ईद उल फितर का चांद देखने की अपील

Eid 2026: 19 मार्च को ईद का चांद देखने की संभावना के बीच एदार ए शरीया ने राज्यभर में व्यापक तैयारी कर अफवाहों से बचने और शरई नियमों के पालन की अपील की.

By Shaurya Punj | March 19, 2026 3:51 PM

एदार ए शरीया, झारखण्ड

Eid 2026: एदार ए शरीया झारखण्ड के नाजिम-ए-आला मौलाना मुहम्मद कुतुबुद्दीन रिज़वी ने कहा है कि 19 मार्च 2026, जुमेरात, रमजानुल मुबारक 1447 महीने की 29 तारीख़ है और ईद-उल-फित्र का पवित्र आगमन होने वाला है. 29 रमजान के अनुसार 19 मार्च, दिन जुमेरात (गुरुवार) को ईद-उल-फित्र का चांद नजर आने की संभावना है. इसलिए सभी लोगों से अपील की गई है कि वे चांद देखने का पूरा इंतज़ाम करें और खासकर ऊंची जगहों से चांद देखने की कोशिश करें.

जिम्मेदारों की भूमिका और तैयारी

सभी आलिम, मस्जिदों के इमाम, रुएत-ए-हिलाल कमेटियों के इंचार्ज और मस्जिद कमेटियों के अधिकारी भी तैयार रहने को कहा गया है. अगर कहीं चांद नजर आए तो एदार ए शरीया झारखण्ड इस्लामी मरकज हिंद पीडी, रांची को तुरंत सूचित करने की अपील की गई है. साथ ही लोकल जिम्मेदार, धार्मिक आलिम और जिला व रीजनल रुएत-ए-हिलाल सेंटर को भी जानकारी देने को कहा गया है, ताकि जरूरत पड़ने पर शरई शहादत हासिल की जा सके.

शरई नियम और गवाही की अनिवार्यता

एदार ए शरीया ने दूर-दराज इलाकों में भी चांद नजर आने की स्थिति में शरई शहादत प्राप्त करने की पूरी तैयारी की है. जिम्मेदार आलिम और स्कॉलर राज्य के कोने-कोने में मौजूद रहेंगे. चूंकि चांद नजर आने की स्थिति में काजी-ए-शरीयत के समक्ष दो व्यक्तियों की गवाही अनिवार्य होती है, इसलिए इस प्रक्रिया का पालन जरूरी बताया गया है.

निर्धारित स्थानों पर व्यवस्था

नाजिम-ए-आला ने बताया कि 19 मार्च को मगरिब से पहले ही एदार ए शरीया के काजी, मुफ्ती, उलेमा और अधिकारी हजरत कुतुबुद्दीन रिसालदार शाह की दरगाह, रिसालदार नगर, डोरंडा (रांची) में मौजूद रहेंगे. वहीं मस्जिदों के इमाम, विभिन्न संगठनों और पंचायतों के प्रतिनिधि अपने-अपने स्थानों पर चांद देखने के लिए तैनात रहेंगे.

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अफवाहों से बचने की अपील

एदार ए शरीया ने संभावित प्रतिकूल परिस्थितियों को देखते हुए सख्त कार्य योजना तैयार की है. मुस्लिम समुदाय से अपील की गई है कि वे काजी-ए-शरीयत के फैसले का इंतजार करें और अफवाहों से बचें. रुएत-ए-हिलाल कमेटियों से भी कहा गया है कि बिना शरई सबूत कोई ऐलान न करें और इमामों पर दबाव न बनाया जाए. इस वर्ष राज्य के 70 से अधिक स्थानों पर चांद देखने की व्यवस्था की गई है.