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Home विशेष उल्लेख यही है वह गुजरात का भुज, जिसे भूकंप ने कर दिया था तबाह, आज है जिंदादिल शहर

यही है वह गुजरात का भुज, जिसे भूकंप ने कर दिया था तबाह, आज है जिंदादिल शहर

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यही है वह गुजरात का भुज, जिसे भूकंप ने कर दिया था तबाह, आज है जिंदादिल शहर
तेज भूकंप के बाद बहुत जल्द संभल गया गुजरात का भुज शहर
भुज से लौट कर राजेश कुमार
26 जनवरी 2001 का दिन. इतिहास के पन्नों में दर्ज ये वो तारीख है जिसे शायद ही लोग भूल सकेंगे. हम बात कर रहे हैं गुजरात राज्य के भुज शहर की. यूं तो यहां पर 80 से अधिक बार भूकंप आ चुका है. लेकिन करीब 18 साल पहले 26 जनवरी को जितना तेज भूकंप आया था, उसे याद कर आज भी रोंगटे खड़े हो जाते हैं.
भूकंप की तीव्रता लगभग 6.9 थी. हर तरफ बर्बादी का मंजर था. भयावहता इतनी अधिक थी कि कई-कई घरों में कोई भी नहीं बचा था, तो कई घरों में एक-दो सदस्य ही बच गये थे. सबकुछ खत्म हो चुका था़ इतना सबकुछ होने के बाद भी इस शहर के बाशिंदों की जिंदादिली है कि खुद को संभालने के साथ-साथ इस शहर को न सिर्फ जीने के लायक बनाया बल्कि पहले से और भी ज्यादा खूबसूरत बनाया.
बहुत जल्दी कई सेवाएं शुरू की गयीं
भूकंप के दौरान कई-कई घर, अस्पताल, सरकारी कार्यालय पूरी तरह जमींदोज हो गये थे. हालांकि इन सबके बीच लगभग एक सप्ताह के भीतर धीरे-धीरे मोबाइल सेवाएं शुरू कर दी गयीं. 10 दिनों के भीतर कई प्रभावित इलाकों में बिजली की सप्लाइ शुरू कर दी गयी.
स्थानीय लोगों के अनुसार, भूकंप के बाद लोगों के रहने के लिए सरकार, एनजीओ व कई जगहों से मदद मिलनी शुरू हो गयी. इससे काफी राहत मिली. टेंट में लोग रहते थे. इलाज के साथ-साथ हर सुविधाएं मिलती थी. धीरे-धीरे कम समय में शहर ने खुद को तैयार कर लिया. आज जीवंत मिसाल का शहर है भुज.
अब नजर नहीं आती हैं बहुमंजिली इमारतें
भूकंप के बाद बड़ा बदलाव यह आया कि अब इस शहर में बहुमंजिली इमारतें नजर नहीं आती हैं. मन में आज भी इतना डर है कि इक्का-दुक्का बहुमंजिली इमारतों में डर से लोग रहना नहीं चाहते हैं.
अजय पाल कहते हैं कि जयनगर चौक पर एक बहुमंजिली इमारत है, जिसका ऊपरी तल्ला पूरी तरह से खाली है. लोग चाह कर भी उसमें रहने के लिए हिम्मत नहीं जुटा पाते हैं. हां, चौड़ी सड़कें जरूर दिखेंगी. साफ-सफाई दिखेगी. और सबसे बड़ी बात एक-दूसरे को मदद करने की चाहत आज भी बरकरार है.
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