बीएसएफ को सीमा पर फेंसिंग के लिए 31 मार्च तक दें जमीन

हाइकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सुजय पॉल और न्यायाधीश पार्थ सारथी सेन की डिविजन बेंच ने राज्य सरकार के लिए समय-सीमा तय करते हुए कहा कि राज्य सरकार को 31 मार्च तक भारत-बांग्लादेश सीमा पर नौ जिलों में कांटेदार तार लगाने के लिए बीएसएफ को जमीन आवंटित करना होगा.

By BIJAY KUMAR | January 27, 2026 10:49 PM

कोलकाता

. कलकत्ता हाइकोर्ट ने राज्य के सीमावर्ती क्षेत्रों में कांटेदार तार की फेंसिंग लगाने काे लेकर महत्वपूर्ण आदेश दिया है. मंगलवार को हाइकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सुजय पॉल और न्यायाधीश पार्थ सारथी सेन की डिविजन बेंच ने राज्य सरकार के लिए समय-सीमा तय करते हुए कहा कि राज्य सरकार को 31 मार्च तक भारत-बांग्लादेश सीमा पर नौ जिलों में कांटेदार तार लगाने के लिए बीएसएफ को जमीन आवंटित करना होगा. बताया गया है कि केंद्र ने इस जमीन के अधिग्रहण के लिए फंड पहले ही आवंटित कर दिया है और अधिग्रहण की प्रक्रिया भी लगभग पूरी हो गयी है. लेकिन राज्य ने बीएसएफ को अब तक जमीन का हस्तांतरण नहीं किया है. अदालत ने यह भी साफ किया कि इस मामले में एसआइआर प्रक्रिया का बहाना बना कर टालमटोल नहीं किया जा सकता. राज्य सरकार को 31 मार्च तक हर हाल में जमीन हस्तांतरित करनी होगी. इसके अलावा, अदालत ने कहा कि वह केंद्र और राज्य के उन जमीनों के अधिग्रहण के मुद्दे पर भी सुनवाई करेगा, जिन्हें अभी तक राज्य कैबिनेट की मंजूरी नहीं मिली है. सभी पक्षों को इस बारे में हलफनामा पेश करने का आदेश दिया गया है. मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि जमीन अधिग्रहण एक्ट के सेक्शन 40 के तहत राज्य सरकार जमीन अधिग्रहण क्यों नहीं कर रही है, यह राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला है. जस्टिस पार्थ सारथी सेन ने कहा कि हमें हैरानी है कि जो राज्य अंतरराष्ट्रीय सीमा पर स्थित हैं, वे राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर स्वयं पहल नहीं कर रहे हैं. केंद्र सरकार ने करीब 180 किमी क्षेत्र में फेंसिंग लगाने के लिए जमीन अधिग्रहण के लिए फंड प्रदान किया है. इस मामले की अगली सुनवाई दो अप्रैल को होगी.

क्या है मामला

गौरतलब है कि पूर्व सैन्य अधिकारी डॉ सुब्रत साहा ने भारत-बांग्लादेश सीमा पर कांटेदार तार की बाड़ लगाने में राज्य की लापरवाही को लेकर एक जनहित याचिका दायर की थी. इसी मामले की सुनवाई करते हुए हाइकोर्ट ने यह फैसला सुनाया.