नवरात्र पूजन में अवश्य करें विशेष नियमों का पालन

कलश स्थापना के दिन शुक्र का उदित होना सुख-समृद्धि का कारक माना गया है. इस दिन बुध का शुक्र के घर तुला में आना शुभ फलदायी है. नवरात्र में कुछ ऐसे भी नियम हैं, जिनका पालन अवश्य करना चाहिए.... जैसे व्रती को जमीन पर सोना चाहिए. ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए. व्रती को क्रोध, लालच, […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | September 28, 2019 5:56 AM

कलश स्थापना के दिन शुक्र का उदित होना सुख-समृद्धि का कारक माना गया है. इस दिन बुध का शुक्र के घर तुला में आना शुभ फलदायी है. नवरात्र में कुछ ऐसे भी नियम हैं, जिनका पालन अवश्य करना चाहिए.

जैसे व्रती को जमीन पर सोना चाहिए. ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए. व्रती को क्रोध, लालच, मोह आदि दुष्प्रवृत्तियों का त्याग करना चाहिए. नौ दिनों तक यथा शक्ति मां की पूजा-अराधना करें. दुर्गा सप्तशती का पाठ जरूर करें. व्रती को दिन में फल और रात्रि में दूध का सेवन कर चाहिए. अन्न ग्रहण न करें. सुबह-शाम आरती जरूर उतारें.

मां को रोज भोग लगाएं. अष्टमी या नवमी को कन्या पूजन करें. नौ कन्याओं को उपहार, दक्षिणा देकर आशीर्वाद लें. ध्यान रखें, घट स्थापना के बाद सूतक लग जाये, तो कोई दोष नहीं होता, मगर पहले ऐसा हो जाये, तो पूजा आदि न करें. हिंदू पंचांग के अनुसार, कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त- सुबह 9:15 से 12:20 तक है.