-हरिवंश-
जो पवित्र है, पूजनीय है, सात्विक है, शुद्ध है, ईश्वरीय है, वही संगीत है. इसका अहसास ऐसे ही व्यक्तियों की मौजूदगी में संभव है. अवसर था, प्रमोद शाह जी की पुस्तक थॉटस आन रिलीजियस पालिटिक्स इन इंडिया (तीन खंड) के लोकार्पण का. एक-एक खंड लगभग 700 पेजों का. तीनों खंडों में कुल 2092 पेज. इसे तैयार करने के लिए प्रमोदजी ने दो सौ पुस्तकें पढ़ीं. 50 पत्रिकाएं, अखबार वगैरह. इसमें 150 पुस्तकों से संदर्भ हैं और 30 पत्रिकाओं से. मूल रूप से हिंदी में लिखे लेख, हिंदी में छपे हैं. अंग्रेजी में लिखे लेख, अंग्रेजी में हैं.
चौथे हैं डॉ शशि शेखर शाह. पति-पत्नी दोनों डाक्टर हैं. न्यूयार्क के मशहूर न्यूरोलाजिस्ट. इसके बाद हैं, प्रमोद जी. इनकी महत्वपूर्ण कृति सामने है. पुस्तक को प्रकाशित किया है, सोसाइटी फार नेशनल अवेयरनेस, कोलकाता ने. प्रस्तावना लिखी है जानेमाने विद्वान, विचारक व पूर्व राज्यपाल टीएन चतुवर्दी ने. डॉ कृष्ण बिहारी मिश्र ने संस्तुति लिखी है. पुस्तक पर दशकों से काम कर रहे हैं प्रमोद शाह जी. पुस्तक में प्रमोदजी के ही शब्दों में ‘‘250 से अधिक संबोधन, भाषण, संसद की बहस, संसद का वक्तव्य, लेख, साक्षात्कार, वार्ताएं, चर्चाएं, संपादकीय, समाचार, स्तंभ, पत्र, डायरी, रिपोर्ट, प्रस्ताव, हिंदी-उर्दू की कविताएं इत्यादि शामिल हैं.
विभिन्न क्षेत्रों के करीब 200 व्यक्तियों के विचार संकलित हैं. इनमें राजनीतिज्ञ, चिंतक, पत्रकार, स्तंभकार, सरकारी अधिकारी, लेखक, दार्शनिक, संत, धार्मिक नेता, इतिहासकार, विधिवेत्ता, वैज्ञानिक, अवकाशप्राप्त सेनाधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता, कलाकार, विदेशी लेखक, हिंदी-उर्दू कवि इत्यादि प्रमुख हैं.’’
पहले खंड में 1857 से 14 अगस्त 1947 का ब्योरा है. आजादी की पहली लड़ाई से भारत के आजाद होने तक. दूसरा खंड है, 15 अगस्त 1947 से 1 दिसंबर 1989 तक का. इस कालखंड में एक ही पार्टी का दिल्ली में शासन रहा. तीसरे खंड में 2 दिसंबर 1989 से 15 अगस्त 2008 तक के विवरण हैं. यह भारत में साझा सरकारों का दौर है. इन तीन खंडों की सामग्री का संकलन और संपादन किया है प्रमोद शाह ने.
टीएन चतुवर्दी प्रस्तावना में लिखते हैं कि इस पुस्तक में अनेक जानेमाने लोगों के विचार हैं. मसलन सर सैयद अहमद खां, जेबी कृपलानी, राममनोहर लोहिया, फिराक गोरखपुरी वगैरह. चतुवेर्दी मानते हैं कि भारत में दो सभ्यताओं के मिलन से ही भारतीय पुनर्जागरण जन्मा. विचारों की बाढ़ एवं आत्ममंथन ने देश में एक नया माहौल बनाया. नयी जागरूकता आयी. यह पुनर्जागरण सामाजिक, धार्मिक, आर्थिक, सांस्कृतिक, मनोवैज्ञानिक, शैक्षणिक और अंतत: राजनीतिक था. आगे चल कर इसी प्रक्रिया के गर्भ से कांग्रेस पैदा हुई. धीरे-धीरे भारत राष्ट्र के रूप में आकार लिया. अंग्रेजों की अपनी कूटनीति थी. राजनीति की नस पर धर्म का हाथ पड़ने लगा. अंदर से टूट-फूट और बिखराव के बीच पनपे. भारत बंटा. आज भी सांप्रदायिक मुद्दे -सवाल उठते-उभरते रहे हैं. इन सभी प्रक्रियाओं को समझने के लिए प्रमोदजी की यह पुस्तक अनूठी है.
