[tdb_header_weather inline="yes" temp_color="#000000" loc_color="#000000" api="653566bd56b7ecfee45d74c0fc937fc1" float_right="yes" align_horiz="content-horiz-center" icon_size="24" icon_space="10" f_temp_font_family="420" f_temp_font_size="14" f_temp_font_weight="500" f_unit_font_size="14" f_loc_font_size="14" f_unit_font_family="882" location="Ranchi" icon_color="#000000"]
[tdb_header_categories align_horiz="content-horiz-left" el_align_horiz="content-horiz-left" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLXJpZ2h0IjoiNSIsImhlaWdodCI6IjQwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9fQ==" icon_size="18" limit="18" elem_text_color="#2d2800" f_elem_font_family="420" f_elem_font_size="16px" f_elem_font_weight="500" tdicon="tdc-font-fa tdc-font-fa-navicon-reorder-bars" inline="yes" shadow_shadow_size="0" shadow_shadow_offset_vertical="0" shadow_shadow_spread="0" bg_color="#f9f9f9" include="1028, 1081, 1446, 1228, 3706, 2624,1071"][tdb_mobile_horiz_menu inline="yes" menu_id="372" tdc_css="eyJwaG9uZSI6eyJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBob25lX21heF93aWR0aCI6NzY3LCJhbGwiOnsiYm9yZGVyLXN0eWxlIjoibm9uZSIsImRpc3BsYXkiOiIifX0=" f_elem_font_size="18px" f_elem_font_weight="eyJhbGwiOiI3MDAiLCJwaG9uZSI6IiJ9" f_elem_font_family="420" text_color_h="#f58220" main_sub_icon_size="13"]
Home Automobile चीन ने किया वायरलेस ट्रेन सिस्टम का सफल टेस्ट, बिना जोड़ के दौड़ीं 7 ट्रेनें, खींचा 35 हजार टन माल

चीन ने किया वायरलेस ट्रेन सिस्टम का सफल टेस्ट, बिना जोड़ के दौड़ीं 7 ट्रेनें, खींचा 35 हजार टन माल

0
चीन ने किया वायरलेस ट्रेन सिस्टम का सफल टेस्ट, बिना जोड़ के दौड़ीं 7 ट्रेनें, खींचा 35 हजार टन माल
China Wireless Rail System Test

China Wireless Rail System Test: चीन ने रेल टेक्नोलॉजी में एक बड़ा छलांग लगाते हुए ऐसा सिस्टम टेस्ट किया है, जिसमें लंबी मालगाड़ियां किसी भी फिजिकल कपलिंग के बिना एक साथ चल सकती हैं. इनर मंगोलिया के बाओशेन रेलवे ट्रैक पर हुए इस ट्रायल में सात भारी-भरकम मालगाड़ियां बिल्कुल नजदीक-दूरी में दौड़ीं और कुल मिलाकर करीब 35,000 टन माल लेकर चलीं. दावा है कि यह भार तीन एफिल टॉवर के वजन के बराबर है.

वायरलेस कंट्रोल सिस्टम ने बदला खेल

यह नया ग्रुप कंट्रोल सिस्टम चीन शेनहुआ एनर्जी कंपनी और कुछ घरेलू रिसर्च टीमों ने मिलकर तैयार किया है. इसके चलते कई ट्रेनें बिना किसी फिजिकल लिंक के एक ही आदेश पर चल, रुक और मोड़ बदल सकती हैं. इस तकनीक के सफल परीक्षण ने चीन को रेल फ्रेट बढ़ाने का एक नया रास्ता दिखा दिया है.

ढुलाई क्षमता में 50% तक उछाल की उम्मीद

चीन का दावा है कि इस वायरलेस ट्रेन सिस्टम से रेल माल परिवहन क्षमता 50% तक बढ़ाई जा सकती है, वह भी बिना नयी पटरियां बिछाए.बड़ीमालगाड़ियां चलाने या ट्रेनों के बीच का समय कम करने से माल ढुलाई तेज और सस्ती होगी. यह तरीका नयी रेल लाइन बनाने की तुलना में कहीं कम खर्चीला माना जा रहा है.

तीन तिमाही में 3 अरब टन माल ढोया गया

सरकारी अखबार ‘चाइना डेली’ के अनुसार, चीन ने इस साल की पहली तीन तिमाहियों में तीन अरब टन से ज्यादा माल रेल से भेजा है. रेलवे कनेक्टिविटी को दूसरे देशों तक बढ़ाने की कोशिशें भी जारी हैं.‘चाइना रेलवे एक्सप्रेस’ पहले ही एशिया और यूरोप के कई देशों के बीच माल ढुलाई का बड़ा नेटवर्क बना चुका है.

नयी लाइनें महंगी, स्मार्ट टेक्नोलॉजी है सस्ता विकल्प

नयी रेल लाइनें बनाना बहुत महंगा पड़ता है, इसलिए चीन की यूनिवर्सिटीज और रिसर्च लैब्स लंबे समय से ऐसे समाधान खोज रही थीं, जो पुराने ट्रैक पर ही क्षमता बढ़ा दें.चांग्शा स्थित सेंट्रल साउथ यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने हाल में सुझाव दिया कि ट्रेन की लंबाई और रनिंग गैप में सुधार कर ढुलाई क्षमता काफी बढ़ाई जा सकती है. अब वायरलेस ट्रेन सिस्टम इस विचार को और आगे ले जाता दिख रहा है.

CatGPT लाया डिजिटल डिटॉक्स वाला लैंडलाइन फोन, फीचर्स लाजवाब, 3 दिन में 1 करोड़ की सेल

Google Maps अब आपकी कार में रोड को लाइव स्कैन करके बताएगा कब बदलनी है लेन

Previous article कमेटी गठित, हॉस्टल आवंटन की राह खुली
Next article कब्रिस्तान में शव दफनाने को लेकर चार घंटे किया सड़क जाम
Avatar Of Rajeev Kumar
राजीव कुमार हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारिता अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. सरल भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी पहचान है. राजीव की विशेषज्ञता स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग तथा डिजिटल ट्रेंड्स जैसे विषयों में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, आधिकारिक डेटा, कंपनी अपडेट्स तथा एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाते हैं. डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. गूगल डिस्कवर और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारीपूर्ण होते हैं, बल्कि पाठकों की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, तुलना आधारित लेख और एक्सप्लेनर स्टोरीज को पाठकों द्वारा काफी पसंद किया जाता है. राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन और फीचर लेखन जैसे विभिन्न बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई. जमशेदपुर में जन्मे राजीव ने प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से बॉटनी ऑनर्स और भारतीय विद्या भवन, पुणे से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उन्हें आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में मदद करती है. राजीव की सबसे बड़ी पहचान है, क्रेडिब्लिटी, क्लैरिटी और ऑडियंस-फर्स्ट अप्रोच. वे सिर्फ टेक ऐंड ऑटो को कवर नहीं करते, बल्कि उसे ऐसे पेश करते हैं कि हर व्यक्ति उसे समझ सके, उससे जुड़ सके और उससे फायदा उठा सके. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर
ऐप पर पढें
होम आप का शहर
News Snap News Reel