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Home विशेष उल्लेख शत-शत नमन : वे ‘अटल’ भी थे और ‘बिहारी’ भी

शत-शत नमन : वे ‘अटल’ भी थे और ‘बिहारी’ भी

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शत-शत नमन : वे ‘अटल’ भी थे और ‘बिहारी’ भी

रविशंकर उपाध्याय

पटना : बिहारी वाजपेयी के निधन से पूरा देश शोक में है लेकिन बिहार उनके निधन से ज्यादा दुखी इस वजह से है क्योंकि उनके नाम का सरनेम ही ‘बिहारी’ था. वे एक ऐसे ‘बिहारी’ थे जिन्होंने हर जगह अपने आप को ‘बिहारी’ बताया. वे जब बिहार आते थे तब तो कहते ही थे कि मैं ‘अटल’ भी हूं और ‘बिहारी’ भी हूं. उनसे जब भी बिहारी टाइटल होने पर पूछा जाता था कि आप अपने नाम के पीछे बिहारी क्यों लगाते हैं तो उनका बड़ा दिलचस्प जवाब होता था कि मैं अटल भी हूं और बिहारी भी हूं. उस वक्त जब बिहार पूरे देश में अव्यवस्था का पर्याय था तब भी उन्होंने अपने आप को बिहारी होने से इन्कार नहीं किया.

एक बार उनसे वरिष्ठ पत्रकार रजत शर्मा ने एक सवाल के जरिये नाम में बिहारी का मतलब पूछा था. रजत शर्मा का सवाल था कि अटल जी, आपके नाम में विरोधाभास है. जो अटल है वह बिहारी कैसे हो सकता है? इसके जवाब में अटल बिहारी वाजपेयी ने मुस्कुराते हुए कहा था कि मैं अटल भी हूं और बिहारी भी हूं. जहां अटल होने की आवश्यकता है वहां अटल हूं और जहां बिहारी होने की जरूरत है वहां बिहारी भी हूं. मुझे दोनों में कोई अंतर्विरोध दिखाई नहीं देता. उनका यह जवाब रजत शर्मा को चारो खाने चित्त करने के लिए काफी था. यही नहीं एक बार जब संसद में कहा गया था कि इस विषय पर केवल बिहारी सांसद बोलेंगे तो अटल जी ने खड़े होकर कहा था कि सभापति महोदय मैं बिहारी भी हूं, मैं भी इस विषय पर बोलूंगा. पूरा संसद उनकी बात पर ताली बजाने लगा था. अटल बिहारी राजनीतिक कार्यक्रमों में जब बिहार आते थे तो कहते थे कि हम बिहारी भी हैं क्याेंकि हम अटल बिहारी हैं. वो जब भी बिहार आते थे तो किसी होटल में नहीं बल्कि किसी कार्यकर्ता के घर ही रहते थे. बिहार के नेताओं को वे विनोदपूर्वक कहते थे कि तुम बिहारी हो तो हम अटल बिहारी हैं.

बिहारी स्वाद के खास मुरीद थे अटल : बात जब अटल बिहारी वाजपेयी के बिहार कनेक्शन की होती है तो इसमें खानपान का भी जिक्र होता है. शाकाहार और सादा भोजन के शौकीन अटल जी को बिहार के दो डिश खासे पसंद थे. ये दो डिश थे- लिट्टी-चोखा और बक्सर का पापड़ी था.

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