जाते हैं, जिनमें कैमरे और सेंसर लगे होते हैं. जैसे ही गाड़ियां इनके नीचे से गुजरता है, टोल अपने आप कट जाता है और गाड़ी बिना स्पीड कम किए आगे बढ़ती रहती है.

पूरा सिस्टम काफी स्मार्ट तरीके से काम करता है. इसमें लगे ANPR (ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन) कैमरे चलते गाड़ियों की नंबर प्लेट तुरंत पढ़ लेते हैं. साथ ही, सेंसर यह भी पहचान लेते हैं कि गाड़ी किस कैटेगरी का है. गाड़ियों के एक्सल और साइज के बेस्ड पर टोल तय करते हैं. इसके बाद उस गाड़ी के लिए एक यूनिक ट्रैकिंग आईडी बनती है और टोल चार्ज सीधे उसके FASTag अकाउंट से लिंक होकर डिजिटल तरीके से कट जाता है.

बैरियर-लेस टोल के फायदे

इस बैरियर-लेस सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत यही है कि टोल प्लाजा पर लगने वाली लंबी लाइनों से काफी राहत मिलेगी है. अब गाड़ियों को टोल देने के लिए न रुकना पड़ेगा और न ही धीमा होना पड़ेगा. इससे ट्रैफिक पहले के मुकाबले ज्यादा स्मूद चलेगा. इसका सीधा फायदा यह होगा कि सफर में समय बचेगा, जाम कम होगा और बार-बार गाड़ी रोकने-चलाने की वजह से जो बेवजह फ्यूल खर्च नहीं होगा.

इन बातों का रखें ध्यान 

नई टोल सेट-अप में सफर तो आसान है, लेकिन इसके लिए एक बात का खास ध्यान रखना होगा. यही कि आपका FASTag एक्टिव रहना चाहिए और उसमें पर्याप्त बैलेंस मौजूद होना चाहिए. अगर FASTag से टोल कटने में कोई दिक्कत आती है, तो National Highways Authority of India (NHAI) गाड़ी मालिक को ई-नोटिस भेजेगा.

अच्छी बात यह है कि अगर आप 72 घंटे के भीतर बकाया टोल चुका देते हैं, तो सिर्फ नॉर्मल टोल चार्ज ही देना होगा. लेकिन अगर इस समय सीमा के बाद पेमेंट किया गया, तो आपको जुर्माने के तौर पर दोगुना टोल देना पड़ेगा.

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अंकित आनंद, डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में एक उभरते हुए कंटेंट राइटर हैं. वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में जूनियर कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. उन्हें पत्रकारिता में 2 साल से अधिक का अनुभव है और इस दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर अपनी मजबूत पकड़ बनाई है. अंकित मुख्य रूप से स्मार्टफोन लॉन्च, टेलीकॉम अपडेट्स, टिप्स एंड ट्रिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी खबरें, गैजेट्स रिव्यू और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे विषयों पर काम करते हैं. इसके साथ ही वह ऑटोमोबाइल सेक्टर से जुड़ी जरूरी और ट्रेंडिंग खबरों को भी कवर करते हैं. वह कार और बाइक से जुड़ी हर खबर को सिर्फ एक एंगल से नहीं, बल्कि टेक्निकल, यूजर एक्सपीरियंस और मार्केट ट्रेंड्स जैसे हर पहलू से समझकर पेश करते हैं. उनकी लेखन शैली सरल, स्पष्ट और यूजर्स-फर्स्ट अप्रोच पर बेस्ड है, जिसमें Gen Z की पसंद और उनकी डिजिटल समझ को भी ध्यान में रखा जाता है. बिहार में जन्मे अंकित आनंद की शुरुआती शिक्षा सीबीएसई स्कूल से हुई है. इसके बाद 2024 में गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी (GGSIPU) के कस्तूरी राम कॉलेज ऑफ हायर एजुकेशन से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन डिग्री हासिल की. अपनी पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने मीडिया और डिजिटल स्टोरीटेलिंग की बारीकियों को समझा और धीरे-धीरे टेक और ऑटो जर्नलिज्म की ओर अपना फोकस बढ़ाया. शिक्षा पूरी करने के बाद अंकित ने Zee News में करीब 1 साल तक काम किया, जहां उन्होंने टीवी न्यूज प्रोडक्शन, आउटपुट डेस्क वर्क, कंटेंट रिसर्च और न्यूज राइटिंग की बारीकियों को करीब से समझा. इस अनुभव ने उन्हें तेजी से बदलते न्यूज रूम माहौल में काम करने की क्षमता और खबरों को सरल तरीके से प्रस्तुत करने की कला सिखाई. अंकित का मानना है कि टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें सिर्फ जानकारी नहीं देतीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की लाइफस्टाइल और फैसलों को भी असर डालती हैं. इसी सोच के साथ वह SEO-ऑप्टिमाइज्ड, रिसर्च-बेस्ड और सरल भाषा में कंटेंट तैयार करते हैं, ताकि पाठकों को सही और उपयोगी जानकारी आसानी से मिल सके.
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