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Home विशेष उल्लेख विविधता और पहचान का संरक्षक है हमारा संविधान

विविधता और पहचान का संरक्षक है हमारा संविधान

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विविधता और पहचान का संरक्षक है हमारा संविधान

भारतीय संविधान में दुनिया के कई देशों के संविधान के महत्वपूर्ण हिस्सों को शामिल किया गया है. यही वजह है कि भावना और तथ्यों के मामले में भारतीय संविधान अनोखा है. संविधान के प्रारूप समिति के अध्यक्ष डॉ आंबेडकर ने कहा है कि संविधान को विधिवत लागू करने से ही इसका महत्व है, अन्यथा यह केवल एक दस्तावेज ही है.

संविधान अच्छा हो सकता है, लेकिन अगर इसे लागू करनेवाले बुरे होंगे, तो यह बुरा ही होगा. और अगर लोग अच्छे होंगे, तो बुरा संविधान भी अच्छा हो सकता है. देश की विविधता और पहचान का संरक्षक भारतीय संविधान के बारे में प्रस्तुत है महत्वपूर्ण तथ्य…
संविधान सभा द्वारा 26 नवंबर, 1949 को भारतीय संविधान पारित किया गया. संविधान सभा के लगभग तीन साल के प्रयासों के बाद संविधान बनकर तैयार हुआ. संविधान सभा की बहस को मुख्य रूप से चार हिस्सों में बांटा जा सकता है…
संविधान सभा की बहस से जुड़े अहम तथ्य
बहस स्तर तिथि मुद्दे
प्राथमिक स्तर 9 दिसंबर, 1946 से 27 जनवरी, 1948 समितियां जैसे-संघीय शक्ति समिति, मूल अधिकार एवं अल्पसंख्यक समिति, प्रारूप समिति का गठन.
प्रथम वाचन 4 नवंबर, 1948 से 9 नवंबर, 1948 प्रारूप समिति ने फरवरी, 1948 में भारतीय संविधान
प्रारूप प्रकाशित किया, जिसे नवंबर,1948 में प्रस्तुत किया गया.
द्वितीय वाचन 15 नवंबर, 1948 से 17 अक्तूबर, 1949 सभा में मसौदे पर बिंदुवार चर्चा आयोजित की गयी.
तृतीय वाचन 14 नवंबर, 1949 से 26 नवंबर, 1949 सभा ने तीसरा वाचन संपन्न किया और 26 नवंबर,1949 को संविधान लागू किया गया.
मूल अधिकारों पर सर्वाधिक बहस
नवंबर, 1948 से अक्तूबर, 1949 के बीच संविधान मसौदे पर बिंदुवार चर्चा की गयी. इस दौरान कुल 101 बैठकें आयोजित की गयीं.
मसौदे के भाग-3 में शामिल मूल अधिकारों पर सबसे अधिक 16 दिन बहस हुई. खंडवार चर्चा का 14 प्रतिशत हिस्सा मूल अधिकारों को समर्पित था.
मसौदे के चौथे भाग में शामिल राज्य नीति के निदेशक सिद्धांतों पर छह दिन चर्चा की गयी.
भाग-दो में शामिल किये गये नागरिकता प्रावधानों पर तीन दिन
बहस हुई.
संविधान सभा में महिला सदस्य
संविधान सभा में 15 महिला सदस्य शामिल रहीं, जिसमें 10 सदस्यों ने बहस में भागीदारी की.महिला सदस्यों में जी दुर्गाबाई, बेगम एजाज रसूल, रेणुका रे, पूर्णिमा बनर्जी, दक्षयानी वेलायुधान, एनी मैकेरनी, सरोजिनी नायडू, हंसा मेहता, विजयालक्ष्मी पंडित, अम्मू स्वामीनाथन शामिल थीं.बहस में सबसे अधिक भागीदारी जी दुर्गाबाई की रही. उन्होंने बहस के दौरान न्यायिक मामलों पर अपने विचार रखे.अम्मू स्वामीनाथन, बेगम एजाज रसूल और दक्षयानी वेलायुधान ने मूल अधिकारों से जुड़ी चर्चा में भाग लिया. हंसा मेहता और रेणुका रे ने भारत में महिलाओं से जुड़े न्याय के मुद्दों पर अपने विचार प्रस्तुत किये.
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