स्वस्थ समाज के आधारस्तंभ

समय-समय पर हमारे समाज में हिंसक घटनाएं ऐसा वीभत्स एवं तांडव नृत्य करती रही हैं, जिससे संपूर्ण मानवता प्रकंपित हो जाती है. भगवान महावीर हो या गौतम बुद्ध, स्वामी विवेकानंद हो या महात्मा गांधी- समय-समय पर ऐसे अनेक महापुरुषों ने अपने क्रांत चिंतन के द्वारा समाज का समुचित पथदर्शन किया है. आज देश में गहरे […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | December 7, 2014 11:44 PM
समय-समय पर हमारे समाज में हिंसक घटनाएं ऐसा वीभत्स एवं तांडव नृत्य करती रही हैं, जिससे संपूर्ण मानवता प्रकंपित हो जाती है. भगवान महावीर हो या गौतम बुद्ध, स्वामी विवेकानंद हो या महात्मा गांधी- समय-समय पर ऐसे अनेक महापुरुषों ने अपने क्रांत चिंतन के द्वारा समाज का समुचित पथदर्शन किया है.
आज देश में गहरे हुए घावों को सहलाने के लिए, निस्तेज हुई मानवता को पुनर्जीवित करने एवं इंसानियत की बयार को प्रवाहमान करने के लिए अहिंसक समाज रचना की अपेक्षा है, जो मनुष्य जीवन के बेमानी होते अर्थो में नये जीवन का संचार कर सकें. किसी भी देश, राष्ट्र, समाज और परिवार की उन्नति और शांति के लिए पारस्परिक सद्भाव अपेक्षित होता है. सद्भाव के अभाव में अहिंसा जीवन व्यवहार में प्रतिष्ठित नहीं हो सकती. पारस्परिक टकराव आपसी दूरियां ही नहीं बढ़ाता, अपितु वह कितनों-कितनों के लिए घातक बन जाता है.
जाति, भाषा, वर्ण व क्षेत्र का दुराग्रह, सांप्रदायिक उन्माद, तुच्छ स्वार्थवृत्ति और विकृत मानसिकता पारस्परिक असद्भाव के कारण बनते हैं. वर्तमान युग में अनैतिकता एक प्रमुख समस्या के रूप में उभर रही है. चोरी न करना, बेमेल मिलावट न करना, अपने लाभ के लिए दूसरों को हानि न पहुंचाना, रिश्वत न लेना, चुनाव और परीक्षा के संदर्भ में अवैध उपायों का सहारा न लेना आदि ऐसे संकल्प हो सकते हैं, जो अहिंसक, तनावमुक्त एवं स्वस्थ समाज के लिए हमारे आधारस्तंभ बन सकते है.
आचार्य लोकेशमुनि