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Home Religion ज्योतिष जिज्ञासा : मंगल के स्वघर में विराजमान होने का प्रभाव

ज्योतिष जिज्ञासा : मंगल के स्वघर में विराजमान होने का प्रभाव

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ज्योतिष जिज्ञासा : मंगल के स्वघर में विराजमान होने का प्रभाव

सद्गुरुश्री स्वामी आनंद जी
Qअगर कुंडली में मंगल स्वघर में विराजमान हो, तो क्या यह अशुभ फल देता है?
-ब्रह्मानंद सिंह, हाजीपुर
जन्म कुंडली में यदि मंगल स्वघर का हो, तो व्यक्ति साहसी, दयालु, दबंग, मित्रों का परम मित्र और शत्रुओं का महाशत्रु होता है. स्वघर का मंगल यदि लग्न, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम, और द्वादश भाव में हो तो मांगलिक होते हुए भी मंगल की तीव्रता में बेहद कमी हो जाती है. यदि स्वघर का मंगल लग्न या पराक्रम भाव में हो तो ऐसे व्यक्ति अपनी निर्भिकता, साहस और हिम्मत के लिए बहुत दिनों तक याद किये जाते हैं और यदि स्वग्रही मंगल पराक्रम भाव में हो तो व्यक्ति सफल प्रशासक बन कर उच्च पद पर आसीन होता है. अगर स्वग्रही मंगल कर्म या लाभ भाव में हो तो कुलदीपक/दीपिका योग बना कर कुल कुटुंब में सर्वश्रेष्ठ स्थिति प्रदान करता है.

Qक्या वास्तु में छोटे और बड़े पेड़ पौधों की भी कोई दिशा है या ये कहीं भी लगाये जा सकते हैं?

– संजय दूबे, सीवान

बृहत स्वरूप धारण करनेवाले वृक्षों का उचित स्थान सिर्फ दक्षिण-पश्चिम कोण है. वास्तु के सिद्धांत कहते हैं कि सुख, शांति और सुरक्षा के लिए यूं तो 180 अंश से 270 अंश तक का स्थान मुख्य रूप से बड़े और बृहत वृक्षों का है, पर बड़े पेड़ों की सबसे सटीक जगह 210 से 240 डिग्री है. विशेष परिस्थितियों में 150 से 180 और 280 से 300 डिग्री पर मध्यम बड़े वृक्षों को स्थान दिया जा सकता है, मगर शून्य से 90 अंश तक के स्थान पर बड़े वृक्ष सुख, चैन, आराम और समृद्धि सबका बेड़ा गर्क करने की क्षमता रखते हैं. 180 से 270 डिग्री के मध्य छोटे पौधे शुभ फल नहीं देते. ये परस्पर सहयोग की कमी कर, असुरक्षित बनाते हैं और मन को बेचैन करते हैं. शून्य से 90 अंश तक का स्थान बेहद छोटे, हल्के और अधिक जल वाले पौधों का है. अंश यानी डिग्री की स्थिति आपको आपके कंपास यानी कुतुबनुमा से आसानी से प्राप्त हो जायेगी, जिसे घर या प्लॉट के मध्य रखकर सही दिशा और सटीक अंश का पता लगाया जा सकता है.

Qक्या घर में बेकार सामान रखने की भी कोई दिशा है?

– अर्पित श्रीवास्तव

घर में बेकार चीजें होनी ही नहीं चाहिए. घर में बेमतलब के सामानों का भंडारण शुभ फलों में कमी कर के तनाव का कारक बनता है. कम काम में आने वाले सामानों के स्टोरेज की सही दिशा नैऋत्य कोण यानी दक्षिण-पश्चिम कोना है. यदि यह संभव न हो, तो फिर किसी भी कमरे के दक्षिण-पश्चिम दिशा में इसे रखा जा सकता है. ईशान्य कोण यानी उत्तर-पूर्व के कोने का इस्तेमाल इस तरह के सामान को रखने के लिए हर्गिज नहीं करना चाहिए. यथासंभव घर में बेकार के सामान लक्ष्मी की बहन अलक्ष्मी यानी दरिद्रता का प्रतिनिधित्व करती है.

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