कर्ज चुकाए बिना मरने वालों की आत्मा के साथ क्या होता है? जानें गरुड़ पुराण में क्या है दंड 

Garud Puran: गरुड़ पुराण के अनुसार, कर्ज केवल आर्थिक लेन-देन नहीं, बल्कि कर्मों से जुड़ा दायित्व भी है धार्मिक मान्यता है कि यदि कोई व्यक्ति कर्ज चुकाए बिना मृत्यु को प्राप्त हो जाता है, तो उसे मृत्यु के बाद भी अपने कर्मों का फल भुगतना पड़ सकता है आइए जानते हैं कि गरुड़ पुराण में ऐसे लोगों के लिए क्या दंड बताया गया है.

By Neha Kumari | July 3, 2026 6:29 PM

Garud Puran: अक्सर लोग सोचते हैं कि इंसान की मौत के साथ ही उसके सारे कर्ज और उधारी खत्म हो जाते हैं लेकिन ‘गरुड़ पुराण’ के अनुसार ऐसा बिल्कुल नहीं है इस पवित्र ग्रंथ में बताया गया है कि अगर कोई व्यक्ति किसी का पैसा चुकाए बिना मर जाता है, तो परलोक में उसकी आत्मा को कड़ी सजा भुगतनी पड़ती है 

यमलोक की यात्रा में मिलता है कष्ट

ग्रंथ के अनुसार, जब किसी कर्जदार व्यक्ति की मृत्यु होती है और उसने जीवन में सामर्थ्य होने के बावजूद जानबूझकर दूसरों का पैसा दबाया होता है, तो यमराज के दूत (यमदूत) उसे यमलोक ले जाते समय रास्ते में बहुत प्रताड़ित करते हैं ऐसी आत्माओं को यमलोक की यात्रा के दौरान बेहद भयानक और उग्र ‘वैतरणी नदी’ को पार करना पड़ता है इस नदी में खून, मवाद और हड्डियों के ढेर होते हैं और खतरनाक जीव आत्मा को नोचते हैं कर्ज न चुकाने वालों को इस नदी में असहनीय कष्ट भुगतने पड़ते हैं

अगले जन्म में चुकाना पड़ सकता है कर्ज

गरुड़ पुराण में पुनर्जन्म का भी उल्लेख मिलता है मान्यता है कि यदि कोई व्यक्ति कर्ज चुकाए बिना मर जाता है, तो अगले जन्म में उसे उसी ऋणदाता के घर किसी रूप में जन्म लेकर अपने कर्मों का फल भोगना पड़ सकता है

  • वह नौकर या सेवक के रूप में जन्म ले सकता है
  • या फिर बैल, घोड़े या अन्य भारवाहक पशु के रूप में जन्म लेकर सेवा कर सकता है

धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस सेवा के माध्यम से उसका कर्म ऋण समाप्त होता है

क्या दान-पुण्य से मिल जाती है मुक्ति?

गरुड़ पुराण के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति पर किसी का धन बकाया है, तो उसके दान-पुण्य का पूरा फल नहीं मिलता पहले उसके अधूरे ऋण का कर्मफल माना जाता है, उसके बाद ही पुण्य का लाभ प्राप्त होता है

शास्त्रों में क्या बताया गया है?

यदि कोई व्यक्ति कर्ज चुकाना चाहता था, लेकिन असमय मृत्यु के कारण नहीं चुका पाया, तो शास्त्रों के अनुसार यह दायित्व उसकी संतान या उत्तराधिकारियों का होता है अगर संतान उसकी संपत्ति का उपभोग करती है, तो उसे मृतक के कर्जों को भी चुकता करना चाहिए ताकि पूर्वज की आत्मा को शांति मिल सके.

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