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संकल्प करें ‘चाहे कुछ भी हो जाए कोई मेरी खुशी नहीं छीन सकता”

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संकल्प करें ‘चाहे कुछ भी हो जाए कोई मेरी खुशी नहीं छीन सकता”
श्री श्री रवि शंकर
आध्यात्मिक गुरु व आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक
विश्व के सभी शास्त्रों में परमानंद का वर्णन है, क्योंकि वे जानते हैं कि प्रत्येक मनुष्य की सबसे बड़ी इच्छा आनंद है. आनंद का संबंध इससे नहीं है कि हमारे पास क्या है और क्या नहीं है, वरन इसका संबंध हमारे मन की स्थिति से है. आनंद कोई ऐसी वस्तु नहीं है, जिसको आप खरीद कर ला सकें. वह अभी के अभी, यहीं के यहीं, आपके पास उपलब्ध है. जिस चीज को हम इधर-उधर ढूंढ रहे हैं, वह बिलकुल यहीं आपके अंदर है.
जीवन में किसी-न-किसी बात की परेशानी हमेशा बनी रहती है. इसलिए इसको माया कहते हैं. जब कोई बहुत प्यार करता है, तो वह एक परेशानी बन जाती है, अगर कोई प्यार नहीं करे, तो भी उससे परेशानी हो जाती है. हम दुश्मनों से भी परेशान हैं, तो मित्रों से भी परेशान हैं. इसलिए यह दृढ़ संकल्प रखना चाहिए कि, ‘चाहे कुछ भी हो जाये, मैं अपना आनंद नहीं गंवाऊंगा.’
चाहे व्यवसाय में नुकसान हो, संबंधों में गड़बड़ी हो या जीवन के किसी अन्य क्षेत्र में नुकसान हो, पर अपना आनंद नहीं गंवाना. देखें कि अपने जीवनकाल में आपने कितने संघर्षों को पार किया है. वे सभी पल जा चुके हैं. अनेकों समस्याएं आयीं और गुजर गयीं, पर आपने अपने मन में आज तक उनको ढो कर रखा है. उन बातों को मन से निकाल कर फेंक दीजिए, तब आप देखेंगे कि आप कितने हलके और शांत हो गये.
अंतर्मन में है तो सिर्फ और सिर्फ परम आनंद : यह सोच ही बेकार है कि आपके अंतर्मन में डर ने घर किया हुआ है जबकि ऐसा कुछ है नहीं.
आपके शरीर की भीतरी गहराइयों में डर, वासना, जलन, गुस्सा और शर्म जैसी नकारात्मक चीजों के लिए जगह ही नहीं है. अंतर्मन में है तो सिर्फ और सिर्फ परम आनंद, जिसका अनुभव किया जाना बहुत जरूरी है. ये सब समस्याएं सतही हैं. और अगर आप इसे गहराई मानते हैं, तो मेरी सलाह है कि थोड़ा और गहराई में उतरें. वहां आपको खुशियों और आनंद का सागर मिलेगा.
जब मन इन झूठी बातों को सच मानने लगता है, तो इन भावनाओं से पार पाना मुश्किल हो जाता है. समस्याएं यहीं से शुरू होती हैं, जब हम यह मान लेते हैं कि यही सच्चाई है कि हमारे भीतरी मन में डर, दुख और दुविधा भर गयी है. फिर ये समस्याएं स्थायी हो जाती हैं, जिनसे पीछा छुड़ाना मुश्किल हो जाता है. डर पर जीत पाने के लिए मेडिटेशन या ध्यान सर्वश्रेष्ठ उपाय है, जिससे धीरे-धीरे चित्त शांत हो जाता है. सबसे बड़ी बात कि अगर खुद पर विश्वास करोगे तो डर को भी आपके पास आने में भय लगेगा.
याद रखें, आप स्वयं ही अपने आनंद के लिए जिम्मेदार हैं. अंतर्मुखी होकर खुशी के स्रोत तक पहुंचो, जहां से आनंद की लहर उठती है.
सूत्र-1. दुनिया के उस हिस्से को देखें जहां ज्यादा बड़ी समस्याएं हैं, जब आप उन बड़ी-बड़ी समस्यायों को देखेंगे, तो आपको अपनी समस्या बहुत छोटी लगेगी. और जैसे ही समस्या छोटी लगेगी, उसको हल करने या सामना करने का आत्मविश्वास और ऊर्जा से आप भर जायेंगे. उन लोगों की सेवा करिए, जो आपसे ज्यादा जरूरतमंद हैं.
सूत्र-2. अपने जीवन को देखिए, आप पर भी अतीत में बहुत-सी समस्याएं आयीं थीं, जो आज नहीं हैं. वे आयीं और चली गयीं. यह भी चली जायेगी. आप में उसको जीतने की ताकत और ऊर्जा है. इस बात को समझने से और अपने अतीत पर विचार करने से आत्मविश्वास आ जायेगा.
सूत्र-3. सबसे महत्वपूर्ण है कुछ प्राणायाम करना, व्यायाम करना, ध्यान करना और विश्राम करना.
सूत्र-4. समस्या आने पर हम क्रोधित होकर कहते हैं- ‘मैं हारा’ पर अब बिना गुस्से और कुंठा के बोलिए- ‘इस समस्या को मैं हल नहीं कर सकता, भगवान आप मेरी मदद करिए.’ भगवान ने हमेशा आप की मदद की है और वह आगे भी करेगा, ऐसा विश्वास रखिए. ब्रह्मांड की शक्ति आपकी सहायता करेगी.
सूत्र-5. हम समस्याओं के समाधान के लिए हमेशा दूसरों को पुकारते हैं, परंतु यह बात भूल जाते हैं यदि अपने मन को अंतर्मुख करेंगे, तो उसका समाधान या युक्ति हमें अपने में ही मिल जायेगी.
जब सब कुछ जैसा आप चाहते हैं, सब कुछ वैसा ही हो रहा है तब आनंदित होना कोई बड़ी बात नहीं है, परंतु अपने अंदर के वीर रस को जगा करके अगर आप ऐसा बोलें- ‘कुछ भी हो जाये, मेरी मुस्कराहट नहीं जायेगी’. दृढ़ संकल्प करें कि ‘चाहे कुछ भी हो जाये कोई भी व्यक्ति मेरी खुशी नहीं छीन सकता है. तब आप अनोखी शक्ति और ज़बर्दस्त ऊर्जा से भर जायेंगे और समस्या आते ही गायब हो जायेगी.
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