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Home Automobile E100 फ्यूल क्या है और क्यों ऑटो कंपनियां इस पर फोकस कर रही हैं? जानें हर एक जरूरी बात

E100 फ्यूल क्या है और क्यों ऑटो कंपनियां इस पर फोकस कर रही हैं? जानें हर एक जरूरी बात

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E100 फ्यूल क्या है और क्यों ऑटो कंपनियां इस पर फोकस कर रही हैं? जानें हर एक जरूरी बात
E100 फ्यूल (Photo: AI Generated)

भारत अब तेजी से क्लीन और ग्रीन मोबिलिटी की तरफ बढ़ रहा है.  इसी बीच E100 फ्यूल को लेकर काफी चर्चा हो रही है. सरकार और ऑटोमोबाइल कंपनियां अब E20 के बाद अगले बड़े कदम की ओर देख रही हैं, जिसमें ज्यादा इथेनॉल ब्लेंड्स शामिल हैं. E100 को खास तौर पर इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि यह पेट्रोल जैसे ट्रेडिशनल फॉसिल फ्यूल पर डिपेंडेंसी को काफी हद तक कम कर सकता है. साथ ही, यह देश में बनने वाले इथेनॉल को बढ़ावा देता है. इससे देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए दूसरों पर कम डिपेंड होता है और सस्टेनेबिलिटी भी मजबूत होती है.

E100 फ्यूल क्या है?

E100 एक ऐसा हाई-एथेनॉल फ्यूल ब्लेंड है जिसमें लगभग शुद्ध एथेनॉल होता है. यानी करीब 95% से 100% तक एथेनॉल मिल सकता है. भारत में जो ‘Ethanol 100’ फ्यूल इंडियन ऑयल ने लॉन्च किया है, उसमें आमतौर पर करीब 93-93.5% एथेनॉल होता है. इसके साथ लगभग 5% पेट्रोल और कुछ को-सेल्वेंट भी मिलाया जाता है, ताकि फ्यूल ज्यादा स्टेबल रहे और इंजन में सही तरीके से काम करे.

ये फ्यूल खास तौर पर उन गाड़ियों के लिए बनाया गया है जो ज्यादा एथेनॉल वाले फ्यूल को सपोर्ट करती हैं, जैसे फ्लेक्स-फ्यूल व्हीकल्स (FFVs). ऐसी गाड़ियां अलग-अलग एथेनॉल ब्लेंड पर आराम से चल सकती हैं. इसलिए इनके लिए E100 एक बेहतर और क्लीन एनर्जी ऑप्शन माना जाता है.

भारत के लिए E100 फ्यूल क्यों जरूरी है?

भारत में E100 फ्यूल को बढ़ावा देने के पीछे सबसे बड़ा मकसद देश को कच्चे तेल के आयात पर कम डिपेंडेंसी बनाना है. केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के मुताबिक, अगर हाई-एथेनॉल फ्यूल का इस्तेमाल बढ़ता है तो भारत अपने फ्यूल इम्पोर्ट को काफी हद तक घटा सकता है. अभी देश अपनी जरूरत का करीब 87% तेल बाहर से मंगाता है.

इस डिपेंडेंसी को कम करने से देश की इकॉनमी को बड़ा फायदा हो सकता है, क्योंकि फिलहाल भारत हर साल लगभग 22 लाख करोड़ रुपये सिर्फ फ्यूल इम्पोर्ट पर खर्च करता है. साथ ही, दुनिया में चल रही भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और तनावों ने भी यह साफ कर दिया है कि ऊर्जा के लिए दूसरों पर ज्यादा डिपेंड रहना कितना जोखिम भरा हो सकता है.

भारत में इथेनॉल के यूज में हुई प्रोग्रेस

भारत ने पिछले कुछ सालों में पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने के मामले में काफी तेजी से प्रोग्रेस की है. देशभर में E20 फ्यूल का रोलआउट एक बड़ा और अहम कदम माना गया है. अब अगला फेज और भी आगे बढ़ने का है, जिसमें इथेनॉल ब्लेंडिंग को 30% तक ले जाने की योजना है. साथ ही सरकार और ऑटो सेक्टर मिलकर ऐसे फ्लेक्स-फ्यूल व्हीकल्स को बढ़ावा दे रहे हैं जो E85 और यहां तक कि E100 जैसे हाई इथेनॉल ब्लेंड पर भी आसानी से चल सकें.

E100 कितनी आसानी से मिलती है और दुनिया में इसका यूज कैसे हो रहा है?

