गोपालगंज सदर अस्पताल में हर्निया-हाइड्रोसील तो छोड़िए, मोतियाबिंद तक का ऑपरेशन नहीं, मरीज निजी क्लीनिक जाने को मजबूर
Gopalganj Sadar Hospital Operation: गोपालगंज सदर अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टर और ऑपरेशन थिएटर होने के बावजूद हर्निया, हाइड्रोसील, अपेंडिक्स और मोतियाबिंद के ऑपरेशन नहीं हो रहे. डिजिटल प्रभात की पड़ताल में बड़ा खुलासा.
Gopalganj Sadar Hospital Operation: (मनीष राज) करोड़ों रुपये खर्च कर मॉडल सदर अस्पताल में आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराए जाने के बावजूद यहां मरीजों को बुनियादी सर्जिकल सेवाएं तक नहीं मिल पा रही हैं. हालात ऐसे हैं कि हर्निया, हाइड्रोसील और अपेंडिक्स जैसे सामान्य ऑपरेशन तो दूर, मोतियाबिंद का ऑपरेशन भी अस्पताल में नहीं हो रहा है. अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को इलाज के बजाय निजी नर्सिंग होम का रास्ता दिखाया जा रहा है. डिजिटल प्रभात की पड़ताल में यह चौंकाने वाली स्थिति सामने आई है.
दो सर्जन तैनात, फिर भी जून में नहीं हुआ हर्निया और अपेंडिक्स का एक भी ऑपरेशन
सदर अस्पताल में सर्जन के रूप में डॉ. रमाकांत और डॉ. शम्स तबरेज तैनात हैं. इसके बावजूद जून माह में हर्निया और अपेंडिक्स का एक भी ऑपरेशन नहीं किया गया. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार पिछले 53 दिनों में केवल तीन मरीजों का ऑपरेशन हुआ है. ऐसे में अस्पताल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं.
मई माह की स्थिति भी संतोषजनक नहीं रही. इस दौरान केवल एक हर्निया, एक अपेंडिक्स और एक सिस्ट (गांठ) के मरीज का ऑपरेशन किया गया. जबकि विशेषज्ञ डॉक्टरों को प्रतिमाह एक लाख रुपये से अधिक वेतन मिल रहा है.
मोतियाबिंद मरीजों को भी निजी क्लीनिक भेजने का आरोप
मोतियाबिंद से पीड़ित राजेश्वरी देवी इलाज के लिए सदर अस्पताल के नेत्र विभाग पहुंचीं. परिजनों के अनुसार डॉक्टर ने पहले आयुष्मान कार्ड के बारे में पूछा और फिर निजी क्लीनिक में ऑपरेशन कराने की सलाह दी. इसके बाद उन्होंने नयन सुख नेत्रालय में अपना ऑपरेशन कराया.
स्थानीय लोगों का आरोप है कि अस्पताल में डॉक्टर ऑपरेशन करने से बचते हैं और मरीजों को अपने या अन्य निजी क्लीनिकों में जाने की सलाह देते हैं. इससे गरीब मरीजों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है.
गरीबों को नहीं मिल रही सरकारी स्वास्थ्य सुविधा
पड़ताल में सामने आया कि सदर अस्पताल हाइड्रोसील जैसे सामान्य ऑपरेशन भी नियमित रूप से नहीं कर पा रहा है. जबकि यही ऑपरेशन कई डॉक्टर निजी क्लीनिकों में करते हैं. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब अस्पताल में ऑपरेशन थिएटर, उपकरण और विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध हैं तो मरीजों को सरकारी अस्पताल में उपचार क्यों नहीं मिल रहा.
ओटी और वार्ड की स्थिति भी सवालों के घेरे में
अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर में सन्नाटा पसरा मिला, जबकि ऑपरेशन के बाद मरीजों को रखने वाला वार्ड भी अव्यवस्थित दिखाई दिया. करोड़ों रुपये की लागत से विकसित मॉडल सदर अस्पताल में इस तरह की स्थिति स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोल रही है.
अस्पताल प्रबंधन ने क्या कहा
सदर अस्पताल के प्रबंधक जान मोहम्मद ने कहा, “सदर अस्पताल में उपलब्ध सभी डॉक्टर प्रशिक्षित हैं और ऑपरेशन की पूरी व्यवस्था मौजूद है. लेकिन अपेक्षित संख्या में मरीज नहीं पहुंचते. मरीजों को जागरूक करने के लिए समय-समय पर अभियान भी चलाया जाता है.”
वहीं उपाधीक्षक डॉ. शशि रंजन प्रसाद ने कहा, “अस्पताल में ऑपरेशन की सुविधा सुचारु रूप से उपलब्ध है. मरीजों की संख्या कम होने के कारण ऑपरेशन भी कम हो रहे हैं. प्रत्येक मरीज को बेहतर इलाज उपलब्ध कराना हमारी प्राथमिकता है और इस दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं.”
