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Home विशेष उल्लेख कार्तिक पूर्णिमा पर स्नान-दान से बनेंगे पुण्य के भागी

कार्तिक पूर्णिमा पर स्नान-दान से बनेंगे पुण्य के भागी

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कार्तिक पूर्णिमा पर स्नान-दान से बनेंगे पुण्य के भागी
व र्ष में कुल 15 पूर्णिमा होती है, जिनमें कार्तिक महीने की पूर्णिमा का सबसे अधिक महत्व है. माना जाता है कि इस दिन गंगा, यमुना, गोदावरी, कृष्ण, नर्मदा आदि पवित्र नदियों में स्नान करके जप, तप, ध्यान योग और दान करने से अन्य तिथियों में किये गये दान-पुण्य से अधिक फल प्राप्त होता होता है.
पुराणों में इस दिन स्नान, व्रत व तप की दृष्टि से मोक्ष प्रदान करने वाला बताया गया है. पंचांग के अनुसार साल का आठवां महीना कार्तिक होता है और कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा कार्तिक पूर्णिमा कहलाती है, जो इस बार 23 नवंबर, शुक्रवार को है.
धार्मिक मान्यता है कि इस दिन गंगा स्नान करने से उतना फल प्राप्त होता है, जितना पूरे साल गंगा स्नान से प्राप्त होता है. गंगा स्नान के बाद जरूरतमंदों को मौसमी फल, उड़द की काली दाल, चावल आदि दान करना शुभ है. साथ ही चंद्रमा अर्घ्य भी देना चाहिए. धर्म ग्रंथों के अनुसार, कार्तिक पूर्णिमा की तिथि पर ही भगवान शिव ने राक्षस त्रिपुरासुर का वध किया था. इसलिए यह तिथि को त्रिपुरी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है. इस दिन चंद्रोदय के समय भगवान शिव और कृतिकाओं की पूजा करने से भोलेनाथ प्रसन्न होते हैं.
इसका महत्व सिर्फ वैष्णव भक्तों के लिए ही नहीं, शैव भक्तों और सिख धर्म के लिए भी बहुत ज्यादा है. विष्णु के भक्तों के लिए यह दिन इसलिए खास है, क्योंकि माना जाता है कि भगवान विष्णु का पहला अवतार इसी दिन हुआ था. प्रथमावतार में भगवान विष्णु मत्स्य यानी मछली के रूप में थे.
वहीं सिख धर्म में कार्तिक पूर्णिमा के दिन को प्रकाशोत्सव के रूप में मनाया जाता है, क्योंकि इसी दिन सिख संप्रदाय के संस्थापक गुरु नानक देव जी का जन्म हुआ था. इस दिन सिख संप्रदाय के अनुयायी सुबह स्नान कर गुरुद्वारों में जाकर गुरुवाणी सुनते हैं और नानक जी के बताये रास्ते पर चलने का संकल्प लेते हैं. इसे गुरु पर्व भी कहा जाता है. इस दिन कृतिका में शिव शंकर के दर्शन करने से व्यक्ति ज्ञानी और धनवान होता है.
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