2024 में भारत में E100 फ्यूल की शुरुआत इंडियन ऑयल ने की थी. शुरुआत में इसे चुनिंदा 183 पेट्रोल पंपों पर उपलब्ध कराया गया था, जो महाराष्ट्र, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु और दिल्ली जैसे राज्यों में फैले हुए थे. अगर दुनिया की बात करें तो अभी तक ब्राजील ही ऐसा देश है जहां E100 फ्यूल बड़े पैमाने पर आमतौर पर यूज होता है. वहीं दूसरे देशों में स्थिति थोड़ी अलग है. जैसे स्वीडन में E85 फ्यूल का यूज होता है, जबकि ज्यादातर यूरोपीय देश अभी भी E5 से लेकर E10 जैसे कम इथेनॉल ब्लेंड्स पर ही डिपेंड हैं.

गाड़ी बनाने वाली कंपनियों के लिए चुनौतियां और अवसर

E100 फ्यूल की तरफ बढ़ना ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के लिए एक बड़ा बदलाव है. इसके लिए कार कंपनियों को अपनी टेक्नोलॉजी में काफी अपडेट करना पड़ेगा. दरअसल, इंजनों को ऐसे डिजाइन करना होगा जो ज्यादा इथेनॉल वाले फ्यूल को आसानी से संभाल सकें, क्योंकि इथेनॉल पेट्रोल की तुलना में थोड़ा ज्यादा जंग लगाने वाला होता है. इसलिए इंजन में यूज होने वाले मटीरियल की मजबूती और सही ट्यूनिंग बहुत जरूरी हो जाती है.

लेकिन इस बदलाव के सिर्फ चैलेंज ही नहीं, कई मौके भी हैं. हाई इथेनॉल ब्लेंड वाले फ्यूल पर चलने वाली गाड़ियां बेहतर परफॉर्मेंस और कभी-कभी ज्यादा एफिशिएंसी भी दे सकती हैं. साथ ही, क्योंकि इथेनॉल देश में ही बनाया जाता है, इसलिए लंबे समय में इससे फ्यूल की कीमतों पर भी कुछ राहत मिल सकती है. इसका फायदा सीधे आम लोगों को होगा.

यह भी पढ़ें: भारत की पहली E100 Flex Fuel कार लाएगी Maruti Suzuki, नितिन गडकरी ने किया एलान

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अंकित आनंद, डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में एक उभरते हुए कंटेंट राइटर हैं. वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में जूनियर कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. उन्हें पत्रकारिता में 2 साल से अधिक का अनुभव है और इस दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर अपनी मजबूत पकड़ बनाई है. अंकित मुख्य रूप से स्मार्टफोन लॉन्च, टेलीकॉम अपडेट्स, टिप्स एंड ट्रिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी खबरें, गैजेट्स रिव्यू और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे विषयों पर काम करते हैं. इसके साथ ही वह ऑटोमोबाइल सेक्टर से जुड़ी जरूरी और ट्रेंडिंग खबरों को भी कवर करते हैं. वह कार और बाइक से जुड़ी हर खबर को सिर्फ एक एंगल से नहीं, बल्कि टेक्निकल, यूजर एक्सपीरियंस और मार्केट ट्रेंड्स जैसे हर पहलू से समझकर पेश करते हैं. उनकी लेखन शैली सरल, स्पष्ट और यूजर्स-फर्स्ट अप्रोच पर बेस्ड है, जिसमें Gen Z की पसंद और उनकी डिजिटल समझ को भी ध्यान में रखा जाता है. बिहार में जन्मे अंकित आनंद की शुरुआती शिक्षा सीबीएसई स्कूल से हुई है. इसके बाद 2024 में गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी (GGSIPU) के कस्तूरी राम कॉलेज ऑफ हायर एजुकेशन से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन डिग्री हासिल की. अपनी पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने मीडिया और डिजिटल स्टोरीटेलिंग की बारीकियों को समझा और धीरे-धीरे टेक और ऑटो जर्नलिज्म की ओर अपना फोकस बढ़ाया. शिक्षा पूरी करने के बाद अंकित ने Zee News में करीब 1 साल तक काम किया, जहां उन्होंने टीवी न्यूज प्रोडक्शन, आउटपुट डेस्क वर्क, कंटेंट रिसर्च और न्यूज राइटिंग की बारीकियों को करीब से समझा. इस अनुभव ने उन्हें तेजी से बदलते न्यूज रूम माहौल में काम करने की क्षमता और खबरों को सरल तरीके से प्रस्तुत करने की कला सिखाई. अंकित का मानना है कि टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें सिर्फ जानकारी नहीं देतीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की लाइफस्टाइल और फैसलों को भी असर डालती हैं. इसी सोच के साथ वह SEO-ऑप्टिमाइज्ड, रिसर्च-बेस्ड और सरल भाषा में कंटेंट तैयार करते हैं, ताकि पाठकों को सही और उपयोगी जानकारी आसानी से मिल सके.
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