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आपातकाल के 44 साल : जब कर्पूरी ठाकुर ने भरा था बांड

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आपातकाल के 44 साल : जब कर्पूरी ठाकुर ने भरा था बांड
आपातकाल के दौरान कर्पूरी ठाकुर को नेपाल में अपने प्रवास के दौरान एक बांड भरना पड़ा था. कर्पूरी ठाकुर की नेपाल की कहानियां चर्चित रही हैं, लेकिन खुफिया फाइलों से ताजा रहस्योदघाटन हुआ है कि माओवादियों से मिलने के कारण उन्हें पांच सूत्री बांड भरना पड़ा था. बिहार इंटेलिजेंस की रिपोर्ट के अनुसार कर्पूरी ठाकुर ने चीन समर्थित कम्युनिस्टों से 8 अगस्त और 14 अगस्त 1975 को संपर्क किया था.
हालांकि इस बात का उल्लेख भी रिपोर्ट में है कि झापा और बहादुरपुर के नेपाली माओवादी कार्यकर्ता उनसे मिल पाये या नहीं,यह जानकारी नहीं है. कर्पूरी ठाकुर 15 अगस्त को काठमांडू से झापा और बहादुरपुर होते हुए राजबिराज पहुंचे. उनका उद्देश्य अपने साथियों के साथ गुजरात जाना था. श्री ठाकुर जैसे ही राजबिराज पहुंचे सप्तरी अंचल के अंचलाधिकारी को काठमांडू से वायरलेस संदेश मिला. अगली सुबह 16 अगस्त को अंचाधिकारी पांच सूत्री बांड ( जिसे रिपोर्ट में समझौता पत्र कहा गया है) लेकर कर्पूरीठाकुर के पास गये.
श्री ठाकुर ने कुछ देर तक सोचने के बाद उस पर हस्ताक्षर कर दिया. बांड का पहला सूत्र था कि वह स्थानीय राजनीति में दिलचस्पी नहीं लेंगे. (2) भारत के खिलाफ कोई कार्य नहीं करेंगे. (3) बिना इजाजत वे कहीं बाहर नहीं जायेगे. ( 4) वे नेपाल और भारत के बेहतर संबंधों के बीच कोई हस्तक्षेप नहीं करेंगे. (5) वे इजाजत लेकर भारत जाएंगे. रिपोर्ट के अनुसार कर्पूरी ठाकुर को 17 अगस्त 1975 को नेपाली पुलिस स्कॉर्ट केसाथ बिराटनगर के अंचलाधिकारी ने उन्हें जहाज से काठमांडू रवाना किया.
स्रोत : बिहार इंटेलिजेंस की यह गोपनीय रिपोर्ट 23 जुलाई, 1975 की है. इस रिपोर्ट का मेमो नंबर- ए 7265(29)/ 3(एन) 75 है.
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