निजी जमीन पर बना दिया रोड, रैयत ने खड़ी कर दी बीच सड़क में दीवार

लोहरदगा सदर प्रखंड के बसार टोली में निजी स्वार्थ और कॉर्पोरेट दबाव के बीच एक आदिवासी महिला सीमा भगत को अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़ा.

By VIKASH NATH | February 21, 2026 7:12 PM

गोपी कुंवर

लोहरदगा. लोहरदगा सदर प्रखंड के बसार टोली में निजी स्वार्थ और कॉर्पोरेट दबाव के बीच एक आदिवासी महिला सीमा भगत को अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़ा. हिंडाल्को से जुड़े कुछ दलालों ने उसकी निजी जमीन पर बिना अनुमति और बिना मुआवजा दिये रातों-रात सड़क का निर्माण कर दिया. जमीन मालिक को न तो इसकी सूचना दी गयी और न ही किसी प्रकार का प्रतिफल दिया गया.

सड़क बनने के बाद हेसल बॉक्साइट साइडिंग से दर्जनों हाइवा ट्रक दिन-रात बॉक्साइट ढोने लगे. यह मार्ग बसारडीह अस्पताल और लगभग एक दर्जन गांवों को जोड़ता है, जिससे ग्रामीणों की आवाजाही भी इसी रास्ते पर निर्भर हो गयी, लेकिन जब सीमा भगत को न्याय नहीं मिला, तो उसने बीच सड़क पर दीवार खड़ी कर दी और रास्ता बंद कर दिया. इसके बाद कंपनी के दलालों ने उसे मनाने और बहलाने की कोशिश की, लेकिन महिला अपने अधिकारों पर अडिग रही. उसका कहना था कि या तो जमीन के बदले जमीन दी जाए या फिर उचित मुआवजा दिया जाये.

न्याय कीजिये, या तो मुआवजा दीजिये या जमीन के बदले जमीन दीजिये

सदर अंचल अधिकारी मौके पर पहुंचे और समझाने का प्रयास किया, लेकिन सीमा भगत ने साफ कहा कि न्याय कीजिए—या तो मुआवजा दीजिए या जमीन के बदले जमीन दीजिए. अधिकारी बैरंग लौट गये. दीवार खड़ी होने के बाद बॉक्साइट की ढुलाई और बड़े वाहनों का परिचालन बंद हो गया, जिससे कंपनी को नुकसान हुआ और ग्रामीणों को अस्पताल जाने में कठिनाई का सामना करना पड़ा.

यह क्षेत्र की पहली घटना है

ग्रामीणों का आरोप है कि एक व्यक्ति ने महिला को अंधेरे में रखकर सड़क बनवा दी और खुद कंपनी से ट्रांसपोर्टिंग का काम लेने लगा. जब महिला न्याय के लिए भटक रही थी, तो सबने उसे दुत्कार दिया. यह क्षेत्र की पहली घटना है जब किसी की निजी जमीन पर बिना अनुमति सड़क बनायी गयी और उसकी भरपाई नहीं की गयी.

बिना मुआवजा दिये सड़क बनाना पूरी तरह गैर-कानूनी है : सांसद

इस मामले पर सांसद सुखदेव भगत ने कहा कि किसी भी निजी जमीन पर बिना अनुमति और बिना मुआवजा दिये सड़क बनाना पूरी तरह गैर-कानूनी है. यह घटना न केवल भूमि अधिकारों का उल्लंघन है, बल्कि आदिवासी समुदायों के साथ होने वाले अन्याय का भी प्रतीक है.