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7 लाख से कम में Electric Tractor, किसानों के लिए डीजल ट्रैक्टर के नए ऑप्शंस

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7 लाख से कम में Electric Tractor, किसानों के लिए डीजल ट्रैक्टर के नए ऑप्शंस
इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर / एआई-जेनरेटेड रिप्रेजेंटेशनल इलस्ट्रेशन

भारतीय खेती में ट्रैक्टर की भूमिका किसी रीढ़ से कम नहीं है. दशकों से खेतों में डीजल ट्रैक्टरों का दबदबा रहा है, लेकिन अब इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की लहर कृषि क्षेत्र तक पहुंचने लगी है. बढ़ती ईंधन कीमतों और कम परिचालन लागत की वजह से किसान भी नए विकल्पों की तलाश कर रहे हैं. हालांकि इलेक्ट्रिक कारों और स्कूटरों की तरह इलेक्ट्रिक ट्रैक्टरों की संख्या अभी बहुत ज्यादा नहीं है, लेकिन बाजार में कुछ ऐसे मॉडल मौजूद हैं जो खेती को अधिक किफायती और पर्यावरण के अनुकूल बनाने का दावा करते हैं.

अभी भी डीजल ट्रैक्टरों का है दबदबा

भारत दुनिया के सबसे बड़े ट्रैक्टर बाजारों में से एक है. महिंद्रा, स्वराज, सोनालिका और अन्य बड़ी कंपनियां हर साल लाखों ट्रैक्टर बेचती हैं. इसके बावजूद इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर सेगमेंट अभी शुरुआती दौर में है. ज्यादातर किसान अभी भी डीजल ट्रैक्टरों पर भरोसा करते हैं क्योंकि उनकी उपलब्धता ज्यादा है और ग्रामीण इलाकों में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर अभी सीमित है.

दिलचस्प बात यह है कि देश की कुछ प्रमुख ट्रैक्टर कंपनियों के पोर्टफोलियो में फिलहाल कोई बड़े पैमाने पर उपलब्ध इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर नहीं दिखता. इसके चलते ग्राहकों के पास विकल्प भी सीमित हैं.

7 लाख रुपये से कम कीमत वाला इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर

अगर कम कीमत वाले इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर की बात करें तो सोनालिका का टाइगर इलेक्ट्रिक लंबे समय से चर्चा में रहा है. इसकी शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत करीब 6.10 लाख रुपये बताई जाती है. यह छोटे किसानों और हल्के कृषि कार्यों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया मॉडल है.

हालांकि कई ऑनलाइन प्लैटफॉर्म पर इसकी जानकारी उपलब्ध है, लेकिन कुछ क्षेत्रों में इसकी उपलब्धता सीमित दिखाई देती है. खरीदारी से पहले स्थानीय डीलरशिप पर उपलब्धता की जांच करना जरूरी हो सकता है.

ज्यादा पावर चाहिए तो ये विकल्प भी मौजूद

इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर बाजार में Montra Electric E-27 भी एक प्रमुख नाम बनकर उभरा है. यह लगभग 27 एचपी क्षमता के साथ आता है और इसकी कीमत 10 लाख रुपये से अधिक के स्तर पर रखी गई है. ज्यादा क्षमता और आधुनिक तकनीक की वजह से यह उन किसानों के लिए विकल्प बन सकता है जो बड़े खेतों में काम करते हैं और डीजल पर निर्भरता कम करना चाहते हैं.

इसके अलावा कुछ नई कंपनियां भी कृषि क्षेत्र में इलेक्ट्रिक समाधान विकसित कर रही हैं, जिससे आने वाले वर्षों में इस सेगमेंट में प्रतिस्पर्धा बढ़ने की उम्मीद है. यह भी पढ़ें: इन 4 नंबरों में छिपी है टायर की पूरी कुंडली, 1 मिनट में जानें बदलने का सही समय

AutoNxt जैसी कंपनियां बढ़ा रही हैं विकल्प

इलेक्ट्रिक कृषि मशीनरी पर फोकस करने वाली कंपनियों में AutoNxt का नाम तेजी से सामने आया है. कंपनी के पोर्टफोलियो में विभिन्न क्षमता वाले इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर शामिल हैं, जिन्हें छोटे और मध्यम आकार के खेतों के लिए विकसित किया गया है.

विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे-जैसे बैटरी तकनीक बेहतर होगी और चार्जिंग सुविधाएं बढ़ेंगी, इलेक्ट्रिक ट्रैक्टरों की मांग भी तेजी से बढ़ सकती है. इससे किसानों का परिचालन खर्च कम करने में मदद मिल सकती है.

क्या भविष्य इलेक्ट्रिक ट्रैक्टरों का है?

फिलहाल इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर भारतीय बाजार में एक विशेष श्रेणी के उत्पाद बने हुए हैं, लेकिन कृषि क्षेत्र में बढ़ती तकनीकी स्वीकार्यता इनके लिए नए अवसर पैदा कर रही है. कम शोर, कम रखरखाव और ईंधन पर कम खर्च जैसी खूबियां इन्हें आकर्षक बनाती हैं. हालांकि बड़े पैमाने पर अपनाए जाने के लिए कीमत, चार्जिंग नेटवर्क और लंबी अवधि की विश्वसनीयता जैसे पहलुओं पर अभी और काम होना बाकी है.

डिस्क्लेमर: ट्रैक्टरों की कीमतें एक्स-शोरूम हैं और अलग-अलग राज्यों, शहरों व डीलरशिप के अनुसार इनमें बदलाव संभव है. फीचर्स, क्षमता और उपलब्धता समय के साथ बदल सकती है. खरीदारी से पहले संबंधित कंपनी या अधिकृत डीलर से पूरी जानकारी की पुष्टि जरूर कर लें. यह भी पढ़ें: टायरों का रंग हमेशा काला ही क्यों होता है? सालों से गाड़ी चलाने वाले भी नहीं जानते इसकी वजह

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राजीव कुमार हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारिता अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. सरल भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी पहचान है. राजीव की विशेषज्ञता स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग तथा डिजिटल ट्रेंड्स जैसे विषयों में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, आधिकारिक डेटा, कंपनी अपडेट्स तथा एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाते हैं. डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. गूगल डिस्कवर और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारीपूर्ण होते हैं, बल्कि पाठकों की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, तुलना आधारित लेख और एक्सप्लेनर स्टोरीज को पाठकों द्वारा काफी पसंद किया जाता है. राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन और फीचर लेखन जैसे विभिन्न बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई. जमशेदपुर में जन्मे राजीव ने प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से बॉटनी ऑनर्स और भारतीय विद्या भवन, पुणे से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उन्हें आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में मदद करती है. राजीव की सबसे बड़ी पहचान है, क्रेडिब्लिटी, क्लैरिटी और ऑडियंस-फर्स्ट अप्रोच. वे सिर्फ टेक ऐंड ऑटो को कवर नहीं करते, बल्कि उसे ऐसे पेश करते हैं कि हर व्यक्ति उसे समझ सके, उससे जुड़ सके और उससे फायदा उठा सके. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर
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