क्या आपने कभी सोचा है कि भारत में कार का स्टीयरिंग दाईं तरफ (Right Side) होता है, जबकि अमेरिका में यही स्टीयरिंग बाईं तरफ (Left Side) क्यों होता है? पहली नजर में यह सिर्फ डिजाइन का फर्क लगता है, लेकिन इसके पीछे कई सौ साल पुराना इतिहास और सड़क नियमों से जुड़ी दिलचस्प वजह छिपी हुई है, जिसकी शुरुआत कारों से भी पहले घुड़सवारी के दौर में हुई थी. आइए जानते हैं.
सड़क के किस तरफ चलती हैं गाड़ियां, उसी पर तय होती है स्टीयरिंग की जगह
किसी भी देश में कार का स्टीयरिंग किस तरफ होगा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि वहां गाड़ियां सड़क के किस तरफ चलती हैं. भारत में गाड़ियां सड़क के बाईं ओर (Left Side) चलती हैं. ऐसे में ड्राइवर का दाईं तरफ बैठना ज्यादा सुरक्षित माना जाता है. इससे सामने से आने वाले वाहनों, सड़क की सेंटर लाइन और ओवरटेकिंग के दौरान बेहतर विजिबिलिटी मिलती है. यही वजह है कि भारत के अलावा ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, जापान और न्यूजीलैंड जैसे देशों में भी राइट-हैंड ड्राइव (Right-Hand Drive) कारें चलती हैं.
दूसरी तरफ, अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी और ज्यादातर यूरोपीय देशों में गाड़ियां सड़क की दाईं ओर (Right Side) चलती हैं. इसलिए वहां ड्राइवर को सड़क और सामने से आने वाले ट्रैफिक का बेहतर विजिबिलिटी मिले, इसके लिए स्टीयरिंग कार के बाईं तरफ लगाया जाता है.
भारत में बाईं तरफ गाड़ी चलाने की शुरुआत कैसे हुई?
भारत में लेफ्ट-साइड ड्राइविंग का ट्रेडिशन ब्रिटिश शासन के दौरान शुरू हुआ. दरअसल, ब्रिटेन में सदियों से लोग सड़क के बाईं ओर चलते और सवारी करते थे. साथ ही पुराने समय में घुड़सवार अपनी तलवार बाईं कमर पर रखते थे. ऐसे में सड़क के बाईं तरफ चलने पर उनका दाहिना हाथ सामने से आने वाले खतरे से बचाव के लिए हमेशा तैयार रहता था. धीरे-धीरे यही नियम ब्रिटेन में आम हो गया. ऐसे में जब अंग्रेजों ने भारत पर शासन किया, तो उन्होंने यहां भी यही ट्रैफिक नियम लागू कर दिए. आजादी के बाद 1947 में भारत ने कई कानूनों में बदलाव किए, लेकिन सड़क पर गाड़ी चलाने का यह नियम आज भी पहले जैसा ही बना हुआ है.
अमेरिका ने क्यों अपनाया अलग नियम?
अमेरिका ने ब्रिटेन से आजादी मिलने के बाद अपनी ट्रैफिक व्यवस्था में बदलाव किया और सड़क की दाईं ओर गाड़ी चलाने का नियम अपनाया. इसके साथ ही वहां बनने वाली कारों में स्टीयरिंग भी बाईं तरफ दिया जाने लगा. धीरे-धीरे यह नियम अमेरिका के साथ कई अन्य देशों में भी अपनाया गया.
आखिर कौन-सा सिस्टम बेहतर है?
असल में राइट-हैंड ड्राइव और लेफ्ट-हैंड ड्राइव दोनों ही सिस्टम अपने-अपने देशों के ट्रैफिक नियमों के अनुसार पूरी तरह सुरक्षित और प्रभावी हैं. फर्क सिर्फ इतना है कि जिस देश में गाड़ी सड़क की जिस तरफ चलते हैं, वहां स्टीयरिंग उसकी विपरीत दिशा (Opposite Direction) में रखा जाता है, ताकि ड्राइवर को सड़क और सामने से आने वाले ट्रैफिक की सबसे अच्छी विजिबिलिटी मिल सके.
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