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पाकिस्तान पर अंकुश

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अफगानिस्तान को तबाह और बरबाद करने में पाकिस्तान की भूमिका जगजाहिर है. यह भी एक स्थापित तथ्य है कि पाकिस्तान पर अंकुश लगाये बिना अफगानिस्तान में स्थायी शांति मुमकिन नहीं है. जॉर्जटाउन विश्वविद्यालय से जुड़ी सुरक्षा विशेषज्ञ सी क्रिस्टीन फेयर ने निर्वाचित अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से कहा है कि अफगानिस्तान को अस्थिर करने की पाकिस्तानी प्रयासों से अमेरिका की अफगानिस्तान नीति को बचाना होगा. देश के ग्रामीण इलाकों में बीते कुछ समय से तालिबान का वर्चस्व तेजी से बढ़ा है और अफगानी सेना पर हमलों की संख्या भी बढ़ी है.
तालिबानी गिरोहों को पाकिस्तान के समर्थन और शह को रेखांकित करते हुए फेयर ने आगाह किया है कि यदि पाकिस्तान द्वारा तालिबान को पनाह, प्रशिक्षण, धन और सैन्य सहायता निर्बाध रूप से जारी रहती है, तो अमेरिकी और अफगान सरकारों के सभी प्रयास विफल हो जायेंगे. पाकिस्तान के महत्वपूर्ण नेताओं में शुमार पूर्व सीनेटर अफरासियाब खटक ने एक लेख में लिखा है कि बरसों से पाकिस्तानी सेना और सरकार की नीतियां देश के विभिन्न शोषित तबकों के साथ पाक-अफगान सीमा के दोनों तरफ बसे पख्तूनों पर नियंत्रण स्थापित करने की नीयत से प्रेरित हैं. उन्होंने स्पष्ट कहा है कि तालिबान परियोजना इसी नीयत का परिचायक है और इसका लक्ष्य अफगान/पख्तून समुदाय के सामाजिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान को नष्ट करना है.
भारत के विरुद्ध आतंकवाद का इस्तेमाल भी दक्षिण एशिया में अशांति फैलाने के उसके खतरनाक इरादों का ही विस्तार है. ‘हार्ट ऑफ एशिया’ सम्मेलन के घोषणापत्र में भी पाकिस्तान से कहा गया है कि वह अपनी धरती से उन आतंकी गिरोहों को खत्म करे, जो पड़ोसी देशों में हिंसा के लिए जिम्मेवार हैं. पाकिस्तान को यह भी समझना होगा कि आतंक के राजनीतिक इस्तेमाल से उसका अस्तित्व भी खतरे में है. खटक ने भी इसे रेखांकित किया है.
उसे भारतीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह की इस बात का भी संज्ञान लेना चाहिए कि पड़ोसियों को नुकसान पहुंचाने के क्रम में कहीं पाकिस्तान में ही विभाजन की लकीरें न खिंच जायें. उम्मीद है कि ट्रंप प्रशासन वैश्विक और क्षेत्रीय परिस्थितियों के संदर्भ में पाकिस्तान पर समुचित दबाव बनाने की ठोस पहलों की शुरुआत करेगा.
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