भगवान शिव की आरती के बिना अधूरा है शुक्र प्रदोष व्रत, यहां पढ़ें संपूर्ण लिरिक्स

Shukra Pradosh Vrat: शुक्र प्रदोष व्रत के दिन देवों के देव महादेव की पूजा-अर्चना की जाती है और व्रत रखा जाता है. हिंदू धर्म में पूजा के अंत में आरती का पाठ करने का विशेष विधान है. मान्यता है कि आरती के बिना पूजा पूर्ण नहीं मानी जाती. ऐसे में इस लेख में हमने भगवान शिव को समर्पित आरती के बोल प्रस्तुत किए हैं, जिनका पाठ आप पूजा के दौरान कर सकते हैं.

By Neha Kumari | June 12, 2026 8:18 AM

Shukra Pradosh Vrat: प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित एक महत्वपूर्ण व्रत है. यह व्रत प्रत्येक माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है. शास्त्रों के अनुसार, जिस वार को प्रदोष व्रत पड़ता है, उसी के आधार पर उसका नाम रखा जाता है. ज्येष्ठ अधिक मास के कृष्ण पक्ष का प्रदोष व्रत 12 जून, शुक्रवार को पड़ रहा है, इसलिए इसे शुक्र प्रदोष व्रत कहा जाता है. मान्यता है कि जो भक्त इस व्रत को पूरी श्रद्धा और विधि-विधान के साथ करते हैं, उन्हें महादेव के साथ-साथ शुक्र देव की कृपा भी प्राप्त होती है. अधिक मास को भगवान विष्णु का प्रिय माह माना गया है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दौरान किए गए व्रत, पूजा-पाठ, जप-तप और अन्य शुभ कार्यों का फल कई गुना अधिक प्राप्त होता है.

भगवान शिव की आरती 

ॐ जय शिव ओंकारा,स्वामी जय शिव ओंकारा.

ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव,अर्द्धांगी धारा॥

ॐ जय शिव ओंकारा॥

एकानन चतुराननपञ्चानन राजे.

हंसासन गरूड़ासनवृषवाहन साजे॥

ॐ जय शिव ओंकारा॥

दो भुज चार चतुर्भुजदसभुज अति सोहे.

त्रिगुण रूप निरखतेत्रिभुवन जन मोहे॥

ॐ जय शिव ओंकारा॥

अक्षमाला वनमालामुण्डमाला धारी.

त्रिपुरारी कंसारीकर माला धारी॥

ॐ जय शिव ओंकारा॥

श्वेताम्बर पीताम्बरबाघम्बर अंगे.

सनकादिक गरुणादिकभूतादिक संगे॥

ॐ जय शिव ओंकारा॥

कर के मध्य कमण्डलुचक्र त्रिशूलधारी.

सुखकारी दुखहारीजगपालन कारी॥

ॐ जय शिव ओंकारा॥

ब्रह्मा विष्णु सदाशिवजानत अविवेका.

मधु-कैटभ दो‌उ मारे,सुर भयहीन करे॥

ॐ जय शिव ओंकारा॥

लक्ष्मी व सावित्रीपार्वती संगा.

पार्वती अर्द्धांगी,शिवलहरी गंगा॥

ॐ जय शिव ओंकारा॥

पर्वत सोहैं पार्वती,शंकर कैलासा.

भांग धतूर का भोजन,भस्मी में वासा॥

ॐ जय शिव ओंकारा॥

जटा में गंग बहत है,गल मुण्डन माला.

शेष नाग लिपटावत,ओढ़त मृगछाला॥

ॐ जय शिव ओंकारा॥

काशी में विराजे विश्वनाथ,नन्दी ब्रह्मचारी.

नित उठ दर्शन पावत,महिमा अति भारी॥

ॐ जय शिव ओंकारा॥

त्रिगुणस्वामी जी की आरतिजो कोइ नर गावे.

कहत शिवानन्द स्वामी,मनवान्छित फल पावे॥

ॐ जय शिव ओंकारा॥

शिवजी की आरती (2)

हर हर हर महादेव!

सत्य, सनातन, सुन्दर, शिव सबके स्वामी.

अविकारी अविनाशी, अज अन्तर्यामी॥

हर हर हर महादेव!

आदि, अनन्त, अनामय, अकल, कलाधारी.

अमल, अरूप, अगोचर, अविचल, अघहारी॥

हर हर हर महादेव!

ब्रह्मा, विष्णु, महेश्वर तुम त्रिमूर्तिधारी.

कर्ता, भर्ता, धर्ता, तुम ही संहारी॥

हर हर हर महादेव!

रक्षक, भक्षक, प्रेरक, प्रिय औढरदानी.

साक्षी, परम अकर्ता, कर्ता अभिमानी॥

हर हर हर महादेव!

मणिमय-भवन निवासी, अति भोगी रागी.

सदा श्मशान विहारी, योगी वैरागी॥

हर हर हर महादेव!

छाल-कपाल, गरल-गल, मुण्डमाल व्याली.

चिता भस्मतन त्रिनयन, अयनमहाकाली॥

हर हर हर महादेव!

प्रेत-पिशाच-सुसेवित, पीत जटाधारी.

विवसन विकट रूपधर, रुद्र प्रलयकारी॥

हर हर हर महादेव!

शुभ्र-सौम्य, सुरसरिधर, शशिधर, सुखकारी.

अतिकमनीय, शान्तिकर, शिवमुनि मन-हारी॥

हर हर हर महादेव!

निर्गुण, सगुण, निरञ्जन, जगमय नित्य प्रभो.

कालरूप केवल हर! कालातीत विभो॥

हर हर हर महादेव!

सत्‌, चित्‌, आनन्द, रसमय, करुणामय धाता.

प्रेम-सुधा-निधि प्रियतम, अखिल विश्व त्राता॥

हर हर हर महादेव!

हम अतिदीन, दयामय! चरण-शरण दीजै.

सब विधि निर्मल मति कर, अपना कर लीजै॥

हर हर हर महादेव!

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