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भ्रष्टाचार को कुचलना ही होगा

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बात भारत में विकास की हो, तो सही मायने में यहां सबसे अधिक विकास भ्रष्टाचार का हुआ है. ट्रांसपैरेंसी इंटरनेशनल की वार्षिक रिपोर्ट पर यकीन करें, तो भ्रष्टाचार के मामले में भारत दुनिया के 175 भ्रष्टाचारी देशों में 94वें स्थान से छलांग लगा कर 85वें स्थान पर पहुंच गया है.
सर्वेक्षण करनेवाली इस संस्था के मुताबिक भारत में भ्रष्टाचार में कमी दर्ज की गयी है, लेकिन यदि हम जमीन पर देखें, तो आज भी यहां भ्रष्टाचार किसी भी मायने में कम नहीं हुआ है.
देश में नयी सरकार बनने के बाद से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘न खाऊंगा और न खाने दूंगा’ की तर्ज पर शासन चलाने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन वस्तुस्थिति का पता तो तब चलेगा, जब उनके मंत्रियों के पांव सरकार में जम जायेंगे. भ्रष्टाचार ही एक ऐसा धंधा है, जहां दिन दूना, रात चौगुना विकास होता है.
इस गोरखधंधे में क्या आम और क्या खास सभी लगे हुए हैं. करोड़ों रुपये के गबन के आरोप में उत्तर प्रदेश का एक इंजीनियर पकड़ा जाता है, तो वह सिर्फ एक बानगी बन कर सामने आता है. इस तरह के यादव सिंह जैसे न जाने कितने इंजीनियर और अधिकारियों समेत राजनेता भ्रष्टाचार की नदी में गोता लगा रहे हैं. यह सरकार की दया दृष्टि ही है कि उसके कारिंदे भ्रष्टाचार की नदी बहा रहे हैं.
ऐसे सरकारी बाबुओं पर न तो सरकार का चाबुक चलता है और न उनकी अंतरात्मा से कोई आवाज आती है.
दरअसल, सरकार करोड़ों अरबों रुपये की योजना बनाती तो है, लेकिन धरातल पर योजनाराशि का कुछ हिस्सा ही खर्च हो पाता है. देश के लोगों को सांप के फन उठाने से पहले ही कुचल देना चाहिए. यदि इसे कुचला न गया, तो यह और अधिक विषधर बन सकता है.
हलधर पंडित, आमझोर, गोड्डा
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