अभिषेक के हाथों तृणमूल में शामिल हुए प्रतीक-उर, सड़क पर हुआ कार्यक्रम

तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव व डायमंड हार्बर के सांसद अभिषेक बनर्जी के हाथों शनिवार को प्रतीक-उर-रहमान ने तृणमूल कांग्रेस का झंडा थाम लिया. विगत लोकसभा चुनाव में उन्होंने डायमंड हार्बर सीट से श्री बनर्जी के खिलाफ माकपा उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था.

By BIJAY KUMAR | February 21, 2026 10:19 PM

कोलकाता.

तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव व डायमंड हार्बर के सांसद अभिषेक बनर्जी के हाथों शनिवार को प्रतीक-उर-रहमान ने तृणमूल कांग्रेस का झंडा थाम लिया. विगत लोकसभा चुनाव में उन्होंने डायमंड हार्बर सीट से श्री बनर्जी के खिलाफ माकपा उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था. शनिवार को को आमतला में डायमंड हार्बर सांसद कार्यालय के सामने सड़क पर औपचारिक रूप से वह तृणमूल में शामिल हुए. अभिषेक बनर्जी ने स्पष्ट किया कि रहमान ने चुनाव लड़ने के लिए टिकट की मांग नहीं की है, बल्कि संगठनात्मक काम करने की इच्छा जतायी है. अभिषेक बनर्जी के साथ रहमान की तस्वीर सामने आने के कुछ ही समय बाद माकपा ने उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया. इससे पहले सड़क पर खड़े होकर संभवत: किसी नेता के तृणमूल में शामिल होने की मिसाल नहीं थी. इस पर श्री बनर्जी ने तंज कसते हुए कहा कि रहमान ने माकपा को भी सड़क पर उतरने का रास्ता दिखाया है. घटनाक्रम के दौरान आमतला स्थित कार्यालय में अभिषेक की पार्टी नेताओं के साथ आंतरिक बैठक चल रही थी. शाम करीब चार बजे रहमान वहां पहुंचे. इसके तुरंत बाद माकपा ने उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया.अभिषेक बनर्जी ने पत्रकारों से बातचीत में आरोप लगाया कि माकपा रहमान पर तृणमूल से ‘डील’ करने का आरोप लगा रही है, जबकि उन्होंने स्वयं कहा है कि यदि टिकट भी दिया जाये, तो वह नहीं लेंगे. श्री बनर्जी ने कहा कि माकपा अपने ही कार्यकर्ता को नहीं पहचान सकी और उसे पहले ही ‘गद्दार’ घोषित कर दिया. उन्होंने माकपा नेतृत्व, विशेषकर पार्टी के प्रदेश सचिव सलीम पर निशाना साधते हुए कहा कि असहमति बर्दाश्त न करने की प्रवृत्ति पार्टी में बढ़ी है. एसआइआर मुद्दे, केरल में माकपा की भूमिका, कांग्रेस के साथ विभिन्न राज्यों में अलग-अलग रुख और लक्खी भंडार योजना पर की गयी टिप्पणियों को लेकर भी सवाल उठाये.

उधर, रहमान ने हाल ही में माकपा की राज्य कमेटी, जिला कमेटी और प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफे का पत्र दिया था. पार्टी के भीतर उन्हें बनाये रखने की कोशिशें भी हुईं और वरिष्ठ नेता बिमान बसु ने संपर्क किया था, लेकिन अंततः निष्कासन का फैसला लिया गया.