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पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच EV क्यों बन रहे हैं पहली पसंद?

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पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच EV क्यों बन रहे हैं पहली पसंद?
ऊर्जा संकट और EV के फायदे / सिंबॉलिक एआई पिक

दुनिया में जब भी किसी बड़े तेल उत्पादक क्षेत्र में तनाव बढ़ता है, उसका असर सबसे पहले कच्चे तेल और ईंधन की कीमतों पर दिखाई देता है. हालिया ईरान संकट के बाद एक बार फिर ऊर्जा सुरक्षा और भविष्य की मोबिलिटी को लेकर चर्चा तेज हो गई है. ऐसे माहौल में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EVs) सिर्फ पर्यावरण के अनुकूल विकल्प नहीं, बल्कि आयातित तेल पर निर्भरता कम करने वाले दीर्घकालिक समाधान के रूप में भी देखे जा रहे हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में बढ़ती ईंधन लागत और ऊर्जा सुरक्षा की चुनौती EV अपनाने की रफ्तार को प्रभावित कर सकती है.

ईरान संकट का तेल बाजार और परिवहन पर क्या असर पड़ता है?

जब किसी बड़े तेल उत्पादक क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है, तो वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता आ जाती है. इसका सीधा असर पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर पड़ता है, जिससे आम लोगों के साथ-साथ परिवहन उद्योग की लागत भी बढ़ जाती है. हालांकि भारत में ईंधन की कीमतें टैक्स और अन्य कारकों से भी प्रभावित होती हैं, फिर भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने का असर घरेलू बाजार पर देखने को मिलता है.

मानद पीएसए फेलो प्रो. कार्तिक अथमनाथन के अनुसार, केवल तेल की कीमतें ही EV बाजार की दिशा तय नहीं करतीं, लेकिन ऊर्जा सुरक्षा और दीर्घकालिक लागत को देखते हुए इलेक्ट्रिक मोबिलिटी का महत्व लगातार बढ़ रहा है.

बढ़ती ईंधन कीमतें EV को क्यों बनाती हैं ज्यादा किफायती?

पेट्रोल और डीजल वाहन खरीदना शुरुआती दौर में अपेक्षाकृत सस्ता हो सकता है, लेकिन रोजाना इस्तेमाल के दौरान ईंधन पर होने वाला खर्च लगातार बढ़ता रहता है. इसके विपरीत इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने में शुरुआती निवेश अधिक होता है, लेकिन चार्जिंग की लागत और मेंटेनेंस खर्च काफी कम रहता है.

जब ईंधन महंगा होता है, तब वाहन मालिक कुल संचालन लागत का हिसाब लगाने लगते हैं. ऐसे में लंबे समय तक इस्तेमाल करने वालों के लिए EV आर्थिक रूप से अधिक लाभदायक विकल्प बन सकते हैं.

क्या चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर अब भी बड़ी चुनौती है?

चार्जिंग नेटवर्क को अक्सर EV अपनाने की सबसे बड़ी बाधा माना जाता है, लेकिन वास्तविक तस्वीर कुछ अलग है. दुनिया भर में अधिकांश EV उपयोगकर्ता अपने वाहन की चार्जिंग घर या ऑफिस में ही करते हैं. अनुमान है कि करीब 90 प्रतिशत चार्जिंग निजी स्थानों पर होती है.

फिर भी लंबी दूरी की यात्रा, हाईवे चार्जिंग नेटवर्क और चार्जिंग समय जैसी चुनौतियां अभी भी कई खरीदारों के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं. यही कारण है कि सरकारें और कंपनियां तेजी से चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार कर रही हैं.

किन सेक्टरों में सबसे तेजी से बढ़ रही है EV की मांग?

भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी का असर केवल निजी कारों तक सीमित नहीं है. खनन, औद्योगिक परिवहन और भारी उपकरण संचालन जैसे क्षेत्रों में, जहां डीजल की खपत काफी अधिक होती है, वहां ईंधन लागत बढ़ने के बाद इलेक्ट्रिक विकल्पों में दिलचस्पी बढ़ रही है.

हालांकि ईंधन कीमतों में हालिया उछाल और EV बिक्री के बीच सीधा संबंध दिखाने वाले व्यापक आंकड़े अभी उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन उद्योग विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले वर्षों में यह बदलाव और स्पष्ट दिखाई देगा.

क्या EV उद्योग भी वैश्विक संघर्षों से अछूता है?

सिर्फ तेल ही नहीं, बल्कि बैटरी बनाने में इस्तेमाल होने वाले लिथियम, निकेल और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों की सप्लाई भी वैश्विक तनाव से प्रभावित हो सकती है. इसका असर बैटरी उत्पादन लागत और सप्लाई चेन पर पड़ सकता है.

यानी EV उद्योग पूरी तरह सुरक्षित नहीं है, लेकिन इसके बावजूद इसे भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में सबसे व्यावहारिक विकल्पों में गिना जा रहा है.

भविष्य में EV क्यों होंगे ज्यादा महत्वपूर्ण?

विशेषज्ञों का मानना है कि इलेक्ट्रिक वाहन केवल ईंधन बचाने का साधन नहीं हैं, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा की रणनीति का भी अहम हिस्सा बनते जा रहे हैं. इथेनॉल, बायोफ्यूल और हाइड्रोजन जैसे विकल्प भी विकसित हो रहे हैं, लेकिन वर्तमान समय में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी सबसे तेजी से आगे बढ़ती तकनीक मानी जा रही है.

बेहतर बैटरी तकनीक, घटती उत्पादन लागत, लंबी रेंज और बढ़ते चार्जिंग नेटवर्क के साथ आने वाले वर्षों में EV वैश्विक परिवहन व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार बन सकते हैं.

दमदार विकल्प बन रहे इलेक्ट्रिक व्हीकल्स

ईरान जैसे भू-राजनीतिक संघर्ष दुनिया को यह याद दिलाते हैं कि तेल पर अत्यधिक निर्भरता हमेशा जोखिम लेकर आती है. भले ही केवल ईंधन महंगा होने से EV की बिक्री अचानक न बढ़े, लेकिन लंबी अवधि में ऊर्जा सुरक्षा, कम संचालन लागत और टिकाऊ परिवहन की जरूरत इलेक्ट्रिक वाहनों को पहले से कहीं अधिक मजबूत विकल्प बना रही है.

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राजीव कुमार हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारिता अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. सरल भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी पहचान है. राजीव की विशेषज्ञता स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग तथा डिजिटल ट्रेंड्स जैसे विषयों में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, आधिकारिक डेटा, कंपनी अपडेट्स तथा एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाते हैं. डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. गूगल डिस्कवर और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारीपूर्ण होते हैं, बल्कि पाठकों की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, तुलना आधारित लेख और एक्सप्लेनर स्टोरीज को पाठकों द्वारा काफी पसंद किया जाता है. राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन और फीचर लेखन जैसे विभिन्न बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई. जमशेदपुर में जन्मे राजीव ने प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से बॉटनी ऑनर्स और भारतीय विद्या भवन, पुणे से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उन्हें आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में मदद करती है. राजीव की सबसे बड़ी पहचान है, क्रेडिब्लिटी, क्लैरिटी और ऑडियंस-फर्स्ट अप्रोच. वे सिर्फ टेक ऐंड ऑटो को कवर नहीं करते, बल्कि उसे ऐसे पेश करते हैं कि हर व्यक्ति उसे समझ सके, उससे जुड़ सके और उससे फायदा उठा सके. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर
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