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पटना : बांग्लादेश के गुरुद्वारों का हाल जानेगी प्रबंधक कमेटी

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अमिताभ श्रीवास्तव
पटना सिटी : बांग्लादेश में भी सिख पंथ के संस्थापक गुरु नानक देव जी महाराज व दो गुरुओं के चरण धूल पड़े हैं. जहां पर मौजूद पांच गुरुद्वारों के इमारतों की स्थिति, वहां पहुंचने वाली संगत व धार्मिक आयोजन की व्यवस्था का आकलन करने के लिए पंजाब विश्वविद्यालय से डॉ परमवीर सिंह जायेंगे.
रिसर्चर का दायित्व तख्त श्री हरिमंदिर जी पटना साहिब प्रबंधक कमेटी की ओर से पंजाब विश्वविद्यालय, पटियाला के सिख विश्व कोष विभाग के प्रोफेसर डॉ परमवीर सिंह को सौंपा गया है. वहां के गुरुद्वारों की स्थिति का आकलन करने के लिए जाने वाले रिसर्चर ने फोन पर बताया कि दिसंबर में ही जाना था. वहां की स्थिति ठीक नहीं रहने की वजह से अब जनवरी माह के अंतिम सप्ताह या फरवरी के प्रथम सप्ताह में ही जायेंगे क्योंकि अनुमति नहीं मिली थी.
उन्होंने बताया कि बांग्लादेश में पांच गुरुद्वारे हैं, जहां संगत की आवाजाही होती है. इनमें ढाका में दो, चितागांग में दो व मैमन सिंह में एक गुरुद्वारा है, जबकि 1971 के युद्ध के दरम्यान वहां पर नौ गुरुद्वाराें होने के नष्ट होने का प्रमाण मिले हैं. इसके अलावा भी कई गुरुद्वारे थे, जो नष्ट हो गये. इनकी स्थिति को भी जानने की चेष्टा करेंगे.
रिसर्चर ने बताया कि ऐतिहासिक संगत गुरु साहिब गुरुद्वारे की जमीन पर ही ढाका विश्वविद्यालय का निर्माण कराया गया है. गुरुद्वारे की काफी जमीन थी. वहां रिसर्च के दरम्यान इस बात का भी पता लगाना है कि विश्वविद्यालय के निर्माण के लिए सरकार की ओर से ली गयी जमीन का मुआवजा मिला है कि नहीं. उन्होंने बताया कि तख्त श्री हरिमंदिर जी पटना साहिब की परंपरा व इतिहास पर वे अनुसंधान कर रहे हैं.
इसी क्रम में यह दायित्व प्रबंधक कमेटी की ओर से मिला है. महासचिव सरदार महेंद्र सिंह ढिल्लन ने बताया कि अनुंसधान की रिपोर्ट के बाद बांग्लादेश के गुरुद्वारों में संगत के आने-जाने की व्यवस्था व कॉरिडोर का निर्माण हो, इसके लिए वे केंद्र सरकार से बात करेंगे.
एक हजार उदासी डेरे हैं
प्रोफेसर डॉ परमवीर सिंह ने बताया कि पटना साहिब में सिर्फ श्री गुरु गोबिंद सिंह जी महाराज का जन्मस्थान ही नहीं बल्कि, तीन गुरुओं की चरण धूल पड़ी है. बिहार में एक हजार उदासी डेरे हैं, जिन पर ड्रॉक्यूमेंटरी भी बनी है. उदासी डेरो में लालगंज, समस्तीपुर व ताजपुर के साथ बिहारशरीफ में दो, राजगीर, खगौल व शहरामपुर समेत अन्य जगहों पर भी गुरुद्वारे हैं.
पटना साहिब में गुरु नानक देव जी महाराज व गुरु तेग बहादुर जी महाराज भी आ चुके हैं, जबकि गुरु गोबिंद सिंह जी महाराज का तो जन्म स्थान ही है.
अनुसंधान की रिपोर्ट के बाद करेंगे विकास
अनुसंधान की रिपोर्ट के आधार पर वहां के गुरुद्वारों के विकास के लिए कार्य कराया जायेगा, ताकि संगत सहज तरीके से आ जा सके.
सरदार महेंद्र पाल सिंह ढिल्लन महासचिव , प्रबंधक कमेटी
गुरु महाराज की मेहर से मिला काम
बांग्लादेश में स्थित गुरुद्वारों की स्थिति का आकलन करना सौभाग्य की बात है, गुरु महाराज की मेहर से उनको यह दायित्व सौंपा गया है.
डॉ परमवीर सिंह, प्रोफेसर व रिसर्चर, पंजाब विश्वविद्यालय, पटियाला
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