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Home Automobile 911Km माइलेज वाली कार ने उड़ाए होश, अमेरिकी स्टूडेंट्स ने बना डाली कमाल की कार

911Km माइलेज वाली कार ने उड़ाए होश, अमेरिकी स्टूडेंट्स ने बना डाली कमाल की कार

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911Km माइलेज वाली कार ने उड़ाए होश, अमेरिकी स्टूडेंट्स ने बना डाली कमाल की कार
सुपरमाइलेज कार / फोटो ब्रिघम यंग यूनिवर्सिटी न्यूज वेबसाइट की

अमेरिका के कुछ स्टूडेंट्स ने ऐसा कारनामा कर दिखाया है, जिसने पूरी ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री को चौंका दिया है. अमेरिका की ब्रिघम यंग यूनिवर्सिटी के छात्रों ने एक ऐसी अल्ट्रा-एफिशिएंट कार तैयार की है, जो दावा करती है कि सिर्फ 1 लीटर ईंधन में करीब 911 किलोमीटर तक चल सकती है. बढ़ती पेट्रोल कीमतों और इलेक्ट्रिक व्हीकल्स की चर्चा के बीच यह प्रोजेक्ट फिर से दिखाता है कि सही इंजीनियरिंग और स्मार्ट डिजाइन के जरिए पेट्रोल इंजन से भी हैरान करने वाली माइलेज हासिल की जा सकती है. इस अनोखी कार का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग इसकी तकनीक को देखकर दंग हैं.

सिर्फ माइलेज के लिए बनाई गई है यह खास कार

इस व्हीकल का नाम ‘सुपरमाइलेज’ रखा गया है. इसे रोजमर्रा की ड्राइविंग के लिए नहीं, बल्कि ज्यादा से ज्यादा फ्यूल एफिशिएंसी दिखाने के मकसद से तैयार किया गया है. यह कार Shell Eco-marathon प्रतियोगिता के लिए बनाई गई थी, जहां दुनिया भर के स्टूडेंट्स सबसे कम ईंधन में सबसे ज्यादा दूरी तय करने वाली गाड़ियां बनाते हैं.

कार का डिजाइन बेहद लो और एयरोडायनामिक रखा गया है. इसका पूरा बॉडी स्ट्रक्चर हल्के कार्बन फाइबर से तैयार किया गया है ताकि वजन कम से कम रहे. यही वजह है कि पूरी गाड़ी का वजन सिर्फ 49 किलोग्राम है.

वीडियो यहां देखें

सिर्फ 30 मिलीलीटर ईंधन से चली कार

इस कार की सबसे चौंकाने वाली बात इसका फ्यूल सिस्टम है. इसमें पारंपरिक फ्यूल टैंक नहीं दिया गया. इसकी जगह सिर्फ 30 मिलीलीटर एथेनॉल रखने वाला छोटा रिजर्वायर लगाया गया है. इसी बेहद कम ईंधन में इस कार ने लगभग 16 किलोमीटर का रन पूरा किया.

कंपनी और स्टूडेंट्स के दावे के मुताबिक, इसकी एफिशिएंसी 2,145 माइल प्रति गैलन यानी भारतीय गणना के हिसाब से लगभग 911 किलोमीटर प्रति लीटर के बराबर बैठती है. हालांकि यह आंकड़ा नियंत्रित टेस्ट कंडीशन में हासिल किया गया है.

स्पीड कम, लेकिन टेक्नोलॉजी जबरदस्त

यह कार माइलेज के लिए बनाई गई है, इसलिए इसकी टॉप स्पीड सिर्फ 37 किलोमीटर प्रति घंटा रखी गई है. तेज हवा या खराब मौसम जैसी स्थितियों में इसकी परफॉर्मेंस काफी प्रभावित हो सकती है. यही वजह है कि इसे प्रैक्टिकल रोड कार की बजाय एक इंजीनियरिंग एक्सपेरिमेंट माना जा रहा है.

इसमें बैठने के लिए भी सीमाएं तय हैं. कार में सिर्फ वही ड्राइवर बैठ सकता है जिसकी हाइट लगभग 5 फीट 4 इंच तक हो और वजन 54 किलो के आसपास हो. छोटे आकार और हल्के वजन की वजह से ही यह रिकॉर्ड स्तर की एफिशिएंसी हासिल कर पाई.

बढ़ती पेट्रोल कीमतों के बीच चर्चा में आई कार

भारत समेत दुनिया के कई देशों में पेट्रोल और डीजल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं. ऐसे समय में इस तरह की माइलेज देने वाली कार ने लोगों का ध्यान अपनी तरफ खींचा है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह प्रोजेक्ट दिखाता है कि इंटरनल कंबशन इंजन टेक्नोलॉजी अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है और उसमें भी काफी सुधार की संभावना बाकी है.

हालांकि यह टेक्नोलॉजी फिलहाल आम कारों में इस्तेमाल होने से काफी दूर है, लेकिन इससे भविष्य की फ्यूल एफिशिएंट कारों के लिए नई दिशा जरूर मिल सकती है.

क्या आम लोगों तक पहुंच सकती है ऐसी टेक्नोलॉजी?

ऑटो एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस तरह की अल्ट्रा-एफिशिएंट टेक्नोलॉजी को सीधे कमर्शियल कारों में लाना आसान नहीं है. आम कारों को ज्यादा स्पीड, सेफ्टी, कम्फर्ट और बड़े केबिन की जरूरत होती है. फिर भी इस तरह के प्रोजेक्ट भविष्य में हल्की, ज्यादा एयरोडायनामिक और कम ईंधन खर्च करने वाली गाड़ियों के डेवलपमेंट में मदद कर सकते हैं.

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राजीव कुमार हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारिता अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. सरल भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी पहचान है. राजीव की विशेषज्ञता स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग तथा डिजिटल ट्रेंड्स जैसे विषयों में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, आधिकारिक डेटा, कंपनी अपडेट्स तथा एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाते हैं. डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. गूगल डिस्कवर और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारीपूर्ण होते हैं, बल्कि पाठकों की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, तुलना आधारित लेख और एक्सप्लेनर स्टोरीज को पाठकों द्वारा काफी पसंद किया जाता है. राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन और फीचर लेखन जैसे विभिन्न बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई. जमशेदपुर में जन्मे राजीव ने प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से बॉटनी ऑनर्स और भारतीय विद्या भवन, पुणे से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उन्हें आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में मदद करती है. राजीव की सबसे बड़ी पहचान है, क्रेडिब्लिटी, क्लैरिटी और ऑडियंस-फर्स्ट अप्रोच. वे सिर्फ टेक ऐंड ऑटो को कवर नहीं करते, बल्कि उसे ऐसे पेश करते हैं कि हर व्यक्ति उसे समझ सके, उससे जुड़ सके और उससे फायदा उठा सके. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर
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