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नागपंचमी पूजा से दूर होते हैं जीवन के सारे कष्ट

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नागपंचमी पूजा से दूर होते हैं जीवन के सारे कष्ट
श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नागपंचमी मनाने का विधान है, जो तिथि इस बार सोमवार, 5 अगस्त को है. इस दिन श्रावण सोमवार व्रत-पूजा भी है, अत: बेहद शुभ दिन है. हिंदू पुराणों में नागों को पाताल लोक या फिर नाग लोक का स्वामी माना जाता है.
नागपंचमी के दिन सर्पों की देवी मां मनसा देवी की विशेष पूजा की जाती है. दक्षिण भारत में हिमालय शृंखला के शिवालिक पर्वत पर मनसा देवी का विशाल मंदिर है. मान्यता है कि भगवान शिव के अंश से ही मनसा देवी की उत्पत्ति हुई थी. उन्हें नाग समुदाय की माता वासुकि की बहन भी माना जाता है. नाग जहां भगवान शिव के गले के हार है, वहीं भगवान विष्णु की शैय्या भी.

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चूंकि यह काल वर्षा ऋतु का भी होता है, जिसमें माना जाता है कि भू-गर्भ से नाग निकल कर भू तल पर आ जाते हैं. वह किसी अहित का कारण न बनें, इसके लिए भी नाग देवता को प्रसन्न करने के लिये नाग पंचमी की पूजा की जाती है. मान्यता है कि नागपंचमी के दिन मनसा देवी की आराधना करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. इस दिन सांपों को दूध और लावा अर्पित कर लोग अपने परिवार के सुख-समृद्धि और सुरक्षा का वरदान मांगते हैं.
पौराणिक कथा : पुराणों में श्रीकृष्ण द्वारा कालिया नाग के मर्दन की कथा वर्णित है, जो लोक कथाओं में भी प्रचलित है. इसमें बताया गया है कि एक बार कालिया नाग ने पूरी यमुना नदी के पानी में अपना विष घोल दिया था, जिससे बृजवासियों के लिए नदी का पानी जहर बन चुका था.
तब भगवान श्रीकृष्ण ने यमुना में कूद कर कालिया नाग को पराजित कर उसका घमंड चूर किया था. उस दिन सावन की पंचमी तिथि थी. तब भगवान ने उसे वरदान दिया कि जो पंचमी तिथि को सर्प देवता को दूध पिलायेगा, पूजा करेगा, उसके जीवन से सारे कष्ट दूर हो जायेंगे.
नागपंचमी तिथि व मुहूर्त : पूजा मुहूर्त – 05:49 से 8:28 (5 अगस्त, 2019) पंचमी तिथि प्रारंभ – 18:48 (4 अगस्त, 2019)
पंचमी तिथि समाप्ति – 15:54 (5 अगस्त, 2019)
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