[tdb_header_weather inline="yes" temp_color="#000000" loc_color="#000000" api="653566bd56b7ecfee45d74c0fc937fc1" float_right="yes" align_horiz="content-horiz-center" icon_size="24" icon_space="10" f_temp_font_family="420" f_temp_font_size="14" f_temp_font_weight="500" f_unit_font_size="14" f_loc_font_size="14" f_unit_font_family="882" location="Ranchi" icon_color="#000000"]
[tdb_header_categories align_horiz="content-horiz-left" el_align_horiz="content-horiz-left" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLXJpZ2h0IjoiNSIsImhlaWdodCI6IjQwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9fQ==" icon_size="18" limit="18" elem_text_color="#2d2800" f_elem_font_family="420" f_elem_font_size="16px" f_elem_font_weight="500" tdicon="tdc-font-fa tdc-font-fa-navicon-reorder-bars" inline="yes" shadow_shadow_size="0" shadow_shadow_offset_vertical="0" shadow_shadow_spread="0" bg_color="#f9f9f9" include="1028, 1081, 1446, 1228, 3706, 2624,1071"][tdb_mobile_horiz_menu inline="yes" menu_id="372" tdc_css="eyJwaG9uZSI6eyJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBob25lX21heF93aWR0aCI6NzY3LCJhbGwiOnsiYm9yZGVyLXN0eWxlIjoibm9uZSIsImRpc3BsYXkiOiIifX0=" f_elem_font_size="18px" f_elem_font_weight="eyJhbGwiOiI3MDAiLCJwaG9uZSI6IiJ9" f_elem_font_family="420" text_color_h="#f58220" main_sub_icon_size="13"]
Home Opinion लोकलुभावन घोषणाओं से परहेज

लोकलुभावन घोषणाओं से परहेज

0
लोकलुभावन घोषणाओं से परहेज

अंजनी कुमार सिंह

नयी दिल्ली : चालू परियोजनाओं को पूरा करने के लिए रेलवे को छह से आठ लाख करोड़ रुपये की जरूरत है. 140 मार्गो पर रेलवे घाटे में चल रही है. सुरक्षा और संरक्षा पर भी एक लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के खर्च की बात बतायी जा रही है. पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल लागू होने के बाद भी संतोषजनक परिणाम नहीं आये. इसके बाद रेलवे में विदेशी निवेश का द्वार खोल दिया गया है. हालांकि इसके बाद भी अब तक रेलवे में कोई सकारात्मक निवेश होता नहीं दिख रहा है. इससे निबटने के लिए रेल मंत्री निवेशकों के लिए कुछ खास पहल कर सकते हैं. चालू प्रोजेक्ट के अलावा पेंडिंग और आधी अधूरी परियोजना की संख्या भी कम नहीं है. रेलवे के लगभग 359 प्रोजेक्ट पेंडिंग में है. जिस पर लगभग 1.82 लाख करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है. सरकार की प्राथमिकता मुख्य रूप से आय बढ़ाने तथा खर्च घटाने पर होगा. इसके लिए सीधे किराया न बढ़ाकर अन्य रास्ता तलाशा जा रहा है.

हलांकि रेल बजट में लोकलुभावन घोषणाओं से परहेज किया जायेगा. जनप्रतिनिधियों के दबाव में रेलवे इस बार वैसी कोई घोषणा नहीं करेगा जिससे सरकार को आर्थिक नुकसान उठाना पड़े. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से पहले ही हिदायत दी गयी है कि किसी भी सांसद या मंत्री के दबाव में आकर ऐसी कोई भी घोषणा नहीं करें, जिससे रेलवे का वित्तीय भार और अधिक बढ़े रेल मंत्रलय के मुताबिक ऐसे 140 रूट है, जिस पर रेलवे घाटे के साथ गाड़ी का परिचालन कर रही है.

रेल मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक इस बार के रेल बजट में मुख्य रूप से तीन बातो पर ध्यान दिया गया है. निवेश, आधुनिकीकरण और पारदर्शिता. सरकार निवेश के लिए विदेशी निवेश सीमा 100 फीसदी कर दी है, फिर भी अब तक अनुकूल प्रस्ताव नहीं मिले हैं. इसीलिए सरकार इस दिशा में और अधिक निवेशकों को लुभाने के लिए कोई प्रस्ताव ला सकती है. ऑन गोइंग प्रोजेक्ट के लिए छह से आठ लाख करोड़ रुपये की जरूरत है. इसलिए सरकार इस पर गंभीरता से विचार करेगी.

कुछ और भी घोषणाएं हो सकती है, जिसमें 8000 हजार स्टेशनों को नवीनीकरण शामिल है. यह एफडीआइ या पीपीपी मॉडल के तहत किया जायेगा. आधुनिकीकरण के तहत ट्रेनों में वाई-फाई के साथ ही बड़ी संख्या में सीसीटीवी कैमरा लगाने का भी प्रस्ताव है. इतना ही नहीं, कुछ ऐसे स्टेशन भी हैं जहां पर बिजली की सुविधा है उन स्टेशनों के जमीन का उपयोग करने के लिए उन स्थानों पर आइटीआइ, माइक्रो इंटरप्राइजेज स्कील डेवलपमेंट, महिला सेल्फ हेल्प ग्रुप केंद्र, आंगनबाड़ी केंद्र आदि बनाने की घोषणा बजट में हो सकती है. स्वच्छता अभियान पर विशेष फोकस किया जायेगा. वर्ष 2016 से एलएचवी कोच बनेंगे जो वायो टायलेट्स से युक्त होंगे. फ्लाइट में उपयोग होने वाले वैक्यूम टॉयलेट का भी प्रावधान करने की घोषणा की जा सकती है. बजट में पारदर्शिता पर खास ध्यान दिये जाने की घोषणा की जा सकती है. इसके तहत ज्यादातर पॉवर जीएम को दे दिया गया है.

ऐप पर पढें
होम आप का शहर
News Snap News Reel