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Home Automobile डिजाइन फेज में ही तय हो जाती है Electric Two Wheeler Price

डिजाइन फेज में ही तय हो जाती है Electric Two Wheeler Price

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डिजाइन फेज में ही तय हो जाती है Electric Two Wheeler Price
सिटी राइड के लिए सबसे सस्ता विकल्प है इलेक्ट्रिक स्कूटर. फोटो: सोशल मीडिया

Electric Two Wheeler: इलेक्ट्रिक दोहपहिया वाहनों के बाजार में आने के बाद परिवहन व्यवस्था में बदलाव दिखाई दे रहा है. बैटरी तकनीक की सफलताओं ने बेहतर रेंज और परफॉर्मेंस के साथ इलेक्ट्रिक वाहनों के निर्माण को बढ़ावा दिया है. इससे लोगों को आवागम के लिए पेट्रोल-डीजल वाले वाहनों के मुकाबले स्वच्छ और अधिक लागत प्रभावी ऑप्शन मिला है. ईंधन की कीमतों के मामले में आंतरिक दहन इंजन (आईसीई) वाले मोटरसाइकिल और स्कूटरों के मुकाबले इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन प्रदूषण मुक्त होने के साथ-साथ किफायती भी होते जा रहे है. आईसीई वाले दोपहिया वाहनों से आवागम करने पर जहां प्रति किलोमीटर 2 से 2.50 रुपये खर्च आता है, वहीं इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों से आवागमन करने पर लोगों को 30 से 50 पैसे प्रति किलोमीटर ही खर्च करने पड़ रहे हैं.

इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन बाजार में कड़ा मुकाबला

इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों के आने के बाद मोबिलिटी में एक नए युग की शुरुआत होने के साथ ही इसके निर्माताओं को भी अवसर मिला है. इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन बाजार में कड़ा मुकाबला है. एक इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों से दूसरे को अलग करने के लिए इसके ऑरिजनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स (ओईएम) को अपने प्रोडक्ट को अलग करने की जरूरत पड़ती है. इसके साथ ही, इसकी उत्पादन लागत को भी कंट्रोल करने की जरूरत है.

पांच चीजों पर तय होती है इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन की लागत

बाजार में उपलब्ध इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों को पांच चीजें मजबूत बनाती हैं. इनमें मैकेनिकल और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम, बैटरी, मोटर, कंट्रोलर, इलेक्ट्रिक सिस्टम और इलेक्ट्रॉनिक्स, प्रोडक्ट परफॉर्मेंस और कंपनी का कॉन्सेप्ट शामिल हैं. ये पांच चीजें दोपहिया इलेक्ट्रिक वाहनों की 50 से 70 फीसदी उत्पादन लागत को तय करती हैं. इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन निर्माता कंपनियां डिजाइन फेज में ही ओईएम कोर सिस्टम का ऑप्शन चुन लेते हैं और फिर उसी के आधार पर उसकी लागत तय की जाती है.

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इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन निर्माताओं के लिए 6 चीजें महत्वपूर्ण

इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन निर्माताओं के लिए मूल रूप से 6 चीजें महत्वपूर्ण मानी जाती हैं. इनमें प्रोडक्ट परफॉर्मेंस, सोर्सिंग, टाइम टू मार्केट, कैपिटल एक्सपेंडिचर, अपफ्रंट प्रोडक्ट कॉस्ट और टोटल कॉस्ट ऑफ ऑनरशिप शामिल हैं.

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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