Gupt Navratri 2026: गुप्त नवरात्रि पर करें माता दुर्गा की आरती, दूर होंगे दुख-कष्ट, जीवन में आएगी सफलता

Gupt Navratri 2026: गुप्त नवरात्रि का समय माता दुर्गा को प्रसन्न कर उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए सबसे उत्तम माना जाता है. इस दौरान भक्तों को माता दुर्गा की उपासना के साथ रोज़ाना आरती का पाठ करना चाहिए. बिना आरती के माता की पूजा अधूरी मानी जाती है. यहां माता दुर्गा की आरती के लिरिक्स प्रस्तुत किए गए हैं.

By Neha Kumari | January 19, 2026 3:28 PM

Gupt Navratri 2026: आज, सोमवार को गुप्त नवरात्रि का पहला दिन है. मान्यता है कि नवरात्रि के दौरान जो भी भक्त सच्चे मन से माता दुर्गा की नौ दिनों तक पूजा और आरती करता है, उस पर माता दुर्गा की सदा कृपा बनी रहती है. साथ ही जीवन से दुख-कष्ट और बाधाएं दूर होती हैं. जीवन में स्थिरता, शांति और खुशहाली आती है. सुबह और शाम—दोनों समय स्नान करने के बाद शुभ मुहूर्त में माता की पूजा प्रारंभ करें और अंत में आरती गान के साथ पूजा संपन्न करें.

माता दुर्गा आरती (Mata Durga Aarti)

जय अम्बे गौरी मैया जय मंगल मूर्ति।
तुमको निशिदिन ध्यावत हरि ब्रह्मा शिव ऋषि ॥टेक॥

मांग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को।
उज्ज्वल से दोउ नैना, चंद्रबदन नीको ॥जय॥

कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै।
रक्तपुष्प गल माला, कंठन पर साजै ॥जय॥

केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्परधारी।
सुर-नर-मुनिजन सेवत, तिनके दुखहारी ॥जय॥

कानन कुंडल शोभित, नासाग्रे मोती।
कोटिक चंद्र दिवाकर, राजत सम ज्योति ॥जय॥

शुंभ-निशुंभ बिडारे, महिषासुर घाती।
धूम्र विलोचन नैना, निशिदिन मदमाती ॥जय॥

चौंसठ योगिनि मंगल गावैं, नृत्य करत भैरू।
बाजत ताल मृदंगा, अरु बाजत डमरू ॥जय॥

भुजा चार अति शोभित, खड्ग खप्परधारी।
मनवांछित फल पावत, सेवत नर-नारी ॥जय॥

कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती।
श्री मालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योति ॥जय॥

श्री अम्बे जी की आरती, जो कोई नर गावै।
कहत शिवानंद स्वामी, सुख-संपत्ति पावै ॥जय॥

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