ज्येष्ठ पूर्णिमा का महत्व: भगवान जगन्नाथ महास्नान और आस्था से जुड़ी पौराणिक परंपराएं

Jyeshtha Purnima 2026: ज्येष्ठ पूर्णिमा पर भगवान जगन्नाथ का महास्नान और देवशयनी एकादशी का महत्व बताया गया है. यह दिन धार्मिक मान्यताओं और पौराणिक परंपराओं में अत्यंत पवित्र माना जाता है.

By Shaurya Punj | June 28, 2026 12:04 PM

सलिल पांडेय
मिर्जापुर

Jyeshtha Purnima 2026: ज्येष्ठ पूर्णिमा को हिंदू परंपरा में अत्यंत पवित्र दिन माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन सूर्य की ऊर्जा विशेष स्थिति में होती है और दिन धीरे-धीरे छोटी अवधि की ओर बढ़ने लगता है. इस पूर्णिमा के लगभग 25 दिन बाद आषाढ़ शुक्ल एकादशी आती है, जिसे देवशयनी एकादशी कहा जाता है. इसी दिन भगवान विष्णु योग निद्रा में चले जाते हैं, जिसके बाद चार महीने तक मांगलिक कार्यों पर विराम माना जाता है.

भगवान जगन्नाथ और महास्नान की परंपरा

ज्येष्ठ पूर्णिमा को भगवान जगन्नाथ, उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के प्रकट दिवस के रूप में भी मनाया जाता है. पुरी स्थित जगन्नाथ मंदिर में इस दिन भव्य स्नान यात्रा का आयोजन होता है, जिसमें भगवान की प्रतिमाओं को 108 कलशों से स्नान कराया जाता है. स्नान के बाद उन्हें एकांत कक्ष में रखा जाता है, जहां वे “अनासर” अवधि में रहते हैं. इसके बाद भक्तों को विशेष रूप से 56 भोग अर्पित किए जाते हैं.

पौराणिक मान्यताएं और जगन्नाथ जन्म कथा

स्कंद पुराण के अनुसार, ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन ही राजा इंद्रद्युम्न द्वारा स्थापित विशाल मंदिर में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की दारु (लकड़ी) से बनी मूर्तियों का प्राकट्य हुआ था. इसी कारण यह दिन भगवान जगन्नाथ के प्रकट दिवस के रूप में भी मनाया जाता है. यह परंपरा आस्था और सांस्कृतिक विरासत का गहरा प्रतीक है.

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कबीर और जीवन दर्शन की सीख

भारतीय संत कबीर ने अपने दोहों के माध्यम से समाज को सरलता और सत्य का संदेश दिया. उनके अनुसार मानव जीवन का उद्देश्य आंतरिक शुद्धता और कर्म की सच्चाई है. कबीर की शिक्षाएं आज भी लोगों को नैतिकता, सादगी और आत्मचिंतन की प्रेरणा देती हैं, जो धार्मिक उत्सवों के आध्यात्मिक महत्व को और भी गहरा बनाती हैं.