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Home विशेष उल्लेख मिडिल क्लास को लाभ, राजनीतिक रूप से स्मार्ट बजट है

मिडिल क्लास को लाभ, राजनीतिक रूप से स्मार्ट बजट है

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मिडिल क्लास को लाभ, राजनीतिक रूप से स्मार्ट बजट है

गुरचरण दास

कॉरपोरेट एक्सपर्ट
राजनीतिक रूप से यह बहुत अच्छा व स्मार्ट बजट है, लेकिन कहीं से भी यह बजट लोकलुभावन नहीं है. आम तौर पर सरकारें बजट के माध्यम से प्रचार करती हैं कि हमने ये दिया-वो दिया, लेकिन यह बजट ऐसा नहीं है. इसमें सरकार की राजकोषीय नजरिये से जिम्मेदारी दिखायी देती है. इस वित्त वर्ष (2019) राजकोषीय घाटा जीडीपी का 3.4 ही रहनेवाला है. पिछले बजट में यह आंकड़ा 3.3 प्रतिशत का था. यानी मात्र 0.1 प्रतिशत ही वित्तीय घाटे में बढ़ोतरी दर्ज की जायेगी.
चुनावी बजट होने के लिहाज से भी यह आंकड़ा महत्वपूर्ण है और इसीलिए समझदार बजट कहा जायेगा. बजट प्रस्तुत होने के बाद अर्थशास्त्री आम तौर पर इन पहलुओं पर नजर रखते हैं कि सरकार ने जो बड़े-बड़े वादे जनता से किये हैं, उनकी पूर्ति के लिए पैसा कहां से आयेगा. ऐसा बजट बहुत गैरजिम्मेदार माना जाता है. लेकिन इस बार ऐसा नहीं है और बजट में सारे आर्थिक पक्षों का खयाल किया गया है.
मुख्यतः तीन बातें हैं, जिनका यहां उल्लेख करना जरूरी है. पहली तो यह कि इस बजट से मिडिल क्लास को बड़ी राहत मिलने जा रही है. ढाई लाख से बढ़ाकर, अब पांच लाख तक के वेतन पानेवाले लोगों को इनकम टैक्स की छूट रहेगी. अगर वह व्यक्ति सरकारी मदों में निवेश करता है, तो उसकी 6.5 लाख तक की कमाई भी इनकम टैक्स के अंतर्गत नहीं आयेगी. अभी तक ज्यादा असंतोष मिडिल क्लास में दिख रहा था. इस कदम ने मिडिल क्लास का दिल जीत लिया है और छोटे व्यापारियों को भी इससे राहत मिलेगी.
दूसरी बात है कि पहली बार किसी केंद्र सरकार ने असंगठित क्षेत्रों, दुकानों, खेतों, दूसरों के घरों जैसे अनौपचारिक क्षेत्रों, छोटी-छोटी जगहों पर काम करनेवाले मजदूर, जो 15 हजार रुपये महीने से कम कमाते हैं, उनके लिए पेंशन स्कीम शुरू की है. देश के लगभग 90 प्रतिशत मजदूर असंगठित क्षेत्रों में काम करते हैं. पेंशन स्कीम से इन्हें बहुत फायदा होगा. इन मजदूरों को 100 रुपया महीना जमा करते रहना होगा और जब उनकी उम्र 60 वर्ष की हो जायेगी, तो उन्हें 3,000 रुपये महीना मिलना शुरू जायेगा.
तीसरी प्रमुख बात यह है कि दो हेक्टेयर से कम जमीनों के मालिक छोटे किसानों को साल में 6000 रुपये सीधे कैश ट्रांसफर से प्रदान किये जायेंगे. देखा जाये, तो यह राशि बहुत कम हैं, लेकिन यह इसे एक शुरुआत माननी चाहिए. इससे पहले ऐसे कदम नहीं उठाये गये थे. हालांकि, इस पर 75 हजार करोड़ का खर्च आयेगा और इसके लिए अन्य अनावश्यक कृषि संबंधी सब्सिडियों को बंद करके खर्च जुटाया जा सकता है. कुल मिलाकर, यह बजट पॉलिटिकली स्मार्ट है, बड़ी जिम्मेदारी से पेश किया गया है और लोकलुभावन नहीं है.
(बातचीत : देवेश)
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