जीवन में सफल होना है, तो अहंकार व इंद्रियों पर करें नियंत्रण : कथावाचक

लौगांय में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के तीसरे दिन आचार्य ओम प्रकाश जी ने श्रोताओं को कथा का श्रवण कराते हुए कहा कि मनुष्य को जीवन में सफल होने के लिए अहंकार और इंद्रियों पर नियंत्रण रखना चाहिए.

By SHUBHASH BAIDYA | March 10, 2026 9:32 PM

धोरैया. लौगांय में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के तीसरे दिन आचार्य ओम प्रकाश जी ने श्रोताओं को कथा का श्रवण कराते हुए कहा कि मनुष्य को जीवन में सफल होने के लिए अहंकार और इंद्रियों पर नियंत्रण रखना चाहिए. कथा में कंदरक और शतरूपा मनु, देवभूती की परीक्षा संस्कार के लिए की जाती है और वह पास हो जाती है. इसके बाद कंदरक और देवभूमि की शादी होती है. जिसके बाद कथा वाचक द्वारा कथा को आगे बढ़ाते हुए कहा कि स्त्रियों को हमेशा सुख-दुख के चक्कर से मुक्त रहना चाहिए. सूर्योदय के पहले जगना, स्नान भजन दान करना चाहिए. धन और ज्ञान के लिए सुपात्रों का होना जरूरी होता है. ध्रुव कथा में 36 हजार साल तपस्या पूरी करने के बाद ध्रुव अपनी माता सुनीति के पास आना ही चाहता था कि पहले स्वर्ग लोक में भगवान उन्हें अपनी शरण में ले लेता है जो आज भी विश्व में ध्रुव तारा के नाम से भोर में दिखाई देता है. कथा क़े दौरान संगीत मय भजन और झांकियां को देख श्रोता भाव विभोर हो गये. कथा क़े दौरान कमेटी के अध्यक्ष कैलाश बिहारी ठाकुर एवं उनके समस्त कार्यकर्ता सराहनीय भूमिका निभा रहे हैं.